LPG की किल्लत से गोरखपुर के होटल-ढाबा मालिक परेशान, बोले- गैस नहीं मिली तो बंद करनी पड़ेगी दुकान

Share to your loved once


Last Updated:

LPG Crisis Gorakhpur: देश के कई हिस्सों में एलपीजी गैस की किल्लत देखने को मिल रही है. इस संकट का असर अब सीधे शहर के खाने-पीने के कारोबार पर भी पड़ने लगा है. कई छोटे रेस्टोरेंट और होटल संचालकों का कहना है कि अगर जल्द गैस की समस्या दूर नहीं हुई, तो उन्हें अपनी दुकानें बंद करनी पड़ सकती हैं.

गोरखपुर: देश के कई हिस्सों की तरह गोरखपुर में भी इन दिनों एलपीजी गैस की किल्लत देखने को मिल रही है. हालात ऐसे हैं कि गैस गोदामों के बाहर सुबह से ही लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं. लोग घंटों इंतजार करने के बाद भी सिलेंडर मिलने की उम्मीद में खड़े रहते हैं. इस संकट का असर अब सीधे शहर के खाने-पीने के कारोबार पर भी पड़ने लगा है. कई छोटे रेस्टोरेंट और होटल संचालकों का कहना है कि अगर जल्द गैस की समस्या दूर नहीं हुई, तो उन्हें अपनी दुकानें बंद करनी पड़ सकती हैं.

दुकान करनी पड़ सकती है बंद
शहर के जिला अस्पताल रोड पर स्थित दानाराम सिंधी होटल के मालिक प्रीतम दास आहूजा बताते हैं कि गैस की स्थिति बेहद खराब हो गई है. उनके मुताबिक, दुकान चलाने के लिए रोजाना कई सिलेंडर की जरूरत पड़ती है, लेकिन फिलहाल बड़ी मुश्किल से एक या दो सिलेंडर ही मिल पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस हालत में दुकान ज्यादा दिनों तक चलाना संभव नहीं है. हमारे पास सिर्फ दो से तीन दिन की ही गैस बची है, उसके बाद दुकान बंद करनी पड़ सकती है.

गोदामों के बाहर लंबी कतारें
दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां एक साथ चार से पांच सिलेंडर का इंतजाम हो जाता था, वहीं अब एक सिलेंडर के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. गोदामों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कई बार पूरा दिन इंतजार करने के बाद भी गैस नहीं मिल पाती. इससे होटल, ढाबे और फास्ट फूड की दुकानों का कामकाज प्रभावित हो रहा है.

कोयले या लकड़ी पर खाना बनाने की व्यवस्था
कुछ बड़े होटल संचालकों ने फिलहाल कोयले या लकड़ी पर खाना बनाने की वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है, लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए यह आसान नहीं है. जगह की कमी और अतिरिक्त खर्च की वजह से छोटे रेस्टोरेंट और ठेले वाले इस विकल्प को अपनाने में असमर्थ हैं.

खाने-पीने का कारोबार करने वाले लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो शहर में कई छोटी दुकानें अस्थायी रूप से बंद हो सकती हैं. इसका असर सिर्फ दुकानदारों पर ही नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी पड़ेगा जो रोजमर्रा के खाने के लिए इन दुकानों पर निर्भर रहते हैं.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP