Arvind Kejriwal News | Delhi Liqure Scam | justice swarankanta sharma – जज साहब, 500 पन्नों का आदेश है… केजरीवाल के वकील की दलील पर भड़क गए तुषार म

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नई दिल्ली. दिल्ली शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत 23 लोगों को बरी करने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस सुनवाई के दौरान सीबीबाई के वकील तुषार मेहता और केजरीवाल के वकील एन. हरिहरन के बीच जमकर कोर्टरूम में बहस हुई. यह सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में हुई. केजरीवाल की इस याचिका को किसी दूसरी बेंच को सौंप दिया जाए, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने खारिज कर दिया है. AAP नेता ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केजरीवाल के वकील ने कोर्ट को बताया कि अदालत के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गई है, इसलिए केस की सुनवाई को टाल दिया जाए. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई को टाल दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 मार्च तक सभी 23 लोगों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिया है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बरी किए गए लोगों द्वारा सुनवाई टालने की दलील का विरोध किया और कहा कि ये आगे के लिए पैटर्न बन जाएगा. बरी किए गए केजरीवाल समेत अन्य लोगों के वकील ने कहा कि हमें कोर्ट ने बरी करने का जो आदेश दिया है वो 598 पेज का है. हाईकोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 6 अप्रैल को करेगा.

कोर्टरूम में केजरीवाल के वकील और तुषार मेहता के बीच क्या-क्या बहस हुई….

– CBI की तरफ से SG तुषार मेहता पेश हुए…

तुषार मेहता: सभी प्रतिवादियों को पहले ही नोटिस भेज दिया गया था और नोटिस जारी होने के बाद भी उन्हें सूचना दी गई है.

बेंच: क्या किसी ने जवाब दाखिल नहीं किया है?

बेंच: क्या आप [प्रतिवादी] और समय चाहते हैं?

प्रतिवादी (केजरीवाल के वकील) ने कहा, ‘हां’

केजरीवाल की तरफ से सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन पेश हुए…

हरिहरन: हमने सुप्रीम कोर्ट में एक SLP (विशेष अनुमति याचिका) दाखिल की है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार: अगर केस को टालने का यही आधार है, तो आपत्तियां दूर की जानी चाहिए और केस को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाना चाहिए.

हरिहरन: मैं सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री का इंचार्ज नहीं हूं.

तुषार मेहता: यह ऐसा केस नहीं है जिसमें जवाब या जवाबी हलफनामा दाखिल करना जरूरी हो, क्योंकि हमें सिर्फ चुनौती दिए गए आदेश और रिकॉर्ड को ही देखना है. यह एक असाधारण आदेश है. इसे रिकॉर्ड पर एक पल के लिए भी और नहीं रहने दिया जा सकता.

बेंच: उन्हें जवाब दाखिल करने दीजिए….

तुषार मेहता: मैं गुजारिश करूंगा कि एक हफ्ते से ज्यादा का समय न दिया जाए. बरी करने के मामले में सिर्फ रिकॉर्ड को ही देखा जाता है.

तुषार मेहता: यह अनुचित है और मैं इसका विरोध करता हूं.

बेंच का आदेश: 2 हफ्ते बाद सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए, जवाब दो हफ़्ते के अंदर दाखिल करना होगा.

हरिहरन: जज साहब, यह 500 पन्नों का आदेश है. सिर्फ इसलिए कि यह आदेश उनके पक्ष में नहीं है वे इसे ‘गलत’ बता रहे हैं. हमें पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए. कृपया आदेश में यह भी लिखवा दें कि इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहले ही एक एसएलपी दाखिल की जा चुकी है, क्योंकि इसका इस मामले पर असर पड़ेगा.

जस्टिस शर्मा ने आदेश में यह दर्ज किया कि सुप्रीम कोर्ट में एक एसएलपी और एक रिट याचिका दाखिल की गई है. बेंच: मैंने यह रिकॉर्ड कर लिया है कि आपने फाइल किया है और यह भी कि आपने मुझे इसकी जानकारी दी है.

तुषार मेहता: यह अब एक पैटर्न बन गया है. वे आरोप लगाते हैं और फिर भाग जाते हैं. ऐसे मुकदमों को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता. उन्होंने आरोपों को ही अपना करियर बना लिया है.

हरिहरन: कैसे आरोप? हम तो बस एक और जवाब दाखिल करने के लिए] मौका मांग रहे हैं.

कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई 6 अप्रैल को करेगा.

हरिहरन: क्या यह उसके एक हफ़्ते बाद हो सकती है?

बेंच ने मामले को 6 अप्रैल के लिए लिस्ट कर दिया.

तुषार मेहता: अंतरिम आदेश जारी रहेंगे.

बेंच ने कहा कि अंतरिम आदेश जारी रहेंगे.

तुषार मेहता: वे सिस्टम को नुकसान पहुंचा रहे हैं और मुकदमेबाज को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं.

सुनवाई समाप्त….

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