असम चुनाव में BJP के सामने कौन-सी हैं 3 बड़ी चुनौतियां, गौरव गोगोई को CM फेस बनाकर कांग्रेस ने चला बड़ा दांव!

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गुवाहाटी. असम विधानसभा चुनाव का बिगुल रविवार को बजते ही मैदान में उतरने वाली पार्टियां अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देने के लिए कमर कसने लगी हैं. विश्लेषकों का मानना है कि सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस को जहां अपनी-अपनी ताकत पर भरोसा है, वहीं उनके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं जिनसे निपटना होगा.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)अपने शासन के रिकॉर्ड और संगठनात्मक ताकत के भरोसे उतरेगा. हालांकि, तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही भाजपा को सत्ता विरोधी लहर और स्थानीय शिकायतों जैसी सामान्य चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा विकास पहलों, कल्याणकारी योजनाओं और शांति समझौतों पर जोर देते हुए अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ा रही है. सरमा की मुखर राजनीतिक शैली और पूरे राज्य में उनकी व्यापक उपस्थिति भी इसकी ताकत में से हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लगातार दौरों से भी पार्टी को अपनी ‘डबल इंजन सरकार’ की रणनीति को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, भाजपा के समक्ष कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें सत्ता विरोधी लहर खासकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहां विकास संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं या जहां मौजूदा विधायकों के प्रति स्थानीय लोगों में असंतोष है.

सरकार के अतिक्रमण रोधी अभियानों और अवैध घुसपैठियों के बारे में बयानबाजी की विपक्ष द्वारा आलोचना किए जाने के बीच, पार्टी को अल्पसंख्यक मतदाताओं के कुछ वर्गों, विशेष रूप से बांग्ला भाषी मुसलमानों की नाराजगी का भी सामना करना पड़ सकता है.

मुख्य विपक्षी दल के लिए सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर मददगार साबित हो सकती, लेकिन रास्ते में कई बाधाएं हैं जिनसे निपटने के लिए वह असम जातीय परिषद, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (एपीएचएलसी) के साथ गठबंधन करके भाजपा का मुकाबला करने की योजना बना रही है.

कांग्रेस को अल्पसंख्यक मतदाताओं, विशेषकर बांग्ला भाषी मुसलमानों का समर्थन हासिल हो सकता है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल की ओर से इस समुदाय के खिलाफ लगातार बयान आते रहे हैं जिससे वे काफी हद तक नाराज हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई 2024 में सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा अपने उम्मीदवार के समर्थन में पूरी मशीनरी लगाए जाने के बावजूद जोरहाट लोकसभा सीट जीतने में सफल रहे और पार्टी द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में फिर से पेश करना और जोरहाट विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाना पार्टी के मनोबल को काफी बढ़ाएगा.

मुख्य विपक्षी पार्टी के लिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं. वह गत एक दशक से सत्ता से दूर है और उसे कई झटके लगे हैं. मौजूदा मुख्यमंत्री शर्मा कांग्रेस छोड़कर ही भाजपा में शामिल हुए थे. हाल में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा और तीन अन्य विधायक सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गए, जबकि दो अन्य रायजोर दल में शामिल हो गए.

विपक्षी दल की एकीकृत संगठनात्मक संरचना का अभाव, विशेष रूप से जमीनी स्तर पर, उसके विरुद्ध कार्य करेगा. राज्य विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के गठबंधन सहयोगी दलों की अहम भूमिका रहने की संभावना है. भाजपा के अलावा, राज्य में राजग के घटक दलों में असम गण परिषद (निवर्तमान विधानसभा में नौ सीट), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (सात) और बोडोलैंड पीपुल्स पार्टी (तीन) शामिल हैं.

कांग्रेस के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), असम जातीय परिषद (अजापा) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (एपीएचएलसी) ने सीटों के बंटवारे पर सहमति जताई है और आगामी चुनाव में ये दल संयुक्त रूप से प्रचार करेंगे. माकपा का निवर्तमान विधानसभा में एक सदस्य है, जबकि अजापा और एपीएचएलसी का कोई सदस्य नहीं है.

पिछले विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फंट (एआईयूडीएफ) ने 16 सीट हासिल कीं और रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने सदन में पार्टी से एकमात्र सीट जीती. हालांकि, उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था.

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