Illegal Weapon Smuggling | Panchayat Election UP | पंचायत चुनाव से पहले अवैध हथियारों की बड़ी खेप पकड़ी

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मुजफ्फरनगर: आगामी पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही जहां उत्तर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ने लगा है, वहीं अपराध की दुनिया के खिलाड़ी भी सक्रिय हो गए हैं. लेकिन मुजफ्फरनगर पुलिस ने इन ‘मौत के सौदागरों’ के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. शाहपुर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मेरठ के एक ऐसे शातिर गैंग को दबोचा है, जो मध्य प्रदेश और दिल्ली से अवैध हथियार लाकर पश्चिमी यूपी के जिलों में सप्लाई कर रहा था. पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में अवैध पिस्टल और तमंचे बरामद किए हैं, जिन्हें पंचायत चुनाव में खपाने की पूरी तैयारी थी.

नहर की पुलिया पर घेराबंदी और फिल्मी अंदाज में गिरफ्तारी
बता दें कि एसएसपी संजीव कुमार वर्मा के निर्देशन में पुलिस लगातार अपराधियों के खिलाफ अभियान चला रही है. सोमवार देर रात शाहपुर पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि एक स्विफ्ट कार (नंबर DX 9007) में कुछ संदिग्ध युवक अवैध हथियारों की बड़ी खेप लेकर पलड़ी नहर पुलिया की तरफ से गुजरने वाले हैं.

सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी. जैसे ही सफेद रंग की स्विफ्ट कार आती दिखी, पुलिस ने रुकने का इशारा किया. खुद को घिरा देख कार सवार बदमाशों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने चारों तरफ से घेरकर चार आरोपियों को दबोच लिया. पकड़े गए आरोपियों की पहचान आकिल, फरहान, मोहम्मद तालिब और शाहरुख के रूप में हुई है. ये चारों आरोपी मेरठ के रहने वाले हैं और लंबे समय से इस काले कारोबार में शामिल हैं.

हथियारों का जखीरा बरामद, पिस्टल से लेकर तमंचे तक
पुलिस ने जब बदमाशों की कार की तलाशी ली, तो अधिकारियों की आंखें फटी रह गई. गाड़ी के अंदर से 7 शानदार फिनिशिंग वाली .32 बोर की पिस्टल और 3 तमंचे (.315 बोर) बरामद हुए. इसके साथ ही भारी मात्रा में जिंदा कारतूस भी मिले हैं. एसएसपी ने बताया कि बरामद की गई पिस्टल इतनी रिफाइंड (बेहतर क्वालिटी) हैं कि पहली नजर में ये फैक्ट्री मेड लगती हैं.

MP से 40 हजार में लाते थे पिस्टल, 20-30 हजार का सीधा मुनाफा
पूछताछ के दौरान तस्करों ने जो खुलासे किए, वो चौंकाने वाले हैं. उन्होंने बताया कि वे ये हथियार मध्य प्रदेश के मुरैना और दिल्ली से सस्ते दामों पर खरीदते थे. एमपी से एक पिस्टल 40 से 50 हजार रुपये में खरीदी जाती थी, जिसे मुजफ्फरनगर, मेरठ और नोएडा जैसे शहरों में 70 से 80 हजार रुपये (यानी 20-30 हजार का सीधा मुनाफा) में बेचा जाता था. 4 से 5 हजार में मिलने वाला तमंचा चुनाव के वक्त 8 से 10 हजार रुपये में खपाया जाता था.

इन तस्करों ने कबूल किया कि पंचायत चुनाव के कारण इस समय मार्केट में हथियारों की डिमांड बहुत ज्यादा है. वे केवल उन्हीं लोगों को हथियार बेचते थे, जिनकी वे खुद ‘वेरिफाई’ कर लेते थे कि ग्राहक को वाकई जरूरत है और वह विश्वसनीय है.

मुजफ्फरनगर पुलिस का ‘क्लीन स्वीप’, पिछले 6 महीने में 775 गिरफ्तार
एसएसपी संजीव कुमार वर्मा ने इस सफलता के साथ ही पुलिस के पिछले 6 महीनों का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया. उन्होंने बताया कि जिले में अपराध के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है. पिछले 6 महीने की कार्रवाई में…

कुल गिरफ्तारियां: 775 मुजरिम
बरामद हथियार: 400 से अधिक
दर्ज मुकदमे: 475 अभियोग
पकड़ी गई गन फैक्ट्रियां: 02
बरामदगी: हजारों कारतूस और भारी मात्रा में चाकू.

एसएसपी ने साफ किया कि यह अभियान अभी थमेगा नहीं. शासन की मंशा के अनुरूप अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने का काम जारी रहेगा.फिलहाल, चारों आरोपियों पर आर्म्स एक्ट की धारा 3/5/25 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है.

वेस्ट यूपी के इन जिलों में फैला था नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि यह गैंग केवल मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं था. इनका नेटवर्क दिल्ली से लेकर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैला हुआ था. ये लोग मुख्य रूप से इन जिलों में सप्लाई देते थे:

  • मुजफ्फरनगर
  • मेरठ
  • नोएडा और गाजियाबाद
  • सहारनपुर
  • शामली

पुलिस अब इनके ‘फॉरवर्ड लिंकेज’ यानी दिल्ली और एमपी के उन ठिकानों की तलाश कर रही है, जहां से ये हथियार बनकर आ रहे थे.

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