‘होर्मुज से जहाज निकाल लाना बिग अचीवमेंट’, पूर्व डिप्टी एनएसए पंकज सरन ने समझाई इनसाइड स्टोरी
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ईरान के तनावपूर्ण हालात में भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालकर बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है. पंकज सरन ने इसे ‘बड़ा अचीवमेंट’ बताया.

पूर्व डिप्टी एनएसए ने समझाई होर्मुज से इस वक्त जहाज निकाल लाना कितनी बड़ी बात.
ईरान जंग की वजह से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से सामान निकालकर लाना बड़ा जोखिम भरा है. फिर भी इस जोखिम भरे हालात के बीच भारत ने अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालकर एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक कामयाबी हासिल की है. भारत के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन ने इस सफलता को देश के लिए एक ‘बड़ा अचीवमेंट’ करार दिया है. उन्होंने इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी समझाई है.
पूर्व डिप्टी एनएसए पंकज सरन ने होर्मुज की भौगोलिक जटिलता और उसकी रणनीतिक अहमियत को समझाते हुए इसकी तुलना भारत के ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ से की है. उन्होंने कहा, अगर आप सच्चाई से देखें, तो हम कह सकते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खाड़ी का सिलीगुड़ी कॉरिडोर है. इसका मतलब यह है कि इसकी चौड़ाई इतनी कम है कि यह हिंद महासागर क्षेत्र के सबसे प्रमुख ‘चोक पॉइंट्स’ में से एक बन जाता है. उन्होंने बताया कि समुद्री व्यापार के लिहाज से हिंद महासागर में मुख्य रूप से दो बड़े चोक पॉइंट हैं. एक तरफ होर्मुज और दूसरी तरफ मलक्का स्ट्रेट. रक्षा और समुद्री सुरक्षा से जुड़े तमाम विशेषज्ञ यह मानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे गंभीर और मुश्किल चोक पॉइंट है.
ऊर्जा सुरक्षा की लाइफलाइन
पंकज सरन ने इस जलमार्ग के महत्व के बारे में कहा, होर्मुज से जो भी जहाज या कार्गो गुजरता है, वह बेहद क्रिटिकल होता है. यह सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि दुनिया भर की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक लाइफलाइन है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारत ने जो किया है और जिस तरह से हमारे जहाज वहां से सुरक्षित लौटकर आए हैं, वह हमारे लिहाज से एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. संकट के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए सरन ने बताया कि जब इस क्षेत्र में तनाव भड़का था, तब ऐसा लग रहा था कि कोई भी जहाज इस रास्ते से सुरक्षित नहीं आ पाएगा. लेकिन, ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी अगर ‘इंडियन वेसल्स’ को वहां से आने दिया जा रहा है, तो यह भारत के लिए एक बहुत अच्छी बात और कूटनीतिक जीत है.
क्यों बड़ी मिसाइलों की जरूरत नहीं?
भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी को बड़ी कामयाबी क्यों माना जा रहा है, इसके पीछे के खतरे को समझाते हुए पंकज सरन ने बताया कि होर्मुज में किसी भी जहाज को नुकसान पहुंचाना या उस पर आक्रमण करना हमलावरों के लिए ज्यादा मुश्किल काम नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया, इसके लिए किसी बहुत बड़ी या अत्याधुनिक मिसाइल की जरूरत नहीं होती है. जिस तरह के हथियारों की आवश्यकता जहाजों को नुकसान पहुंचाने या एक बड़ा ‘इंश्योरेंस रिस्क’ (बीमा जोखिम) पैदा करने के लिए होती है, वे बहुत मामूली होते हैं. ऐसे में ईरान या इस क्षेत्र में सक्रिय कोई भी अन्य गुट आसानी से ऐसी घटनाओं को अंजाम दे सकता है.” समुद्री लुटेरों या विद्रोही गुटों द्वारा छोटे हथियारों या ड्रोन से किए गए हमले भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को ठप करने के लिए काफी होते हैं.
आगे क्या हो सकता है…
पंकज सरन ने कहा कि अभी तक इस पूरे घटनाक्रम में भारत का अचीवमेंट बहुत अच्छा-खासा रहा है. हमारी कूटनीति ने यह सुनिश्चित किया है कि हमारी आपूर्ति बाधित न हो. लेकिन भविष्य को लेकर सतर्कता बनाए रखने की जरूरत है. उन्होंने कहा, अब हमें यह देखना होगा कि इससे आगे हम किस तरह बढ़ते हैं. इस जटिल भू-राजनीतिक हालात में हम ईरान और अमेरिका दोनों के साथ कैसे बातचीत करते हैं और संतुलन बनाए रखते हैं, यह अहम होगा.” अंत में उन्होंने कहा कि अभी तक जो भी हुआ है वह भारत के पक्ष में रहा है, लेकिन भविष्य के घटनाक्रमों को लेकर ‘फिंगर्स क्रॉस्ड’की स्थिति बनी हुई है. उम्मीद है कि भारत के लिए बेहतर होगा.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें