84 मीटर लंबा, 3000 टन का जापानी हाथी! लिथियम-आयन बैटरियों के दम पर समंदर में धमक से चलता है, टॉरपीडो से भी लैस

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नई दिल्‍ली. समंदर की अथाह गहराइयों में जहां सूरज की रोशनी भी दम तोड़ देती है, वहां अब एक ऐसा अदृश्य शिकारी गश्त करेगा जिसकी आहट सुन पाना दुश्मन के लिए नामुमकिन होगा. जापान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए JS चोगेई (SS-517) को नौसेना में शामिल कर लिया है. यह केवल एक पनडुब्बी नहीं बल्कि समंदर के नीचे तकनीक का वो तांडव है जिसने पारंपरिक युद्ध के नियमों को बदल कर रख दिया है. ताइगेई जेएस चोगेई सबमरीन ताइगेई क्लास की यह पांचवीं पनडुब्बी जब अपनी लिथियम-आयन बैटरियों के दम पर पानी को चीरती है तो कोई शोर नहीं होता, सिर्फ एक खौफनाक सन्नाटा होता है जो दुश्मन के राडार और सोनार को फेल करने के लिए काफी है.

1. लिथियम-आयन बैटरी: ‘नॉन-स्टॉप’ पावर का जादू
आमतौर पर डीजल पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार समुद्र की सतह पर आना पड़ता है, जिससे वे दुश्मन की नज़रों में आ सकती हैं. लेकिन JS चोगेई में लगी लिथियम-आयन बैटरी इसे:

·         लंबा स्टे: हफ्तों तक गहराई में छिपे रहने की ताकत देती है.

·         हाई-स्पीड अटैक: यह बैटरी इसे पानी के नीचे बहुत तेज़ रफ्तार से हमला करने और फिर सुरक्षित निकल जाने की क्षमता प्रदान करती है, जो पुरानी बैटरियों के साथ मुमकिन नहीं था.

2. एआईपी (AIP) से छुटकारा
दुनिया की ज़्यादातर आधुनिक पनडुब्बियां ‘एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (AIP) का इस्तेमाल करती हैं, जो जटिल और शोर करने वाला होता है. जापान ने इस पनडुब्बी से AIP सिस्टम को पूरी तरह हटा दिया है. इसकी जगह केवल भारी-भरकम लिथियम-आयन बैटरियां लगाई गई हैं, जिससे पनडुब्बी के अंदर जगह बढ़ गई है और रखरखाव (Maintenance) आसान हो गया है.

3. रूह कंपा देने वाली ‘खामोशी’
यह इस पनडुब्बी की सबसे बड़ी खासियत है. परमाणु पनडुब्बियों के रिएक्टर को ठंडा करने के लिए लगातार पंप चलाने पड़ते हैं जो आवाज़ करते हैं. चोगेई केवल बैटरी पर चलती है, इसलिए यह समुद्र के नीचे एक ‘मछली’ जितनी शांत है. इसके ऊपर एक खास तरह की ‘एनेकोइक कोटिंग’ (Anechoic Coating) की गई है, जो दुश्मन के सोनार सिग्नल को सोख लेती है.

4. ‘फ्लोटिंग फ्लोर’ स्ट्रक्चर
पनडुब्बी के अंदरूनी हिस्से को एक ‘फ्लोटिंग फ्लोर’ (तैरता हुआ फर्श) तकनीक पर बनाया गया है. इसका मतलब है कि मशीनरी और क्रू के रहने वाली जगह पनडुब्बी के बाहरी खोल (Hull) से सीधे जुड़ी नहीं है. इससे मशीनरी की आवाज़ और कंपन पानी में नहीं फैलती, जिससे इसे ढूँढना लगभग नामुमकिन हो जाता है.

5. खतरनाक ‘टाइप 18’ टॉरपीडो
JS चोगेई जापान के सबसे नए Type 18 टॉरपीडो से लैस है. यह टॉरपीडो न केवल तेज़ है, बल्कि इसमें अपना खुद का उन्नत सोनार लगा है जो दुश्मन के झांसों (Decoys) को पहचान कर सीधे निशाने पर हमला करता है.

बेमिसाल तकनीक
·         वजन: इसका वजन लगभग 3,000 टन है जो इसे एक शक्तिशाली और स्थिर प्लेटफॉर्म बनाता है.

·         लंबाई: इसकी कुल लंबाई लगभग 84 मीटर है.

·         सिस्‍टम: यह डीजल-इलेक्ट्रिक सिस्टम पर आधारित है लेकिन इसकी असली ताकत इसकी लिथियम-आयन बैटरी है.

·         पेलोड और हथियार:  इसमें छह 533 मिमी टॉरपीडो ट्यूब हैं.

o    यह जापान के सबसे भारी टॉरपीडो (Type 18) और एंटी-शिप मिसाइलें (जैसे हार्पून) दागने में सक्षम है.

·         क्रू: इसे लगभग 70 विशेषज्ञ सैन्य कर्मियों की टीम द्वारा संचालित किया जाता है.सवाल-जवाब

सवाल-जवाब

JS चोगेई को कब और कहां जापानी नौसेना में शामिल किया गया?

JS चोगेई को 10 मार्च, 2026 को कोबे में स्थित मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज के शिपयार्ड में आयोजित समारोह के दौरान शामिल किया गया.

लिथियम-आयन बैटरी इस पनडुब्बी को अन्य से बेहतर कैसे बनाती है?

यह तकनीक पनडुब्बी को पानी के भीतर अधिक समय तक रहने की शक्ति देती है, वजन कम करती है और इसे अत्यधिक शांत बनाती है, जिससे इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है.

ताइगेई क्लास पनडुब्बियों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इनका मुख्य उद्देश्य पुरानी सोरयू क्लास पनडुब्बियों को बदलना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जापान की समुद्री रक्षा और निगरानी को आधुनिक बनाना है.

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