Why Saudi Arabia’s Moon Sighting for Eid ul Fitr matters Worldwide । सउदी अरब का चांद ही दुनिया में ईद मनाने के लिए क्यों है जरूरी

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Saudi Arabia Moon Sighting Eid: ईद उल फितर का त्योहार पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए बेहद खास होता है. एक महीने के रोजों के बाद जब चांद दिखाई देता है, तब ईद मनाई जाती है. लेकिन अक्सर आपने देखा होगा कि लोग सऊदी अरब में चांद दिखने का इंतजार करते हैं और उसी के आधार पर कई देशों में ईद की तारीख तय होती है. यही वजह है कि हर साल यह सवाल उठता है कि आखिर सऊदी अरब का चांद इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है. क्या हर देश अपने हिसाब से चांद देखकर ईद नहीं मना सकता? या फिर इसके पीछे कोई धार्मिक और ऐतिहासिक कारण छिपा है.

दरअसल, ईद की तारीख चंद्र कैलेंडर यानी इस्लामिक कैलेंडर पर आधारित होती है, जो पूरी तरह चांद के दिखने पर निर्भर करता है. इस प्रक्रिया को मून साइटिंग कहा जाता है. अलग अलग देशों में चांद अलग समय पर दिखाई देता है, लेकिन सऊदी अरब को इस मामले में खास महत्व दिया जाता है. इसका कारण सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भी है. अगर आप भी जानना चाहते हैं कि सऊदी अरब का चांद दुनिया भर के मुसलमानों के लिए क्यों मायने रखता है और कैसे तय होती है ईद की सही तारीख, तो इस लेख में आपको हर जरूरी जानकारी सरल भाषा में मिलेगी.

सऊदी अरब में चांद देखने की प्रक्रिया क्या है
सऊदी अरब में चांद देखने की प्रक्रिया काफी व्यवस्थित और आधिकारिक होती है. यहां की सरकार और धार्मिक संस्थाएं मिलकर चांद देखने की घोषणा करती हैं. खास तौर पर वहां की सुप्रीम कोर्ट लोगों से अपील करती है कि अगर किसी को चांद दिखाई दे तो इसकी जानकारी दी जाए. इसके बाद गवाहों की बात को जांचा जाता है और फिर आधिकारिक घोषणा की जाती है कि चांद दिखाई दिया है या नहीं.

यह प्रक्रिया इसलिए भी खास है क्योंकि सऊदी अरब में मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थल हैं, जहां से इस्लाम की शुरुआत हुई. इसलिए वहां की घोषणा को कई लोग ज्यादा विश्वसनीय मानते हैं. हालांकि आज के समय में खगोल विज्ञान और टेक्नोलॉजी की मदद भी ली जाती है, लेकिन अंतिम फैसला चांद के दिखने पर ही आधारित होता है.

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इसका दुनिया भर के मुसलमानों पर क्या असर पड़ता है
दुनिया के कई देश, खासकर जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, सऊदी अरब के चांद देखने के फैसले को फॉलो करते हैं. इसका कारण यह है कि सऊदी अरब इस्लाम का केंद्र माना जाता है और वहां से आने वाली जानकारी को एक तरह से मानक समझा जाता है. हालांकि, हर देश का अपना लोकल मून साइटिंग सिस्टम भी होता है. जैसे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में अलग से चांद देखा जाता है और उसी के आधार पर ईद मनाई जाती है. इसलिए कई बार ऐसा होता है कि सऊदी अरब में एक दिन पहले ईद होती है और भारत में एक दिन बाद.

यह फर्क इसलिए आता है क्योंकि चांद हर जगह एक ही समय पर दिखाई नहीं देता. पृथ्वी के अलग अलग हिस्सों में समय और मौसम के कारण चांद दिखने में अंतर होता है. इसलिए कुछ देश सऊदी अरब को फॉलो करते हैं, तो कुछ अपने स्थानीय चांद देखने के नियमों को मानते हैं.

क्यों जरूरी है चांद दिखना
इस्लामिक मान्यता के अनुसार, किसी भी नए महीने की शुरुआत चांद दिखने से ही होती है. रमजान का महीना भी चांद से शुरू होता है और ईद भी चांद दिखने के बाद ही मनाई जाती है. यही कारण है कि चांद देखना सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि धार्मिक नियम का हिस्सा है. अगर चांद नहीं दिखाई देता, तो महीने के 30 दिन पूरे माने जाते हैं और उसके अगले दिन ईद मनाई जाती है. यह नियम पूरी दुनिया में एक जैसा ही है.

विज्ञान और परंपरा का मेल
आज के समय में खगोल विज्ञान के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि चांद कब और कहां दिखाई देगा. लेकिन इसके बावजूद इस्लाम में आंखों से चांद देखने की परंपरा को ही ज्यादा महत्व दिया जाता है. कई देश अब दोनों तरीकों का इस्तेमाल करते हैं यानी वैज्ञानिक गणना और असल में चांद देखने की प्रक्रिया. इससे तारीख तय करने में ज्यादा स्पष्टता मिलती है.

क्या सभी देशों को सऊदी अरब को फॉलो करना जरूरी है
यह जरूरी नहीं है कि हर देश सऊदी अरब के अनुसार ही ईद मनाए. इस्लाम में यह मान्यता है कि हर जगह के लोग अपने इलाके में चांद देखकर भी फैसला ले सकते हैं. इसलिए दुनिया भर में ईद की तारीख में थोड़ा फर्क होना सामान्य बात है और इसे लेकर कोई विवाद नहीं माना जाता.

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