आंवले के प्रोडक्ट बनाकर कमा रहीं लाखों
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गोंडा जिले के वजीरगंज की कुसुम मौर्य ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आंवले से मुरब्बा, कैंडी, पाउडर, अचार और जूस जैसे उत्पाद बनाकर अपनी पहचान बनाई है. उनकी पहल से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गांव की 10 से अधिक महिलाओं को भी रोजगार मिला है और वह सालाना लाखों रुपये की आय कर रही हैं.
गोंडा. जिले के विकासखंड वजीरगंज की रहने वाली कुसुम मौर्य आज अपने गांव की महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं. कभी घर के काम तक सीमित रहने वाली कुसुम मौर्य ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. अब वह आंवले से कई तरह के प्रोडक्ट बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं. उनकी इस पहल से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गांव की कई महिलाओं को भी रोजगार का मौका मिला है. कुसुम मौर्य बताती हैं कि पहले वह सिर्फ घर के काम करती थी. बाद में उन्होंने “सम्राट स्वयं सहायता समूह” से जुड़कर कुछ नया करने का फैसला किया. समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आंवले से अलग-अलग प्रकार के उत्पाद बनाने का विचार आया. इसके बाद उन्होंने आंवले से मुरब्बा, कैंडी, आंवला पाउडर, अचार और जूस जैसे कई प्रोडक्ट बनाना शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि इन सभी प्रोडक्ट की बाजार में अच्छी मांग है, लोग इन उत्पादों को पसंद करते हैं, जिससे उन्हें नियमित आमदनी होने लगी है. आज उनकी मेहनत का नतीजा है कि उनके प्रोडक्ट स्थानीय बाजारों में बिक रहे हैं और उन्हें अच्छा मुनाफा भी मिल रहा है.
कहां से आया आइडिया
कुसुम मौर्य बताती हैं कि उन्हें आंवले से प्रोडक्ट बनाने का आइडिया बाजार से मिला. उन्होंने देखा कि बाजार में आंवले की कैंडी, जूस, पाउडर और मुरब्बा बिक रहा है. तब उनके मन में विचार आया कि क्यों न वह भी आंवले से ऐसे ही उत्पाद बनाएं. शुरुआत में उन्होंने घर पर थोड़ी मात्रा में प्रोडक्ट बनाकर लोगों को चखने के लिए दिए. लोगों ने जब उनके बनाए उत्पादों की तारीफ की, तब उन्होंने इसे बड़े स्तर पर बनाना शुरू कर दिया. कुसुम मौर्य ने बताया कि आंवले की कैंडी बनाने की प्रक्रिया भी आसान है. सबसे पहले आंवले को उबाल लिया जाता है. इसके बाद उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ड्रायर मशीन में सुखाया जाता है. जब आंवला पूरी तरह सूख जाता है तो उसमें ऊपर से पिसी हुई चीनी डाल दी जाती है. इसके बाद स्वादिष्ट आंवले की कैंडी तैयार हो जाती है.
कैसे तैयार होता है आवाले का पाउडर
कुसुम मौर्य बताती है कि आंवले का पाउडर भी तैयार किया जाता है. इसके लिए आंवले को हल्का उबालने के बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सुखाया जाता है और फिर उसे पीसकर पाउडर बना लिया जाता है. इसके अलावा वह आंवले का मुरब्बा भी बनाती हैं. उनके यहां दो तरह का मुरब्बा तैयार किया जाता है एक चीनी से और दूसरा गुड़ से.
कितनी महिलाओं को दे रही हैं रोजगार
कुसुम मौर्य बताती हैं कि उनके “सम्राट स्वयं सहायता समूह” में करीब 10 से 11 महिलाएं काम कर रही हैं. सभी महिलाएं मिलकर आंवले से अलग-अलग प्रकार के उत्पाद तैयार करती हैं. इससे गांव की महिलाओं को घर के पास ही रोजगार मिल रहा है और उनकी आमदनी भी बढ़ रही है. आज कुसुम मौर्य की मेहनत रंग ला रही है. आंवले से बने इन उत्पादों की बिक्री से उन्हें सालाना लाखों रुपये की आय हो रही है. उनकी इस सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं और स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपना काम शुरू करने के बारे में सोच रही हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें