PNB बैंक घोटाला: भारत के चंगुल से बचने को नीरव मोदी ने चली नई चाल, भगोड़े ने अब क्या किया?
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देश से धोखाधड़ी मामले में फरार नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए लंदन हाईकोर्ट में अपील रिओपेन की मांग की है.कोर्ट ने दो दिन की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब कोर्ट का फैसला तय करेगा कि क्या उनका केस दोबारा खुलेगा या प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है.
नई दिल्ली. देश से धोखाधड़ी मामले में फरार नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए लंदन हाईकोर्ट में अपील रिओपेन की मांग की है.कोर्ट ने दो दिन की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. नीरव मोदी के वकील एडवर्ड फिट्जगेराल्ड ने दो जजों की बेंच के सामने दलील दी कि नए तथ्यों के आधार पर मामला दोबारा देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि नीरव मोदी को मुंबई की आर्थर रोड जेल से बाहर ट्रांसफर किया जा सकता है और वहां उनसे जबरदस्ती पूछताछ हो सकती है. फिट्जगेराल्ड ने भारतीय अधिकारियों द्वारा दिए गए भरोसे पर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि ये भरोसा सिर्फ सीबीआई तक सीमित है, जबकि इनकम टैक्स, एसएफआईओ और डीआरआई जैसी अन्य एजेंसियां भी नीरव मोदी के खिलाफ केस चला रही हैं. वकील ने भारत में हिरासत में होने वाली सख्त पूछताछ को ‘आम बात’ बताया और कहा कि वहां निगरानी का कोई प्रापर सिस्टम नहीं है. जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ ने पूछा कि क्या ऐसी कोई कार्रवाई भारत द्वारा दिए गए भरोसे का उल्लंघन माना जाएगा.
भारत सरकार की तरफ से हेलन माल्कम ने कहा कि यह अपील बहुत देर से दाखिल की गई है और इसमें कोई दम नहीं है. उन्होंने दावा किया कि भारत ने भरोसा दिया है और ये पूरी तरह मानी जाएगी. माल्कम ने नीरव मोदी पर आरोप लगाया कि वह बार-बार कानूनी प्रक्रिया में खामी ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि नीरव मोदी ने सबूत नष्ट करने और गवाहों को डराने की कोशिश की है. साथ ही उन्होंने बताया कि नीरव मोदी अभी भी करीब 300 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी आए पैसे छिपाए हुए हैं.
भारतीय पक्ष ने कोर्ट को बताया कि नीरव मोदी से सीबीआई या ईडी द्वारा कोई पूछताछ नहीं होगी, क्योंकि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. साथ ही यह भी कहा गया कि जेल में वकील से मिलने, मेडिकल सुविधा और निगरानी जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध रहेंगी. नीरव मोदी 2019 से लंदन की पेंटनविल जेल में बंद हैं. उन्होंने वीडियो लिंक के जरिए सुनवाई में हिस्सा लिया. अब कोर्ट का फैसला तय करेगा कि क्या उनका केस दोबारा खुलेगा या प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें