‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ वाले ‘पीपल्स जनरल’… कौन हैं बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन? इनसे जुड़ी हैं कई दिलचस्प कहानियां

Share to your loved once


Last Updated:

Bihar new governor Syed Ata Hasnain: बिहार को नया राज्यपाल मिल गया है और इस पद की जिम्मेदारी अब सैयद अता हसनैन (Syed Ata Hasnain) संभाल रहे हैं. वे बिहार के 43वें राज्यपाल बने हैं. भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त अता हसनैन को देश में एक अलग तरह के सैन्य अधिकारी के रूप में जाना जाता है. उनकी पहचान सिर्फ एक सख्त सैन्य कमांडर की नहीं रही, बल्कि ऐसे अधिकारी की भी रही जिसने संघर्ष वाले इलाके में लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की. उनसे जुड़ी कुछ कहानियां बेहद दिलचस्प हैं जो आगे दी गई हैं.

कश्मीर के 'पीपल्स जनरल' अब बिहार के राज्यपाल, जानिए कौन हैं सैयद अता हसनैन ?Zoom

बिहार के 43वें राज्यपाल बने सैयद अता हसनैन

पटना. लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है. पटना के लोक भवन में आयोजित समारोह में पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू ने उन्हें पद और गोपनियता की शपथ दिलाई. इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे. बता दें कि सेना से रिटायर हो चुके सैयद अता हसनैन की नियुक्ति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में की थी और उन्होंने बिहार के पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की जगह ली है. राजनीति के जानकारों की नजर में यह बदलाव बिहार की सियासत और प्रशासन में नई उम्मीद जगाता है.

कश्मीर से बिहार तक एक अलग पहचान वाले जनरल

बता दें कि सियासत से लेकर प्रशासनिक गलियारों में सैयद अता हसनैन का नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है. विशेषकर कश्मीर में किए गए उनके कार्यों की काफी सराहना होती है. दरअसल, उनके सैन्य करियर का सबसे चर्चित दौर कश्मीर घाटी में रहा, जहां उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अभियान के साथ साथ लोगों के दिलों तक पहुंचने की कोशिश की. यही कारण है कि उन्हें कई लोग “पीपल्स जनरल” या “जनरल ऑफ द पीपल” यानी आम लोगों का जनरल भी कहते हैं. आइए आगे जानते हैं राज्यपाल सैयद अता हसनैन से जुड़ी कुछ ऐसे वाकये जो आपको सुखद लगेंगे.

चिनार कोर की कमान और अलग सोच

जानकारी के अनुसार, अता हसनैन 2010 से 2013 के बीच श्रीनगर स्थित भारतीय सेना की 15 कोर के कमांडर रहे. इस कोर को चिनार कोर के नाम से भी जाना जाता है. उस समय कश्मीर घाटी में हालात काफी संवेदनशील थे और सुरक्षा बलों के सामने कई चुनौतियां थीं.इसी दौर में उन्होंने एक अलग रणनीति अपनाई जिसे “हार्ट्स डॉक्ट्रिन” के नाम से जाना गया. इस सोच का मकसद था कि आतंकवाद से लड़ाई केवल हथियारों के दम पर नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए स्थानीय लोगों का भरोसा भी जरूरी है. इस रणनीति के तहत वे अक्सर स्थानीय लोगों, बुद्धिजीवियों और धार्मिक नेताओं से बातचीत करते थे. उनका मानना था कि अगर आम नागरिकों के मन में सेना के प्रति भरोसा बढ़ेगा तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई भी मजबूत होगी.

कश्मीर प्रीमियर लीग से बना भरोसे का सेतु

कश्मीर में उनके कार्यकाल से जुड़ा एक दिलचस्प उदाहरण 2011 में शुरू हुआ कश्मीर प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट है. उस समय घाटी में तनाव का माहौल था. इस टूर्नामेंट के जरिए उन्होंने युवाओं को खेल के माध्यम से जोड़ने की कोशिश की. इस लीग में स्थानीय खिलाड़ी, दर्शक और सेना के जवान एक साथ आते थे. इससे सेना और आम लोगों के बीच दूरी कम करने में मदद मिली. कहा जाता है कि व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद अता हसनैन कई मैच देखने पहुंच जाते थे और खिलाड़ियों से सीधे बातचीत करते थे. इस वजह से स्थानीय युवाओं में उनके प्रति अलग तरह का सम्मान देखा गया.

अमरनाथ यात्रा में भी निभाई अहम भूमिका

बताया जाता है कि सैयद अता हसनैन ने अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई. हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होते हैं. अता हसनैन के नेतृत्व में सुरक्षा एजेंसियों ने बेहतर समन्वय, संचार व्यवस्था और स्थानीय लोगों की भागीदारी के जरिए यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के कई कदम उठाए. इससे यात्रा प्रबंधन में भी सुधार देखा गया.

बिहार के लिए क्यों अहम है यह अनुभव?

अब जब अता हसनैन बिहार के राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी संभाल रहे हैं तो उनके अनुभव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक ऐसे अधिकारी के रूप में उनकी पहचान रही है जो सख्त फैसले लेने के साथ साथ संवाद और भरोसे को भी महत्व देते हैं. यही गुण उन्हें अन्य सैन्य अधिकारियों से अलग बनाते हैं. राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रशासनिक और रणनीतिक अनुभव के साथ उनका संवाद आधारित दृष्टिकोण बिहार में भी उपयोगी साबित हो सकता है.

“दिल जीतने” की सोच से नई जिम्मेदारी

कश्मीर में उनके कार्यकाल की कई कहानियां आज भी चर्चा में रहती हैं. वहां के कई लोग उन्हें आज भी अपने जनरल के रूप में याद करते हैं. अब बिहार के राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका अलग है, लेकिन उनकी कार्यशैली को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वे संवाद और संतुलन की उसी सोच के साथ अपनी नई जिम्मेदारी निभाएंगे. चिनार कोर से राजभवन तक का यह सफर केवल एक सैन्य अधिकारी के पद परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच की कहानी भी है जिसमें सुरक्षा के साथ साथ भरोसे और संवाद को भी बराबर महत्व दिया गया.

About the Author

Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP