ये है मटर का छोटा भाई, इस सीजन की खास सब्जी, दाल-चावल, पापड़ के साथ मिले तो बिना मटन-चिकन हो जाए पार्टी!
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Godla Sabji Recipe: आजकल मिथिला की देसी सब्जी गोदला का सीजन चल रहा है. गोदला को मटर का छोटा भाई कहा जाता है. इसे आलू और मसालों के साथ पकाया जाता है. दाल-चावल और पापड़ के साथ खाने पर इसका टेस्ट इतना अच्छा आता है कि लगता है बिना मटन-चिकन के ही पार्टी हो गई.
मधुबनी. आपने बहुत सारी चीजों की सब्जी खाई होगी आज आपको मटर नहीं बल्कि उसका छोटा भाई गोदला की कैसे सब्जी बनती है वो रेसिपी बता रहे हैं. यह सब्जी बेहद स्वादिष्ट और इस मौसम की जान होती है. मिथिला में इस समय घर-घर लोग पकाकर खाते हैं. इसका टेस्ट बहुत ही निराला होता है और इसे बनाना भी आसान है. बस थोड़ी सी तैयारी पहले से कर लें और फिर देखें कि कैसे मजेदार सब्जी बनती है, जिसे सब खाते रह जाएंगे.
गोदला की स्वादिष्ट सब्जी
आपने हरी मटर की सब्जी भिन्न-भिन्न प्रकार से बनाकर खाई होगी, स्वादिष्ट और हर देसी अंदाज में. लेकिन आज हम आपको मिथिला के देसी अंदाज में गोदला यानी की मटर का छोटा भाई भी मान सकते हैं जिससे खेसारी दाल बनती है, उसकी सब्जी कैसे बनाते हैं वह हम आपको पूरी रेसिपी बताते हैं. मिथिलांचल में लोग इसे गोदला कहते हैं, जिसे बनाने के लिए आपको पट्टे में से एक-एक करके छोटा-छोटा मटर छुड़ाना है.
फिर इसे आलू के साथ पहले उबालते हैं, उबालने के बाद और इसकी स्वादिष्ट सब्जी बनाते हैं. जिसमें प्याज, लहसुन, गरम मसाला सभी किचन मसाला डालते हैं और साथ में गोदला को भी पीसते हैं और फिर आलू के साथ स्वादिष्ट सब्जी बनाते हैं, जो खाने में बहुत ही अच्छा लगती है.
देसी सब्जी का लें आनंद
यह मिथिलांचल की देसी और सीजनल सब्जी है जो आमतौर पर इस समय ही मिलती है. अभी लोग खेतों से जड़ से खेसारी को उखाड़ कर लाते हैं और उसी में से जो भाग हरा होता है उसे एक-एक करके निकालकर और फिर उसकी सब्जी बनाकर खाते हैं. हालांकि निकालने में काफी समय लगता है क्योंकि दाना काफी छोटा होता है और एक-एक करके निकाल कर इसे बनाना पड़ता है.
हां इसमें समय लगता पर स्वाद इतना बढ़िया आता है कि लोग इतनी मेहनत करने से पीछे नहीं हटते. मिथिलांचल के लोग साल में दो-चार बार इसे खाते हैं, क्योंकि एक तो अलग टेस्ट मिलता और फिर एक नयी देसी सब्जी का अनुभव भी हो जाता है.
सीजन चल रहा है
इस समय इस सब्जी का सीजन चल रहा है जब आप इसका आनंद ले सकते हैं. हालांकि इसे निकालने में समय लगता है पर जब यह बनकर तैयार होता है तो जैसे पूरी मेहनत सफल हो जाती है. इसे जब दाल-चावल के साथ बनाकर खाया जाता है और साथ में पापड़ होता है तो ऐसा लगता है घर ही में पार्टी हो गई. यानी सिंपल खाने से पार्टी वो भी बिना मटन-चिकन के.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें