Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Shubh Muhurat with Panchak | Navratri ghat sthapana vidhi and significance | 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि, घटस्थापना

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Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Shubh Muhurat: 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, हर वर्ष यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है. इस दिन नए साल का शुभारंभ भी हो रहा है और विक्रम संवत 2083 की शुरुआत भी हो जाएगी. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि विधान के साथ घटस्थापना कर मां दुर्गा के पहले स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है. यह नवरात्रि का आरंभिक और सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है, इसके द्वारा देवी दुर्गा की पूजा का विधिवत प्रारंभ होता है. शास्त्रों के अनुसार विधि-विधान से घटस्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति आती है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. इस बार चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना के लिए 2 मुहूर्त हैं और पूरे दिन पंचक काल भी रहने वाला है.

चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026
प्रतिपदा तिथि की शुरुआत – 19 मार्च, गुरुवार सुबह 6 बजकर 53 मिनट से
प्रतिपदा तिथि का समापन – 20 मार्च, शुक्रवार सुबह 4 बजकर 53 मिनट तक
19 मार्च को सूर्योदय से पहले ही प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो रही है और अगले दिन सूर्योदय से पहले पहली तिथि का समापन हो रहा है. इसलिए प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है. ऐसे में 19 मार्च दिन गुरुवार को चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा.

चैत्र नवरात्रि 2026 घटस्थापना का महत्व
घटस्थापना का अर्थ है कलश में देवी शक्ति का आवाहन करना. कलश को ब्रह्मांड और सृष्टि का प्रतीक माना गया है. जब नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित किया जाता है, तो उसमें मां दुर्गा की शक्ति और ऊर्जा का आवाहन किया जाता है. नवरात्रि को साधना, उपवास, जप और तप का विशेष समय माना गया है और घटस्थापना इस साधना का आधिकारिक प्रारंभ है. वैदिक ज्योतिष और शास्त्रीय ग्रंथों में भी यह माना गया है कि धार्मिक अनुष्ठानों में देवी-देवताओं का आवाहन कलश के माध्यम से किया जाता है, क्योंकि कलश को दिव्य ऊर्जा का पात्र माना गया है.

चैत्र नवरात्रि में पंचक का साया
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन पूरे दिन के लिए पंचक काल रहने वाला है लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. 19 मार्च को चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना करना पूरी तरह वैध और शुभ रहने वाला है, क्योंकि धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, नियत तिथि अनुष्ठान जैसे नवरात्रि पर पंचक या भद्रा के दौरान कोई दोष नहीं लगता है. माता की शक्ति सभी भद्रा, पंचक और अशुभ समय से ऊपर है, माता की पूजा किसी भी समय कभी भी कर सकते हैं, वही शुभ समय है. माता की आराधना और घटस्थापना पंचक के नकारात्मक प्रभाव से मुक्त मानी जाती है, इसलिए आप बिना परेशानी के पूजा अराधना कर सकते हैं.

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त 2026
चैत्र नवरात्रि में इस बार घटस्थापना के लिए दो सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त बन रहे हैं. पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरु होगा और सुबह 7 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. दूसरा मुहूर्त दोपहर में बन रहा है, जो 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त है, जो कलश स्थापना के लिए शुभ है. अगर आप सुबह पूजा अर्चना नहीं कर पाए तो आप अभिजीत मुहूर्त में पूजा अर्चना और घटस्थापना कर सकते हैं.

चैत्र नवरात्रि 2026 घटस्थापना विधि
घटस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री में मिट्टी का पात्र, जौ, गंगाजल, आम के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, पुष्प और धूप शामिल होते हैं. इस दिन प्रात:काल स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल को साफ कर वहां एक पवित्र स्थान पर मिट्टी का पात्र स्थापित करें. पात्र में जौ बोएं और उसके ऊपर जल से भरा हुआ कलश रखें. कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर रखें. घटस्थापना के समय भगवती दुर्गा का ध्यान करें और उनकी पूजा अर्चना करें. घटस्थापना का यह शुभ मुहूर्त नवरात्रि के पूरे नौ दिनों की पूजा का आधार है, इसलिए इसे विधि-विधान से करना अत्यंत आवश्यक है. मां दुर्गा की कृपा से सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो.

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