Spiritual Festival of March: 18 से 20 मार्च तक आस्था का महासंगम: दर्श अमावस्या, चैत्र नवरात्रि और चेटीचंड का दुर्लभ संयोग
Last Updated:
Spiritual Festival of March: 18, 19 और 20 मार्च को पड़ने वाले दर्श अमावस्या, चैत्र नवरात्रि और चेटीचंड जैसे पर्व ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता को भी दर्शाते हैं. यह समय श्रद्धा, भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम लेकर आता है. आइए जानते हैं लगातार तीन दिन पड़ने वाले तीन पर्वों के बारे में…

Spiritual Festival of March: मार्च महीने में धार्मिक दृष्टि से बेहद खास संयोग बन रहा है, जब लगातार तीन दिनों तक महत्वपूर्ण पर्व मनाए जाएंगे. तीन दिन में तीन ऐसे संयोग बन रहे हैं, जो बेहद दुर्लभ होते हैं. दरअसल 18 मार्च को दर्श अमावस्या, 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत और 20 मार्च को चेटीचंड का पर्व मनाया जाएगा. यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और पूजा-अर्चना का अवसर लेकर आ रहा है. अमावस्या तिथि पर पितरों की कृपा, चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा का आशीर्वाद और चेटीचंड को भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. आइए ज्योतिष माध्यम से जानते हैं 18 से 20 मार्च के बीच बन रहा महासंयोग के बारे में…
दर्श अमावस्या का महत्व (18 मार्च)
हिंदू पंचांग के अनुसार 18 मार्च को दर्श अमावस्या पड़ रही है. हर महीने की अमावस्या को दर्श अमावस्या कहा जाता है. दर्श का अर्थ देखना या दर्शन करना होता है, जबकि अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा बिल्कुल दिखाई नहीं देता, इसलिए इसे दर्श अमावस्या कहते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितरों के तर्पण, श्राद्ध और जल अर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है. पितर प्रसन्न होकर परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं. दान-पुण्य, स्नान और विशेष पूजा से पितृ दोष दूर होता है और आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिलता है.
चैत्र नवरात्रि की शुरुआत (19 मार्च)
दर्श अमावस्या के अगले ही दिन चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होता है, जो मां दुर्गा की उपासना का प्रमुख पर्व है. हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. इस बार चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं और 27 मार्च को समापन होगा. नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं. घरों और मंदिरों में घट स्थापना (कलश स्थापना) की जाती है और श्रद्धालु व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं. चैत्र नवरात्रि को हिंदू नववर्ष की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है, खासकर उत्तर भारत में. मान्यता है कि इन नौ दिनों में सच्चे मन से की गई पूजा से मां दुर्गा विशेष कृपा प्रदान करती हैं.
चेटीचंड का पर्व (20 मार्च)
इसके बाद 20 मार्च को चेटीचंड का त्योहार मनाया जाएगा, जो सिंधी समुदाय का प्रमुख पर्व है. यह दिन भगवान झूलेलाल की जयंती के रूप में मनाया जाता है. सिंधी समाज के लोग इस दिन को अपने नववर्ष के रूप में भी मनाते हैं. चेटीचंड के अवसर पर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, भजन-कीर्तन होते हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं. यह पर्व जल और जीवन के महत्व को भी दर्शाता है, क्योंकि भगवान झूलेलाल को जल के देवता के रूप में पूजा जाता है.
About the Author
पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें