Chaitra Navratri 2026 today Special Story about Shri Devarahi Mandir sixteen armed maa durga | 700 साल पुराने मंदिर में 16भुजी मां देती हैं दर्शन, ब्र

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16भुजी मां पूरी करती है भक्तों की मुराद, पुजारी नहीं इनको पूजा का पहला अधिकार

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Chaitra Navratri 2026: आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और घर में माता रानी की पूजा अर्चना की जा रही है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां माता 16 भुजाओं के साथ विराजमान हैं और भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करती है. यहां ब्राह्मण को नहीं बल्कि इस खास समुदाय को पूजा का पहला अधिकार मिलता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में…

16भुजी मां पूरी करती है भक्तों की मुराद, पुजारी नहीं इनको पूजा का पहला अधिकारZoom

Chaitra Navratri 2026: 9 मार्च यानी आज से से देशभर में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है. चैत्र नवरात्रि, जिसे वसंत नवरात्रि भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है. चैत्र नवरात्रि के दौरान, भक्तगण नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की व्रत, पूजा-अर्चना करते हैं. चैत्र नवरात्रि का महत्व इस बात में भी है कि यह नए साल की शुरुआत का प्रतीक है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास से नया साल शुरू होता है. हमारे पुराणों में 51 शक्तिपीठ मंदिरों का जिक्र किया गया है जबकि लाखों की संख्या में सिद्धपीठ मंदिर स्थापित हैं. एक ऐसा ही मंदिर झारखंड की धरती पर स्थापित है, जहां नवरात्रि के नौवें दिन बलि की विशेष प्रथा आज भी कायम है. हम बात कर रहे हैं देवरी मंदिर (देउड़ी मंदिर) की. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…

यहां मां 16 भुजा और अस्त-शस्त्र के साथ हैं विराजमान
झारखंड की राजधानी रांची से दक्षिण-पश्चिम दिशा में एनएच-33 पर 60 किलोमीटर दूर तामार में मां जगदम्बा का देवरी मंदिर मौजूद है. यहां विराजित मां की प्रतिमा बाकी सिद्धपीठ मंदिरों से काफी अलग है. देवरी मंदिर में मां की सोलहभुजी प्रतिमा स्थापित है. सामान्य मां दुर्गा के आठ हाथ होते हैं लेकिन यहां मां 16 भुजाओं में अस्त्र और शस्त्र के साथ भक्तों की मनोकामना की पूर्ति करती हैं. यह मंदिर बहुत पुराना है और अब इसका जीर्णोद्धार चल रहा है. माना जाता है कि दो एकड़ में फैला यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव की प्रतिमा पर स्थापित है.

700 साल पुराना मंदिर
मंदिर का निर्माण बड़े-बड़े पत्थरों से किया गया है और खास बात यह है कि मंदिर के निर्माण में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है. मंदिर की भव्य वास्तुकला दर्शकों के लिए एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती है क्योंकि इसकी बलुआ पत्थर की दीवारें विभिन्न देवी-देवताओं की जटिल नक्काशी से सुशोभित हैं. माना जाता है कि मंदिर 700 से भी अधिक साल पुराना है. स्थानीय मान्यता के मुताबिक, जिसने भी मंदिर की संरचना में बदलाव करने की कोशिश की है, उसे देवताओं के प्रकोप का सामना करना पड़ा है और इसके परिणाम भुगतने पड़े हैं. यही कारण है कि मंदिर की संरचना झारखंड की समृद्ध विरासत को दिखाती है.

आदिवासी समुदाय को विशेष पूजा का अधिकार
मंदिर की एक खास बात और है जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती है. शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों में मुख्यत: पुजारी को पूजा का अधिकार होता है लेकिन देवरी मंदिर ऐसा मंदिर है, जहां पुजारी को सप्ताह में एक दिन पूजा का अधिकार मिला है और बाकी के छह दिन आदिवासी समुदाय के लोग मंदिर में मां की विशेष आराधना करते हैं.

धूमधाम से मनाया जाता है चैत्र नवरात्रि का पर्व
मार्च का महीना मंदिर और भक्तों के लिए खास होता है क्योंकि इस पवित्र मास में चैत्र नवरात्रि का पर्व मंदिर में धूमधाम से मनाया जाता है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर लाखों की संख्या में भक्त मां के अलग-अलग रूपों के दर्शन के लिए आते हैं. खुद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी मंदिर में कई बार दर्शन कर चुके हैं. उनके लगातार आगमन ने मंदिर की लोकप्रियता में बड़ा उछाल आया है.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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