बलिया में मक्का की खेती: हाईब्रिड फसल से 70-75 दिनों में ज्यादा मुनाफा
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बलिया के किसान अब मक्का की बुवाई से फायदा कमा सकते हैं. हाईब्रिड किस्में 70–75 दिनों में तैयार होकर अच्छा उत्पादन और अधिक मुनाफा देती हैं. सही मिट्टी, संतुलित उर्वरक और समय पर सिंचाई से हर बीघा से लाखों की आमदनी संभव है.
बलिया. किसानों के लिए यह महीना बेहद खास होता हैं, जहां एक तरफ किसान खेत में लगी फसल की कटाई का व्यवस्था बना रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ इसके बाद की खेती के बारे में चिंतन भी कर रहे हैं कि, आखिर कौन सी फसल से ज्यादा मुनाफा हो सके. हालांकि, अब समय मक्के की खेती का आ चुका है, जो किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता हैं. मक्का की खेती भुट्टे के उद्देश्य करने का बेहतरीन समय मार्च के महीनें को माना जाता है. महज 70 से 75 दिनों में तैयार होने वाली यह फसल न केवल उच्च उत्पादन देती है, बल्कि बाजार में अच्छा खासा कमाई भी कराती है. श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह के अनुसार, मक्के की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी, अच्छी जल निकासी और नियमित सिंचाई सही होता हैं. इसके साथ किसान शानदार कमाई कर सकते हैं. बात अगर उन्नत किस्मों की करें, तो पायोनियर की P1899 और P396, डेकाल्व की 90-81 व 928, और एडवांटा की PAC 751 किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. ये हाइब्रिड किस्में सही प्रबंधन के साथ 55 से 60 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन दे सकती हैं. सबसे बड़ी बात मक्का तो मक्का इसका डंठल भी पशुओं का बेहतरीन चारा के रूप में उपयोगी है.
बुवाई के कुछ दिनों के भीतर एट्राज़ीन का छिड़काव असरदार
शुरुआत में खेत की अच्छी तैयारी जरूरी होती है, मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई के बाद 2 से 3 बार कल्टीवेटर चलाकर खेत को भुरभुरा और समतल बनाना चाहिए. बुवाई के समय कतारों के बीच 60 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए. प्रति एकड़ 7 से 8 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है, जबकि एक बीघा के लिए लगभग 4 से 4.5 किलोग्राम बीज बहुत है. उर्वरक प्रबंधन में गोबर की खाद के साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर का संतुलित उपयोग जरूरी है. वहीं, गर्मी के मौसम में खासकर फूल और दाना बनने के समय सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के कुछ दिनों के भीतर एट्राज़ीन का छिड़काव असरदार होता हैं. मक्के की शंकर प्रजाति में 60 से 65 दिनों में भुट्टे आना शुरू हो जाते हैं और 70 से 75 दिनों में फसल तैयार हो जाती है. संकुल प्रजाति भी किसानों को अच्छा उत्पादन दे सकती हैं. एक बीघा में लगभग 25 से 26 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं, जिनसे करीब 50 हजार भुट्टे आते हैं. यदि बाजार में एक भुट्टा 6 रुपए में भी बिके, तो किसान लगभग 3 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें