कन्नूर की ‘लेडी किलर्स’: बुजुर्ग महिला का कत्ल कर लूटा था सोना, 10 साल बाद दबोची गईं 7 भाषाएं बोलने वाली मां-बेटी!
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Crime News Today: केरल के कन्नूर में साल 2016 में हुए एक सनसनीखेज मर्डर केस में पुलिस को 9 साल बाद बड़ी कामयाबी मिली है. 60 साल की बुजुर्ग महिला की बेरहमी से हत्या कर फरार हुई मां-बेटी को क्राइम ब्रांच ने मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया है. ये दोनों महिलाएं दिल्ली की रहने वाली हैं और पिछले एक दशक से पुलिस को चकमा देने के लिए हुलिया और शहर बदल रही थीं. इनके पास से चोरी का सोना और कैश भी बरामद हुआ है.

बुजुर्ग महिला का कत्ल कर लूटा था सोना, एक दशक बाद सलाखों के पीछे पहुंचीं हत्यारिनें. (AI से बनाई सांकेतिक फोटो)
नई दिल्ली: केरल के कन्नूर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है. साल 2016 में एक बुजुर्ग महिला की बेरहमी से हत्या कर फरार हुई दो महिलाओं को पुलिस ने करीब एक दशक बाद गिरफ्तार कर लिया है. पकड़ी गई आरोपियों की पहचान दिल्ली के नांगलोई की रहने वाली 55 साल की परवीन बानू और उसकी 32 साल की बेटी सकीना फातिमा के रूप में हुई है. इन दोनों ने मिलकर 60 साल की मरदान कुंजामिना की हत्या की थी और उनका कीमती सामान लेकर चंपत हो गई थीं. क्राइम ब्रांच की टीम ने इन दोनों को मध्य प्रदेश के उज्जैन से धर दबोचा है. पुलिस के मुताबिक ये दोनों महिलाएं इतनी शातिर थीं कि पिछले 9 सालों से लगातार अपनी लोकेशन और पहचान बदल रही थीं. इनके पकड़े जाने से कन्नूर पुलिस ने राहत की सांस ली है, क्योंकि यह केस लंबे समय से अनसुलझा बना हुआ था.
कैसे बुना था मौत का जाल?
इस हत्याकांड की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म जैसी है. अप्रैल 2016 में ये दोनों महिलाएं कन्नूर के इरिककुर इलाके में रहने आई थीं. उन्होंने खुद को कपड़ा व्यापारी बताया और कुंजामिना के घर के पास एक कमरा किराए पर लिया. धीरे-धीरे उन्होंने बुजुर्ग महिला का भरोसा जीता और उनसे गहरी दोस्ती कर ली. 30 अप्रैल 2016 की सुबह उन्होंने कुंजामिना को अपने कमरे पर बुलाया. जैसे ही वह अंदर आईं, इन दोनों ने उन पर चाकू से हमला कर दिया. उनके गले, छाती और पेट पर कई वार किए गए जब तक उनकी जान नहीं निकल गई. इसके बाद वे सोने की चेन, चूड़ियां और कैश लेकर फरार हो गईं.
कैसे बचती रहीं पुलिस की पकड़ से?
जांच में खुलासा हुआ है कि ये दोनों महिलाएं पहले भी आंध्र प्रदेश में इसी तरह के अपराध में शामिल रही थीं. पुलिस को चकमा देने के लिए वे फर्जी दस्तावेजों पर घर किराए पर लेती थीं. क्राइम करने से पहले वे अपना मोबाइल फोन फेंक देती थीं और दूसरों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल करती थीं. वे एक शहर में ज्यादा दिन नहीं रुकती थीं. उन्होंने केरल के कन्नूर, कासरगोड, वायनाड और तिरुवनंतपुरम के अलावा तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में पनाह ली थी.
7 भाषाओं की जानकार थीं
इन महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी भाषाई पकड़ थी. ये दोनों तेलुगु, कन्नड़, तमिल, मलयालम, गुजराती, हिंदी और इंग्लिश बोलने में माहिर थीं. इसी वजह से वे जिस भी राज्य में जाती थीं, वहां के स्थानीय लोगों में आसानी से घुल-मिल जाती थीं और किसी को उन पर शक नहीं होता था. साल 2024 में जब यह केस स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपा गया, तब जाकर जांच में तेजी आई. क्राइम ब्रांच के एसपी पी बालकृष्णन नायर की टीम ने टेक्निकल सर्विलांस की मदद से इन्हें उज्जैन में ट्रैक किया और स्थानीय पुलिस की मदद से गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल इन्हें अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया है ताकि पूछताछ में और भी राज खुल सकें.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें