पुलिस कैसे साबित किया सुसाइड नहीं मर्डर है? पति ने चौथी बार सुपारी देकर कराई पत्नी की हत्या, ऐसे खुला राज
Mumbai Powai Murder Case: मुंबई के पवई इलाके में लगभग दो साल पहले हुई एक मर्डर मिस्ट्री अब सुलझ गई है. अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए एक पति किस हद तक गिर सकता है, यह मामला उसी की कहानी है. यह घटना हर पिता के लिए एक सबक है, जिसकी बेटी की शादी के बाद अचानक एक दिन मौत की खबर आती है. यह कहानी उस निर्दयी पति की है, जो सात जन्मों का रिश्ता निभाने की कसम खाता है, लेकिन दो बच्चों के होने के बावजूद पत्नी को ठिकाने लगाने के लिए एक बार नहीं बल्कि तीन बार प्रयास करता है. चौथी बार में वह शख्स पत्नी को सुपारी देकर हत्या करवा देता है और इसे आत्महत्या का रूप देता है. लेकिन एक पिता आखिरकार अपनी बेटी की मौत का असली कारण खोज निकालता है.
महिला के अंतिम संस्कार के बाद पिता भानराम चौधरी ने राजस्थान के पाली जिले के रानी पुलिस स्टेशन में साजिश का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करा दिया. 18 अक्टूबर 2024 को हत्या का मामला दर्ज हो जाता है. बाद में घटना साकीनाका पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में होने से मुंबई ट्रांसफर कर दिया जाता है. अदालत के आदेश के बाद 8 जनवरी को 2025 को गीता का शव कब्र से निकाला जाता है. फिर मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाता है. सर जेजे अस्पताल के डॉक्टरों की रिपोर्ट में गले पर दो अलग-अलग निशान मिलने का सबूत मिलता है, जो आत्महत्या के सामान्य मामलों में असामान्य बात है.
मुंबई पुलिस के जांच में ऐसे खुला राज.
मुंबई पुलिस ने बदली दी जांच कि दिशा
मुंबई पुलिस की जांच कि दिशा बदल जाती है. मुंबई पुलिस के अनुसार महिला के गले पर निशानों की दिशा, लंबाई और चौड़ाई अलग-अलग थी. इनके बीच त्वचा पर रस्सी फिसलने के संकेत मिले. साक्ष्यों से पता चलता है कि शव को लटकाने से पहले पीड़ित का गला घोंटा गया था. इस रिपोर्ट के आने के बाद मुंबई की साकिनारा पुलिस ने फरवरी के पहले सप्ताह में पति से पूछताछ की. पुलिस का दावा है कि पति ने हत्या की साजिश रचने और सुपारी लेकर हत्या करने की बात कबूल कर ली है. मुंबई पुलिस ने कहा कि आरोपी शख्स ने हत्या के लिए 6 लाख नकद दिए और 70 हजार गूगल पे के जरिए ट्रांसफर किए.
एक साल पहले की वो काली रात
मामला साल 2024 के मध्य का है, जब पवई स्थित एक अपार्टमेंट में गीता चौधरी का शव छत के पंखे से लटका मिला था. पति सखाराम ने पुलिस को बताया कि गीता मानसिक तनाव में थी और उसने सुसाइड किया है. घर की स्थिति और सखाराम के ‘मगरमच्छी आंसुओं’ ने पुलिस को एक बार गुमराह कर दिया. लेकिन गीता के पिता और रिश्तेदारों को शुरू से ही सखाराम पर शक था. पुलिस ने जब वैज्ञानिक साक्ष्यों और सखाराम की कॉल डिटेल्स की दोबारा जांच शुरू की तो परतें दर परत सच सामने आने लगा.
तीन बार फेल, चौथी बार मिली ‘सफलता’
पहली कोशिश (2024): उसने पहली बार साल 2024 में गीता को जहर देने की कोशिश की थी, लेकिन वह बच गई.
दूसरी व तीसरी कोशिश: इसके बाद उसने एक्सीडेंट का रूप देने और करंट लगाने की भी कोशिश की, लेकिन हर बार किस्मत ने गीता का साथ दिया.
चौथी कोशिश: तीन बार नाकाम होने के बाद सखाराम ने सुपारी किलर्स का सहारा लिया. उसने तीन सुपारी किलर्स को बड़ी रकम देकर काम पर रखा. उन लोगों ने मिलकर पहले गीता की गला दबाकर हत्या की और फिर मामले को आत्महत्या दिखाने के लिए शव को पंखे से लटका दिया.
यह घटना उन सभी पिताओं के लिए एक कड़ा सबक है जिनकी बेटियां ससुराल में प्रताड़ना सहती हैं. गीता के पिता को सखाराम की हरकतों पर पहले भी शक था, लेकिन घर टूटने के डर और लोग क्या कहेंगे की सामाजिक बेड़ियों ने उन्हें चुप रखा. ऐसे में अगर आपकी बेटी ससुराल में असुरक्षित महसूस कर रही है या दामाद के चरित्र पर संदेह है, तो उसे ‘समझौता’ करने के बजाय कानूनी सुरक्षा दें. घरेलू हिंसा की छोटी-छोटी घटनाओं को नजरअंदाज न करें, क्योंकि अक्सर यही छोटी चिंगारी भविष्य में बड़े अपराध का रूप ले लेती है. बेटियों को इतना आत्मनिर्भर बनाएं कि वे गलत साथी को छोड़ने का साहस जुटा सकें.