Who is Reem Al Hashimy: ईरान युद्ध के बीच जयशंकर से ‘अर्जेंट’ मिलने आईं यह खातून कौन हैं? हाथ मिलाते ही चेहरे पर छाई मुस्कान

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ईरान युद्ध के बीच जयशंकर से ‘अर्जेंट’ मिलने आईं खातून कौन हैं?

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पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजराइल युद्ध के बीच यूएई की मंत्री रीम अल हाशमी दिल्‍ली पहुंची और उन्‍होंने विदेश मंत्री जयशंकर से अर्जेंट मुलाकात की. यह मीटिंग रणनीतिक रूप से बेहद अहम है. इसमें स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित जहाजों की आवाजही और भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर चर्चा हुई. हार्वर्ड शिक्षित हाशमी यूएई की कूटनीतिक धुरंधर हैं. इस बैठक ने स्पष्ट किया कि संकट की घड़ी में भारत और यूएई क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए मजबूती से एक साथ खड़े हैं.

रणनीतिक समय और अर्जेंट मुलाकात: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच यूएई की मंत्री रीम अल हाशमी का नई दिल्ली दौरा बेहद महत्वपूर्ण है. 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में जो अस्थिरता पैदा हुई है उस संदर्भ में भारत और यूएई का एक साथ बैठना वैश्विक कूटनीति के लिए बड़ा संकेत है. यह मुलाकात युद्ध को रोकने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीति का हिस्सा है.

रीम अल हाशमी- यूएई की कूटनीतिक धुरंधर: रीम अल हाशमी केवल एक मंत्री नहीं बल्कि यूएई की विदेश नीति का सबसे आधुनिक चेहरा हैं. अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने दुबई एक्सपो 2020 का सफल नेतृत्व किया. वह हार्वर्ड से शिक्षित हैं और यूएई के शासक परिवार की करीबी रणनीतिकार मानी जाती हैं. उनकी मुस्कान के पीछे एक सख्त और प्रभावशाली राजनयिक छिपा है जो जटिल वैश्विक मुद्दों को सुलझाने में माहिर है.

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज और वैश्विक व्यापार: प्रधानमंत्री मोदी और यूएई राष्ट्रपति के बीच हुई बातचीत के बाद, जयशंकर और हाशमी की बैठक में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के माध्यम से सुरक्षित जाहजों की आवाजाी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया. वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है. युद्ध के कारण इस समुद्री रास्ते का बंद होना भारत और यूएई दोनों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

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ईरान संकट पर साझा दृष्टिकोण: ईरान द्वारा अमेरिका और इजराइली ठिकानों पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है. भारत और यूएई दोनों ही पक्ष तनाव कम करने के पक्षधर हैं. हाशमी की यह यात्रा दर्शाती है कि यूएई इस संकट में भारत को एक महत्वपूर्ण शांति दूत और विश्वसनीय सहयोगी के रूप में देखता है.

मोदी-शेख मोहम्मद बिन जायद की केमिस्ट्री: पीएम मोदी द्वारा यूएई राष्ट्रपति को भाई कहना और हाल ही में हुई दो बार की टेलीफोनिक बातचीत यह साबित करती है कि भारत-यूएई संबंध अब औपचारिक कूटनीति से ऊपर उठकर व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित हैं. नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा करके भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद और अस्थिरता के खिलाफ यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है.

कूटनीतिक संतुलन का खेल: भारत इस समय एक कठिन संतुलन बना रहा है. एक तरफ उसके इजराइल के साथ गहरे संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ यूएई जैसे अरब मित्र और ईरान के साथ भी रणनीतिक हित जुड़े हैं. रीम अल हाशमी के साथ जयशंकर की यह बैठक इसी संतुलन को साधने की कोशिश है ताकि ऊर्जा सुरक्षा और शांति बनी रहे.

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