हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रेलवे को 8 लाख अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश

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Lucknow News: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गर्भस्थ शिशु को ‘व्यक्ति’ मानते हुए बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने रेलवे को 8 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया, क्योंकि हादसे में गर्भवती महिला के साथ भ्रूण की भी मौत हुई थी. जस्टिस प्रशांत कुमार ने कहा कि पांच महीने से अधिक का भ्रूण भी एक जीवन है और उसकी मृत्यु को अलग नुकसान मानकर मुआवजा दिया जाना चाहिए.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रेलवे को 8 लाख अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेशZoom

इलाहाबाद हाई कोर्ट. (फाइल फोटो)

लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने ट्रेन में चढ़ते समय महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. इस मामले में कोर्ट ने रेलवे को 8 लाख का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं. यह मुआवजा उस भू्रण की मौत के लिए दिया जाएगा, जो साल 2018 में एक हादसे के दौरान अपनी मां के साथ ही खत्म हो गया था. जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने स्पष्ट कहा कि मां के गर्भ में पांच महीने से अधिक उम्र का भ्रूण एक जीवित बच्चे के समान माना जाएगा और उसकी मृत्यु को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अदालत ने यह भी कहा कि यदि हादसा नहीं होता तो वह बच्चा जन्म लेकर जीवन जीता. ऐसे में भू्रण की मौत को भी एक स्वतंत्र क्षति मानते हुए अलग से मुआवजा देना न्यायसंगत है.

ट्रिब्यूनल के फैसले में संशोधन
इससे पहले रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने केवल गर्भवती महिला की मौत पर 8 लाख रुपये मुआवजा दिया था, लेकिन भ्रूण की मौत को इसमें शामिल नहीं किया गया था. हाईकोर्ट ने इस फैसले में संशोधन करते हुए भ्रूण को भी अलग पीड़ित मानते हुए अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया.

2018 का है मामला
यह घटना 2 सितंबर 2018 की है, जब भानमती नाम की महिला मरुधर एक्सप्रेस में बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर चढ़ते समय गिर गई थीं. गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी अस्पताल में मौत हो गई. उस समय वह आठ-नौ महीने के गर्भ से थीं और गर्भस्थ शिशु भी नहीं बच सका.

कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि गर्भस्थ शिशु भी एक जीवन है और कानून उसके अधिकारों की रक्षा करता है. उसकी मृत्यु को एक स्वतंत्र नुकसान माना जाएगा, जिसके लिए मुआवजा दिया जाना जरूरी है.

अतिरिक्त मुआवजे का आदेश
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि भ्रूण की मौत के लिए 8 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए. साथ ही यह राशि उसी ब्याज दर के साथ दी जाएगी, जो मां के मुआवजे पर लागू की गई थी.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

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