फाइटर जेट्स का ‘डेथ बटन’: क्या सच में होता है ‘किल स्विच’? भारत के लिए स्वदेशी तकनीक क्यों है संजीवनी बूटी

Share to your loved once


होमफोटोदेश

क्या फाइटर जेट में होता है ‘किल स्विच’? स्वदेशी तकनीक क्यों है संजीवनी बूटी!

Agency:एजेंसियां

Last Updated:

Fighter Jet Kill Swich: क्या विदेशी फाइटर जेट्स भरोसेमंद हैं? फाइटर जेट्स की दुनिया में तकनीकी श्रेष्ठता ही सब कुछ है. जब एक देश दूसरे देश को F-35 या सुखोई जैसे आधुनिक विमान बेचता है, तो खरीदार देश के मन में हमेशा एक डर रहता है. क्या बेचने वाला देश युद्ध के समय इन विमानों को ‘जाम’ या ‘खराब’ कर सकता है? पिछले कुछ सालों में F-35 जैसे विमानों को लेकर ‘किल स्विच’ (Kill Switch) की खबरें सुर्खियों में रही हैं. यह एक ऐसी तकनीक है जो किसी भी देश की संप्रभुता और उसकी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकती है. मॉडर्न एयरक्राफ्ट सिर्फ मशीन नहीं, बल्कि उड़ने वाले कंप्यूटर हैं. इनमें लाखों लाइन्स के कोड होते हैं, जो इन्हें रिमोटली कंट्रोल करने की संभावना को जन्म देते हैं. (Photos : Reuters)

किल स्विच एक ऐसा डिजिटल मैकेनिज्म है, जिससे विमान बनाने वाली कंपनी या देश दूर बैठे ही जेट के सॉफ्टवेयर को ठप कर सकता है. F-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट्स ‘ALIS’ (Autonomic Logistics Information System) या इसके नए वर्जन ‘ODIN’ पर काम करते हैं. यह एक क्लाउड-बेस्ड सिस्टम है जो दुनिया भर के F-35 विमानों के डेटा को अमेरिका में मौजूद सर्वर से कनेक्ट करता है. जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका चाहे, तो वह किसी विशेष देश के लिए इस एक्सेस को बंद कर सकता है. इसके बिना विमान का डायग्नोस्टिक्स, मेंटेनेंस और मिशन प्लानिंग डेटा काम करना बंद कर देगा, जिससे जेट जमीन पर ही खड़े रह जाएंगे.

आधुनिक फाइटर जेट्स पूरी तरह से सॉफ्टवेयर पर निर्भर हैं. इसमें ‘एंड-यूजर मॉनिटरिंग’ के जरिए यह ट्रैक किया जाता है कि विमान का इस्तेमाल कहां और कैसे हो रहा है. अगर बेचने वाले देश को लगता है कि विमान का इस्तेमाल उसके हितों के खिलाफ हो रहा है, तो वह ‘सॉफ्टवेयर अपडेट’ या ‘बग’ के जरिए रडार, हथियार प्रणाली या नेविगेशन को डिसेबल कर सकता है.

उदाहरण के तौर पर, यदि जेट का रडार लॉक नहीं होगा या मिसाइल फायर करने का कोड काम नहीं करेगा, तो वह जेट महज एक लोहे का डिब्बा बनकर रह जाएगा. इसे ‘सॉफ्ट कत्ल’ कहा जा सकता है, जहां विमान उड़ तो सकता है लेकिन लड़ नहीं सकता.

Add News18 as
Preferred Source on Google

सिर्फ सॉफ्टवेयर ही नहीं, बल्कि जेट के हार्डवेयर यानी चिप्स में भी ‘बैकडोर’ (Backdoor) होने की आशंका रहती है. फाइटर जेट्स के एवियोनिक्स में हजारों माइक्रोचिप्स लगी होती हैं. अगर इन चिप्स की मैन्युफैक्चरिंग के दौरान ही उनमें कोई ऐसा गुप्त कोड डाल दिया जाए जो किसी खास फ्रीक्वेंसी या सिग्नल पर एक्टिवेट हो जाए, तो इसे पकड़ना नामुमकिन है. युद्ध के मैदान में एक छोटा सा सिग्नल इन चिप्स को शॉर्ट-सर्किट कर सकता है या पूरे सिस्टम को रीबूट मोड पर डाल सकता है. यह तकनीक जासूसी और डिफेंस के क्षेत्र में सबसे बड़ा ‘सीक्रेट वेपन’ मानी जाती है.

इतिहास गवाह है कि युद्ध के समय सप्लाई चेन को रोककर विमानों को बेकार किया गया है. 1982 के फॉकलैंड युद्ध के दौरान, फ्रांस ने अर्जेंटीना को दी गई एक्सोसेट (Exocet) मिसाइलों के सीक्रेट कोड्स ब्रिटेन के साथ साझा किए थे, जिससे अर्जेंटीना की मारक क्षमता कम हो गई थी. इसी तरह, जब अमेरिका किसी देश पर प्रतिबंध लगाता है, तो स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई और सॉफ्टवेयर पैच रोक दिए जाते हैं. ईरान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसके पास मौजूद अमेरिकी F-14 टॉमकेट जेट्स पुर्जों की कमी के कारण कबाड़ में तब्दील हो गए.

कोई भी देश जो दूसरे से हथियार खरीदता है, वह हमेशा ‘ब्लैकमेल’ के जोखिम में रहता है. यही कारण है कि भारत जैसे देश ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अपने खुद के फाइटर जेट्स (जैसे तेजस और AMCA) विकसित कर रहे हैं. जब आप खुद का सॉफ्टवेयर और कोड लिखते हैं, तो ‘किल स्विच’ का खतरा खत्म हो जाता है.

स्वदेशी तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि युद्ध के नाजुक समय में आपके विमान का रिमोट कंट्रोल किसी विदेशी ताकत के हाथ में न हो. सुरक्षा की गारंटी तभी संभव है जब चिप से लेकर कोड तक सब कुछ अपने देश का हो.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP