न फसल को नुकसान ना ही खेत को, मुनाफा डबल, किसानों के लिए खेती की कमाल पद्धति, किसान एक साथ उगा रहे कई फसलें
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इन दिनों किसान खेती में इंटरक्रॉपिंग यानी बहु फसली पद्धति अपना कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं. गया जिले में भी कई किसान इंटरक्रॉपिंग करते हैं. अब्दुल कादिर ने दो एकड़ में ताइवान पिंक समेत तीन से चार वैरायटी के अमरूद की बागवानी कर रखी है. वहीं बगीचे में खाली पड़ी जमीन पर चने की खेती कर रहे हैं. वह एक समय में दो फसलों का मुनाफा कमा रहे हैं.
गया. कम खेती में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए किसान अलग-अलग तरीके निकालते रहते हैं. बिहार के किसान इन दिनों खेती में इंटरक्रॉपिंग यानी बहु फसली पद्धति अपना कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं. गया जिले में भी कई किसान है जो इंटरक्रॉपिंग करते हैं उन्हीं में से एक हैं युवा और प्रगतिशील किसान अब्दुल कादिर. अब्दुल कादिर जिले के डोभी प्रखंड क्षेत्र के बहेरा गांव के रहने वाले हैं.
अब्दुल कादिर ने दो एकड़ में ताइवान पिंक समेत तीन से चार वैरायटी के अमरूद की बागवानी कर रखी है. अमरूद की बागवानी से इन्हें आमदनी हो रही है, दूसरी ओर अमरूद के बगीचे में खाली पड़ी जमीन पर चने की खेती कर रहे हैं. चने का सीजन खत्म होते ही विभिन्न तरह के सब्जियों की खेती करते हैं. इस तरह से एक ही जमीन पर इंटरक्रॉपिंग कर अब्दुल कादिर दोगुना आमदनी कर रहे हैं. बता दें कि अब्दुल कादिर पढ़े लिखे युवा किसान है जिन्होंने एमबीए की पढ़ाई करने के बाद सऊदी अरब में 3 साल तक जॉब की और जॉब छोड़कर खेती किसानी से जुड़ गए.
इस तरह से न फसल को नुकसान न ही खेत को
लोकल 18 से बातचीत में अब्दुल कादिर बताते हैं कि फिलहाल अमरूद के बगीचे में चना की खेती कर रहे हैं. अमरूद का पौधा बड़ा होगा तो खाली पड़ी जमीन पर हल्दी, अदरक और ओल की खेती की जाएगी. इन्होंने बताया बहुफसली खेती से न फसल को नुकसान होगा और न ही खेत को. इस पद्धति से खेती करने से आमदनी बढ़ जाती है. आम और अमरूद के बगीचे से वार्षिक आमदनी होती है तो इंटरक्रॉपिंग से सीजनली फायदा होता है.
एक साथ उगा रहे कई फसलें
उन्होंने बताया चने की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जो अमरूद के पौधों की वृद्धि और विकास के लिए फायदेमंद है. यह विधि खाली जमीन का सदुपयोग करने और खरपतवार को नियंत्रित करने में भी मदद करती है. इन्होंने अन्य किसानों को भी सलाह दिया है कि अगर खेत में फसल लगाने के बाद जगह बच जाती है तो उसमें अन्य फसल लगा कर किसान आमदनी बढ़ा सकते हैं. फल के बगीचे में चना के अलावे अन्य सब्जियों की खेती कर सकते हैं. अमरूद के अलावा इन्होंने आम की भी बागवानी कर रखी है और आम के बगीचे में मसूर की खेती कर रखी है.
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