बदल गया सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान का नाम’, अब इस टाइटल के साथ होगी रिलीज, छिपा है दुनिया के लिए गहरा मेसेज
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सलमान खान और चित्रांगदा सिंह की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का नाम बदलकर ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ रखा गया है. मेकर्स अपनी फिल्म के जरिए दुनिया को संदेश देना चाहते हैं. फिल्म युद्ध रोकने पर जोर देती है. नए नाम को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है. ये फिल्म 14 अगस्त को थिएटर्स में रिलीज होगी.

सलमान खान की फिल्म का टाइटल बदल गया है.
नई दिल्ली. सिनेमा अक्सर उन कहानियों को बयां करने का माध्यम होता है जो इतिहास के पन्नों में दब जाती हैं. सलमान खान और चित्रांगदा सिंह एक ऐसी ही फिल्म लेकर आ रहे हैं. भाईजान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ को लेकर काफी समय से बज बना हुआ है. फिल्म के गाने मातृभूमि को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था. इस गाने को काफी पसंद किया जा रहा है. अब सलमान खान की फिल्म को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. एक्टर की फिल्म का नाम बदल गया है. ‘बैटल ऑफ गलवान’ का नाम बदलकर ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ रखा गया है. यह बदलाव केवल एक नाम का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह एक गहरी सोच को दर्शाता है.
गलवान घाटी की घटना भारतीय शौर्य और बलिदान का एक ऐसा अध्याय है जिसे हर भारतीय गर्व से याद करता है. इस घटना पर आधारित फिल्म से उम्मीद थी कि यह केवल युद्ध के दृश्यों को दिखाएगी. लेकिन जब सलमान खान फिल्म्स ने ‘मातृभूमि’ का नया पोस्टर जारी किया, तो उसने दर्शकों को चौंका दिया. फिल्म का नया नाम और उसकी टैगलाइन ‘मे वॉर रेस्ट इन पीस’ (युद्ध को शांति मिले) बताती है कि फिल्म का उद्देश्य केवल युद्ध को दिखाना नहीं है. साथ ही फिल्म ये समझाना चाहती है कि युद्ध के अंत के बाद ही मानवता का अस्तित्व सुरक्षित रह सकता है.
सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ का बदला नाम
गहरा संदेश देती है फिल्म
सोशल मीडिया पर इस नए नाम की जमकर तारीफ हो रही है. दर्शक इसे एक साहसी कदम मान रहे हैं. यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि किसी भी सीमा की रक्षा का असली मकसद उस शांति को बनाए रखना है, जिसकी रक्षा के लिए सैनिक अपने प्राणों की आहुति देते हैं. सलमान खान ने अपनी इस फिल्म के जरिए रणभूमि की सीमाओं को पार कर वैश्विक शांति का संदेश देने का बीड़ा उठाया है.
‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक ऐसा सिनेमाई अनुभव बनने की ओर है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगा. जब हम स्क्रीन पर गलवान की वीर गाथा देखेंगे, तो साथ ही यह भी महसूस करेंगे कि यह बलिदान इसलिए दिया गया था ताकि भविष्य में कोई और युद्ध न हो.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें