Papamochani Ekadashi 2026 Katha: 15 मार्च को परिघ योग में पापमोचिनी एकादशी, पूजा में पढ़ते हैं यह पौराणिक कथा, देखें मुहूर्त

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Papamochani Ekadashi Vrat Katha In Hindi: पापमोचिनी एकादशी 15 मार्च रविवार को है. इस दिन परिघ योग बन रहा है. परिघ योग में दुश्मनों पर विजय प्राप्ति के उपाय कर सकते हैं. पापमोचिनी एकादशी के दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा पंचामृत, तुलसी के पत्ते, पीले फूल, धूप, दीप आदि से करते हैं. पूजा के समय पापमोचिनी एकादशी की व्रत कथा सुनते हैं. इस व्रत को करने से पाप मिटते हैं और मोक्ष मिलता है. पापमोचिनी एकादशी का व्रत चैत्र कृष्ण एकादशी को किया जाता है. एक बार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पापमोचिनी एकादशी के महत्व और विधि के बारे में पूछा था. तब उन्होंने विस्तार से इसके बारे में बताया.

पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा

ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को पापमोचिनी एकादशी की ​कथा सुनाई थी. उसके अनुसार, चित्ररथ वन में इंद्र और गंधर्व कन्याएं घूमने जाती थीं. उस वन में ही मेधावी ऋषि भगवान शिव की तपस्या में लीन थे. वे अपनी कठोर तपस्या से भोलेनाथ को प्रसन्न करने में लगे थे. इसके लिए वे ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन कर रहे थे.

एक दिन उस वन में मंजुघोषा नामक अप्सरा आई. वह मेधावी ऋषि के आश्रम के पास वीणा बजाने लगी और गीत गाने लगी. मंजुघोषा के गीतों से मेधावी ऋषि का ध्यान भंग हो गया. वे काम के वशीभूत थे, उस समय मंजुघोषा उनके पास गई. उसे देखकर वे मोहित हो गए.

वे अपना उद्देश्य भूल गए और मंजुघोषा के साथ रति क्रीड़ा करने लगे. समय व्यतीत होने लगा. एक-एक करके 57 साल गुजर गए. एक दिन मंजुघोषा ने मेधावी ऋषि से कहा कि अब आप आज्ञा दें, वह स्वर्ग जाना चाहती है. य​ह सुनते ही ऋषि काम वासना से बाहर आ गए और उनको अपनी गलती का एहसास हुआ.

उन्होंने माना कि मंजुघोषा की वजह से वे अपने मार्ग से विचलित हुए हैं. उसने ही उनकी तपस्या भंग की. यह सब सोचकर वे क्रोधित हो गए और मंजुघोषा को पिशाचनी योनि में कष्ट भोगने का श्राप दे दिया. मंजुघोषा भय से कांपने लगी. उसने मेधावी ऋषि से इस श्राप से मुक्त होने का उपाय पूछा.

इस पर मेधावी ऋषि ने कहा कि जब चैत्र कृष्ण एकादशी आए तो तुम विधिपूर्वक व्रत करो और भगवान विष्णु की पूजा करो. इससे तुम्हारा पाप मिटेगा और तुम मुक्त हो जाओगी. इसके बाद मेधावी ऋषि उस वन से निकलकर अपने पिता के पास पहुंच गए.

उनके पिता ने अपने बेटे की गलती को जान लिया था. उन्होंने मेधावी ऋषि को भी पापमोचिनी एकादशी व्रत करने को कहा. पापमोचिनी एकादशी के दिन मंजूघोषा और मेधावी ऋषि ने विधिपूर्वक व्रत और पूजन किया. श्रीहरि के आशीर्वाद से मंजुघोषा के पाप मिट गए, तो वह स्वर्ग चली गई. वहीं मेधावी ऋषि भी पाप मुक्त हो गए. जो व्यक्ति पापमोचिनी एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप मिटते हैं और वह पुण्य प्राप्त करता है.

पापमोचिनी एकादशी मुहूर्त 2026

  • चैत्र कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ: 14 मार्च, सुबह 8:10 बजे से
  • चैत्र कृष्ण एकादशी तिथि का समापन: 15 मार्च, सुबह 9:16 बजे पर
  • परिघ योग: प्रात:काल से लेकर सुबह 10:25 ए एम तक
  • पापमोचनी एकादशी पूजा मुहूर्त: सुबह 08:01 बजे से दोपहर 12:30 बजे
  • पापमोचनी एकादशी व्रत पारण का समय: 16 मार्च, 06:30 ए एम से 08:54 ए एम के बीच

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