सियासत की पिच पर गांगुली का ‘योद्धा’, दादा के लिए कोच से भिड़ने वाले पेसर पर BJP ने फिर लगाया दांव
मैदान पर रफ्तार की सनसनी और सौरव गांगुली के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार रहे अशोक डिंडा एक बार फिर सियासी पिच पर अपनी रफ़्तार दिखाने को तैयार हैं. भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी महासंग्राम में एक बार फिर मयना सीट से अपने इस क्रिकेटर पर भरोसा जताया है. यह वही डिंडा हैं जिन्होंने केवल विकेट ही नहीं चटकाए बल्कि उस दौर में अपने करियर की परवाह किए बिना दादा की कप्तानी छीनने वाले विदेशी कोच से भी सीधा लोहा लिया था. डिंडा की कहानी केवल क्रिकेट के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, यह उस वफादारी और जुझारूपन की मिसाल है जिसे भाजपा ने बंगाल में अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है.
गांगुली का भरोसा और डिंडा की वफादारी
अशोक डिंडा केवल गांगुली के पसंदीदा गेंदबाज ही नहीं थे बल्कि उनके प्रति बेहद वफादार भी रहे. आईपीएल के दूसरे सीजन में जब कोच जॉन बुकानन ने सौरव गांगुली को कप्तानी से हटाया तो डिंडा वह खिलाड़ी थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से दादा का समर्थन किया था. उन्होंने बेबाकी से कहा था कि टीम गांगुली के नेतृत्व में बेहतर प्रदर्शन करती. गांगुली के प्रति यही निष्ठा और समर्पण आज उनके राजनीतिक जीवन में भी झलकता है जहां वे अपनी पार्टी और विचारधारा के प्रति पूरी तरह समर्पित नजर आते हैं.
मेहनत से तय किया गांव से विधानसभा तक का सफर
डिंडा की सफलता कोई रातों-रात मिली उपलब्धि नहीं है. जैसा कि उनके पूर्व कोच पारस म्हाम्ब्रे कहते हैं, “डिंडा की सबसे बड़ी ताकत उनका एटीट्यूड है. उन्होंने बहुत संघर्ष किया है और वे कभी मेहनत से पीछे नहीं हटते.” अपने गांव से 3 घंटे का सफर तय कर कोलकाता आने वाले डिंडा ने अपनी तेज रफ्तार और फ्लोटिंग जंप से घरेलू क्रिकेट में 420 विकेट चटकाए. यही फाइटिंग स्पिरिट उन्हें राजनीति में भी दूसरों से अलग बनाती है.
भाजपा के लिए क्यों जरूरी हैं डिंडा?
ममता बनर्जी के गढ़ में भाजपा को ऐसे चेहरों की जरूरत है जो न केवल लोकप्रिय हों बल्कि जिनमें लड़ने का जज्बा भी हो. डिंडा ने 2021 में मयना सीट से जीत दर्ज कर यह साबित किया कि वे केवल सेलिब्रिटी चेहरा नहीं हैं बल्कि जमीन से जुड़े नेता हैं. डिंडा की कहानी यह बताती है कि कैसे एक मध्यम गति का गेंदबाज अपनी मेहनत और सही मार्गदर्शन के दम पर न केवल टीम इंडिया तक पहुंचा बल्कि अब बंगाल के राजनीतिक भविष्य को तय करने वाले चेहरों में भी शामिल हो गया है.
अशोक डिंडा का क्रिकेटिंग करियर
पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अशोक डिंडा ने IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स, पुणे वॉरियर्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर जैसी कई IPL टीमों का प्रतिनिधित्व किया, जहां पुणे और बैंगलोर के लिए उनका जर्सी नंबर (Jersey Number) मुख्य रूप से 2 रहा. अपनी बॉलिंग स्पीड (Bowling Speed) के लिए मशहूर डिंडा लगातार 130-140 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करने में सक्षम थे. उनकी निजी जिंदगी की बात करें तो अशोक डिंडा की पत्नी का नाम श्रेयसी रुद्रा है, जिनसे उन्होंने 2013 में शादी की. घरेलू क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेट लेने के बाद उन्होंने 2 फरवरी 2021 को क्रिकेट के सभी प्रारूपों से रिटायरमेंट (Retirement) ले लिया. सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा में रहने वाली ‘डिंडा एकेडमी’ (Dinda Academy) असल में एक मीम (Meme) संस्कृति का हिस्सा है, हालांकि वे अब राजनीति और खेल कमेंट्री में सक्रिय हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, 2026 तक उनकी नेट वर्थ (Net Worth) लगभग 15-20 करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई है.
सवाल-जवाब
सौरव गांगुली और अशोक डिंडा के बीच क्रिकेट के मैदान पर कैसा संबंध रहा है? सौरव गांगुली ने आईपीएल के शुरुआती दौर में डिंडा की प्रतिभा को पहचाना और उन पर भरोसा जताते हुए नई गेंद सौंपी थी. डिंडा ने भी हमेशा गांगुली को अपना आदर्श माना और कप्तानी विवाद के दौरान उनका खुलकर समर्थन किया था.
अशोक डिंडा की गेंदबाजी की वह कौन सी विशेषता थी जो उन्हें अलग बनाती थी? डिंडा अपने ‘एक्जैजरेटेड लीप’ (ऊंची कूद) वाले जंप के लिए जाने जाते थे, जिससे उन्हें अतिरिक्त उछाल मिलता था. वे लगातार 130 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी करने में सक्षम थे.
राजनीति में आने के बाद डिंडा ने अपनी कौन सी खेल भावना को बरकरार रखा है? डिंडा ने राजनीति में भी अपनी ‘कभी हार न मानने वाली’ (Never Give Up) और ‘कड़ी मेहनत’ वाली खेल भावना को बरकरार रखा है, जिसका जिक्र उनके कोच पारस म्हाम्ब्रे ने भी किया था.