नवरात्रि का दूसरा दिन आज: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से चमकेगा भाग्य, पंडित जी से जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती

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Brahmacharini Puja Vidhi: चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन जैसे ही 20 मार्च 2026 को उदित होता है, कई घरों में सुबह की शुरुआत सिर्फ पूजा से नहीं, बल्कि उम्मीद से होती है. कोई करियर में स्थिरता चाहता है, तो कोई मन की शांति और यहीं से शुरू होती है मां ब्रह्मचारिणी की साधना. ज्योतिष के अनुसार, यह दिन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने का भी खास अवसर माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन सही विधि से पूजा करने पर कुंडली के कमजोर ग्रह भी सकारात्मक असर दिखाने लगते हैं. ऐसे में अगर आप भी सोच रहे हैं कि पूजा कैसे करें, क्या चढ़ाएं और किस मंत्र का जाप करें, तो आइए इसे विस्तार से समझते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

मां ब्रह्मचारिणी और ज्योतिष का गहरा संबंध
नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है, जिन्हें तप और संयम की देवी कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में इनका संबंध मुख्य रूप से चंद्र और मंगल ग्रह से जोड़ा जाता है. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र कमजोर हो या मानसिक अशांति बनी रहती हो, तो इस दिन की पूजा बेहद लाभकारी मानी जाती है.

मन और ग्रहों का संतुलन
अक्सर देखा जाता है कि लोग बिना वजह तनाव में रहते हैं या निर्णय लेने में असमर्थ होते हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह चंद्र दोष का संकेत हो सकता है. मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से मन स्थिर होता है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है. यही कारण है कि विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग इस दिन विशेष पूजा करते हैं.

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मां ब्रह्मचारिणी का दिव्य स्वरूप
मां ब्रह्मचारिणी का रूप सादगी और तपस्या का प्रतीक है. सफेद वस्त्रों में सजी मां के एक हाथ में जप माला और दूसरे में कमंडल होता है. यह संयम और साधना की शक्ति को दर्शाता है. ज्योतिष में सफेद रंग को चंद्र का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.

क्या कहता है ज्योतिष?
ज्योतिष मान्यता है कि इस दिन पीले या सफेद रंग का अधिक प्रयोग करने से गुरु और चंद्र ग्रह मजबूत होते हैं. इससे व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, शांति और स्थिरता आती है.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में इस्तेमाल होने वाली पूजा सामग्री
सफेद फूल, घी का दीपक, चंदन, रोली, अक्षत, चंदन, धूप-दीप और पान-सुपारी

पूजा विधि
-सुबह जल्दी उठकर स्नान करके पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें
-इसके बाद सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध करें.
-मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीपक जलाएं.
-इसके बाद फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें.
-पूजा के दौरान मन का शांत और एकाग्र होना बेहद जरूरी है.
-कई लोग जल्दी-जल्दी पूजा करते हैं, लेकिन ज्योतिष के अनुसार, भाव और ध्यान सबसे महत्वपूर्ण होते हैं.

मंत्र
-“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः”
-दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि इस मंत्र का 108 बार जाप करने से चंद्र और मंगल दोनों संतुलित होते हैं, जिससे जीवन में स्थिरता आती है.

भोग और फूल: किससे होंगी मां प्रसन्न
मां ब्रह्मचारिणी को फल विशेष प्रिय हैं. खासकर सेब, नाशपाती और पीले फल चढ़ाना शुभ माना जाता है. वहीं सफेद और पीले फूल चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता.
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता.
ब्रह्मा जी के मन भाती हो.
ज्ञान सभी को सिखलाती हो.
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा.
जिसको जपे सकल संसारा.
जय गायत्री वेद की माता.
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता.
कमी कोई रहने न पाए.
कोई भी दुख सहने न पाए.
उसकी विरति रहे ठिकाने.
जो तेरी महिमा को जाने.
रुद्राक्ष की माला ले कर.
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर.
आलस छोड़ करे गुणगाना.
मां तुम उसको सुख पहुंचाना.
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम.
पूर्ण करो सब मेरे काम.
भक्त तेरे चरणों का पुजारी.
रखना लाज मेरी महतारी.

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