‘US टैरिफ से उबरा नहीं, मिडिल ईस्ट संकट ने तोड़ा दम’, वैश्विक तनाव के कारण फिर पटरी से उतरा भारतीय निर्यात बाजार
कानपुर: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दिखाई देने लगा है. भारतीय निर्यातक, जो पिछले महीनों में कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे थे, अब एक नई परेशानी का सामना कर रहे हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि कई देशों के साथ चल रहा एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कारोबार धीमा पड़ गया है और हजारों करोड़ रुपये के ऑर्डर फिलहाल अटके हुए हैं.
व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि वैश्विक हालात में अचानक आए इस बदलाव ने निर्यातकों की योजनाओं को एक बार फिर झटका दे दिया है. खासतौर पर गल्फ देशों और मिडिल ईस्ट के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने से कई विदेशी कंपनियों ने अपने ऑर्डर रोक दिए हैं.
पहले अमेरिकी टैरिफ ने बढ़ाई मुश्किल
फियो के सहायक निदेशक सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले साल से ही भारतीय निर्यातकों के सामने हालात आसान नहीं रहे हैं. जुलाई 2025 में अमेरिका ने कई उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर लगभग 50 प्रतिशत तक कर दिया था. इसका सीधा असर भारतीय कंपनियों के कारोबार पर पड़ा और कई निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ा.
हालांकि इस साल फरवरी में अमेरिका ने टैरिफ घटाकर करीब 18 प्रतिशत कर दिया था. इसके बाद निर्यातकों को उम्मीद जगी कि अब व्यापार फिर से रफ्तार पकड़ सकेगा. कई कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया था और नए ऑर्डर लेने की तैयारी भी कर ली थी. लेकिन जैसे ही कारोबार पटरी पर लौटने लगा, मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात ने एक बार फिर निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दीं.
हजारों करोड़ के ऑर्डर अटके, बायर्स भी सतर्क
व्यापार संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि मौजूदा हालात में कई विदेशी बायर्स फिलहाल नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं. कुछ कंपनियों ने पहले से दिए गए ऑर्डर भी रोक दिए हैं. इससे निर्यातकों के हजारों करोड़ रुपये के ऑर्डर होल्ड पर चले गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इस साल निर्यात के आंकड़ों पर भी असर पड़ सकता है.
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े निर्यात वाले राज्यों में इसका प्रभाव ज्यादा दिखाई दे सकता है. पिछले वित्त वर्ष में उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात लगभग 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा था. इसमें करीब 19 प्रतिशत कारोबार अमेरिका के साथ हुआ था. ऐसे में वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव होने से प्रदेश के निर्यात पर भी दबाव बढ़ सकता है.
निर्यातकों को हालात सामान्य होने का इंतजार
लेदर उद्योग से जुड़े कारोबारी मुख्तारुल अमीन का कहना है कि फिलहाल निर्यातक हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में लगातार नई चुनौतियां सामने आई हैं, लेकिन कारोबारी दूसरे बाजारों में भी संभावनाएं तलाश रहे हैं. वहीं काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी का कहना है कि यह दौर निर्यातकों के लिए कठिन जरूर है, लेकिन धैर्य बनाए रखना जरूरी है.
उनका कहना है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरेंगे, कारोबार फिर से रफ्तार पकड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था इतनी आपस में जुड़ी हुई है कि किसी भी क्षेत्र में पैदा हुआ संकट दुनियाभर के व्यापार पर असर डाल सकता है. मिडिल ईस्ट का मौजूदा तनाव भी उसी का उदाहरण बनता दिखाई दे रहा है.