Hindu New Year Vikram Samvat 2083 why eating neem on hindu nav varsh guru raja and mangal dev mantri | Hindu Nav Varsh की शुरुआत नीम और मिश्री खाकर क्
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Hindu New Year Vikram Samvat 2083: हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है. भारतीय परंपरा में हर त्योहार और धार्मिक अनुष्ठान के पीछे कोई न कोई आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व जरूर जुड़ा होता है. ऐसा ही एक विशेष परंपरागत रिवाज हिंदू नववर्ष की शुरुआत से भी जुड़ा है. देश के कई हिस्सों में नवसंवत्सर या हिंदू नववर्ष के पहले दिन नीम की पत्तियां खाने की परंपरा है. आइए जानते हैं हिंदू नववर्ष के पहले दिन नीम क्यों खाया जाता है…
Hindu New Year Vikram Samvat 2083: हिंदू नववर्ष 2083 की शुरुआत 19 मार्च दिन गुरुवार से हो रही है और इसी दिन चैत्र नवरात्रि के पहले दिन की पूजा की जाएगी. पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत का शुभारंभ होता है. देश के कई हिस्सों में नवसंवत्सर या हिंदू नववर्ष के पहले दिन नीम की पत्तियां और मिश्री खाने की परंपरा है. माना जाता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा जीवन के कड़वे और मीठे अनुभव प्राप्त करने का प्रतीक है. आइए जानते हैं हिंदू नववर्ष के पहले दिन नीम और मिश्री क्यों खाई जाती है…
क्यों कहा जा रहा है धर्म योद्धा योग? – धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इस दिन को नवसंवत्सर, गुड़ी पड़वा और उगादी जैसे नामों से भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी इसलिए इस तिथि को नववर्ष और नई शुरुआत का दिन माना जाता है. इस वर्ष के राजा गुरु और मंत्री मंगल देव रहने वाले हैं, जब गुरु और मंगल का संयोग बनता है तब धर्म योद्धा योग कहा जाता है.
क्यों खाते हैं नीम के पत्ते और मिश्री? – गुड़ी पड़वा और उगादी के मौके पर सुबह स्नान-पूजन के बाद लोग नीम की कोमल पत्तियां और मिश्री या गुड़ का सेवन करते हैं. कई जगहों पर नीम की पत्तियों को इमली, गुड़ या कच्चे आम के साथ मिलाकर खाया जाता है. धर्माचार्यों के अनुसार नीम और मिश्री जीवन के दो महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रतीक माने जाते हैं. नीम का कड़वा स्वाद जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों को दर्शाता है, जबकि मिश्री की मिठास सुख, सफलता और खुशियों का प्रतीक होती है. इस परंपरा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि जीवन में सुख-दुख दोनों का संतुलन होता है और व्यक्ति को हर परिस्थिति को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए.
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कौन होंगे राजा और मंत्री? – ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जिस दिन नव वर्ष शुरू होता है, उसी दिन का ग्रह उस वर्ष का राजा माना जाता है, इस बार नववर्ष गुरुवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए वर्ष के राजा गुरु ग्रह होंगे, जबकि मंत्री मंगल को माना जा रहा है. साथ ही इस वर्ष के सेनापति, मेघाधिपति और फलधिपति चंद्र देव रहने वाले हैं. गुरु ग्रह विक्रम संवत 2083 के राजा के साथ-साथ नीरसाधिपति, धनाधिपति और सस्याधिपति रहने वाले हैं. वहीं बुध ग्रह धान्याधिपति बुध ग्रह तो रसाधिपति शनिदेव रहने वाले हैं.
आयुर्वेद के लिहाज से नीम की पत्ती खाना शुभ – आयुर्वेद की दृष्टि से भी यह परंपरा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. मौसम के बदलने के समय यानी बसंत से गर्मी की ओर जाते मौसम में शरीर में कई तरह के संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में नीम में मौजूद औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं. वहीं मिश्री शरीर को ऊर्जा देने और नीम की कड़वाहट को संतुलित करने का काम करती है. विशेषज्ञों के अनुसार नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और रक्त शुद्ध करने वाले गुण पाए जाते हैं. इसलिए नववर्ष की शुरुआत में इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.