रोजाना 8 क्विंटल दूध….भैंस पालन से मालामाल बना रामपुर का किसान, महीने में हो रही 3 लाख की कमाई
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Success Story: डेयरी फार्मिंग से रामपुर के शन्नू ने मिसाल कायम की है. 8वीं तक पढ़े शन्नू ने कुछ भैंसों से शुरुआत कर आज 100 भैंसों का बड़ा फार्म खड़ा कर लिया. मुर्रा नस्ल की भैंसें रोज करीब 16 लीटर दूध देती हैं और कुल उत्पादन 8 क्विंटल तक पहुंचता है. 65 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेचकर वे अच्छी कमाई कर रहे हैं. दूध के साथ गोबर और बछड़ों से भी आय होती है, जिससे उनकी मासिक कमाई लाखों में पहुंच गई है.
रामपुर: रामपुर में ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी फार्मिंग धीरे-धीरे लोगों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनता जा रहा है. रामपुर के महज 8वीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले शन्नू ने अपने पुश्तैनी काम डेयरी फार्मिंग को ऐसा आगे बढ़ाया कि आज वह लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं जिस काम को लोग छोटा समझते हैं उसी को शन्नू ने अपने दम पर बड़ा कारोबार बना दिया है
शन्नू बताते हैं कि उन्होंने 8वीं तक पढ़ाई करने के बाद अपने पारंपरिक काम पर ध्यान देने का फैसला किया. शुरुआत में कुछ ही भैंसों से काम शुरू किया था और आज उनके पास करीब 100 भैंसों का बड़ा डेयरी फार्म है. इनमें हरियाणा और गुजरात की मशहूर वन्नी और मुर्रा नस्ल की भैंसें शामिल हैं, जो ज्यादा दूध देने के लिए जानी जाती हैं. उनके मुताबिक एक भैंस रोजाना करीब 16 लीटर तक दूध देती है. खास बात यह है कि मुर्रा भैंस लगभग 10 महीने तक लगातार दूध देती रहती है. पूरे डेयरी फार्म से रोज करीब 8 क्विंटल दूध निकलता है, जिसे शन्नू 65 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचते हैं. इस तरह रोजाना अच्छी खासी आमदनी हो जाती है.
शन्नू कहते हैं कि एक भैंस से उन्हें रोज लगभग 100 रुपये तक का मुनाफा मिल जाता है. इस हिसाब से एक भैंस केवल 3 हजार रुपए महीने का मुनाफा देती है. अगर पूरे फार्म की बात करें तो यह मुनाफा महीने का 3 लाख में पहुंच जाता है, लेकिन कमाई सिर्फ दूध से ही नहीं होती. डेयरी से निकलने वाला गोबर भी कमाई का जरिया है. वह बताते हैं कि एक ट्रॉली गोबर 500 से 1000 रुपये में बिक जाती है, जिसे किसान खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं.
इसके अलावा भैंसों के बछड़े भी उनकी आय का अहम हिस्सा हैं. जगह की कमी के चलते शन्नू बछड़ों को गांव के किसानों को पालने के लिए दे देते हैं. इसके बदले उन्हें एक बछड़े पर 4 से 5 हजार रुपये मिल जाते हैं. जब बछड़ा बड़ा हो जाता है, तो किसान उसे वापस कर देते हैं. इसके बाद शन्नू उस भैंस को बेचकर करीब 1 लाख 40 हजार रुपये तक कमा लेते हैं. शन्नू बताते हैं कि आज उनका पूरा घर इसी डेयरी फार्मिंग के सहारे चल रहा है परिवार के सभी लोग इस काम में हाथ बंटाते हैं उनका कहना है कि अगर सही तरीके से मेहनत की जाए तो डेयरी फार्मिंग बहुत अच्छा और स्थायी व्यवसाय है
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें