sugarcane red rot disease control | sugarcane farming tips | गन्ना में लाल सड़न रोग से बचाव | गन्ना किसानों के लिए सलाह |

Share to your loved once


होमताजा खबरकृषि

किसान भाई! लाल सड़न रोग से बचाव के लिए बुवाई के समय करें ये जरूरी काम

Last Updated:

Ganne Ki Kheti Tips: गन्ने की फसल को ‘कैंसर’ यानी लाल सड़न रोग से बचाना अब मुमकिन है, बस बुवाई के समय एक छोटी सी सावधानी की जरूरत है. गन्ना एक्सपर्ट डॉ. संजीव कुमार पाठक के अनुसार, कोशा 13235 जैसी रोग-रोधी किस्मों का चयन और ट्राइकोडर्मा से मिट्टी का उपचार इस बीमारी का काल है. अगर आपके खेत में भी पहले यह रोग रहा है, तो दोबारा गन्ना बोने की गलती न करें. जानिए बीज शोधन का वो सटीक फार्मूला जो आपकी मेहनत को बर्बाद होने से बचाएगा और पैदावार में बंपर बढ़ोतरी भी करेगा.

शाहजहांपुर: गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए ‘लाल सड़न रोग’ एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, जिसे गन्ने का ‘कैंसर’ भी कहा जाता है. उत्तर प्रदेश के गन्ना बाहुल्य क्षेत्रों में इस बीमारी के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस समस्या के समाधान और बचाव के लिए गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक ने महत्वपूर्ण सलाह साझा की है. उन्होंने किसानों को बुवाई के समय ही विशेष सावधानी बरतने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर जोर दिया है, ताकि फसल को शुरुआत से ही सुरक्षित रखा जा सके और पैदावार में सुधार हो.

गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक ने बताया कि गन्ने को लाल सड़न रोग से बचाने का सबसे सही समय बुवाई ही है. उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि वे केवल रोग-रोधी किस्मों जैसे कोशा 13235, कोशा 18231, और कोशा 19231 का ही चयन करें. बुवाई से पूर्व बीज और मिट्टी का उपचार जरूरी है. बीज उपचार के लिए थायोफिनेट मिथाइल या कार्बेंडाजिम 0.1% का घोल और मिट्टी उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर का उपयोग गोबर की खाद के साथ मिलाकर करना चाहिए. इन उपायों से मृदा जनित संक्रमण को 100% तक नियंत्रित किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें: 22-23 मार्च को बारिश और आंधी का अलर्ट! गेहूं किसान इन बातों का रखें ख्याल, वरना खड़ी फसल हो जाएगी बर्बाद

गन्ने की रोग-रोधी किस्मों का चयन और बीज उपचार
गन्ने की खेती में बीज का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण कदम है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे केवल उन्हीं किस्मों की बुवाई करें जो लाल सड़न रोग के प्रति प्रतिरोधी हैं. बीज को रोगमुक्त करने के लिए 1 लीटर पानी में 1 ग्राम बाविस्टीन या थायोफिनेट मिथाइल का घोल बनाकर उपचारित करना चाहिए. यह प्रक्रिया गन्ने के भीतर छिपे फंगस को समाप्त करने में कारगर साबित होती है और फसल की शुरुआती बढ़त को स्वस्थ बनाती है.

मृदा उपचार और ट्राइकोडर्मा का महत्व
सिर्फ बीज ही नहीं, बल्कि मिट्टी का स्वस्थ होना भी जरूरी है. उसके लिए 2-3 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद में 10 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा मिलाकर खेत की तैयारी के समय ही डाल देना चाहिए. ट्राइकोडर्मा एक मित्र फफूंद है जो मिट्टी में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देती है. यह मृदा संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी और जैविक तरीका है, जिससे फसल को लंबे समय तक सुरक्षा मिलती है.

गन्ने की बुवाई के दौरान सावधानी
अगर किसी खेत में पहले से लाल सड़न रोग का प्रकोप रहा है, तो वहां दोबारा गन्ने की बुवाई तुरंत नहीं करनी चाहिए. इस रोग का फंगस फसल कटने के बाद भी लगभग 6 महीने तक मिट्टी में सक्रिय रहता है. किसानों को ऐसे खेतों में फसल चक्र अपनाना चाहिए और गन्ने के स्थान पर अन्य फसलें लगानी चाहिए. यह अनुशासन न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, बल्कि भविष्य में लाल सड़न रोग को दोबारा आने से भी रोकता है.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP