कम लागत में ज्यादा मुनाफा, किसानों करें बैंगन की खेती, सालभर रहती है मार्केट में डिमांड

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कम लागत में ज्यादा मुनाफा, किसानों करें बैंगन की खेती, सालभर रहती है डिमांड

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Baigan ki kheti kab aur kaise karen: किसान पारंपरिक खेती के अलावा सब्जियों की खेती करके भी अच्छी आमदनी हासिल कर सकते है. यदि सब्जियों की खेती मौसम और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर की जाए, तो किसानों को बेहतर कीमत मिलती है. ऐसी ही एक सब्जी है बैंगन, जिसकी बाजार में सालभर अच्छी मांग बनी रहती है. बैंगन की खेती कम लागत में की जा सकती है और इसकी फसल भी अपेक्षाकृत जल्दी तैयार हो जाती है. सही देखभाल, समय पर सिंचाई और उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसान इसकी पैदावार बढ़ा सकते है. बाजार में बैंगन की लगातार मांग होने के कारण इसकी बिक्री में भी ज्यादा परेशानी नहीं होती. यही वजह है कि कई किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बैंगन की खेती की ओर भी रुख कर रहे है और इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे है.

बैंगन एक ऐसी सब्जी है जिसकी खेती सालभर अलग-अलग मौसम में की जा सकती है. लेकिन गर्मियों के समय बैंगन की फसल में कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है. खासकर फल और तना छेदक कीड़े फसल को तेजी से खराब कर देते है. इस समस्या से बचाव के लिए किसान कुछ देशी उपायों का सहारा ले सकते है. यह तरीका न सिर्फ कीटों को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि फसल की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है. प्राकृतिक घोल या जैविक उपायों में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद होते हैं,जो पौधों की वृद्धि को भी बढ़ावा देते है.

जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार ने बताया बैंगन की खेती किसान बड़े पैमाने पर करते हैं क्योंकि बैंगन की मांग अधिक होने के कारण इसकी बिक्री भी खूब होती लेकिन कभी कभी बैगन की खेती तो अच्छी होती है. पर इसके फल वह पौधे मे कीड़े लग जाते है. जिससे किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है. ऐसे मे किसान अगर बैंगन के पौधों में इन चीजो का उपयोग से कीट व रोग से तो मुक्ति मिलेगी ही साथ ही फसल क़ी अच्छी पैदावार भी होंगी.

अक्सर बैंगन के पौधे वह फल मे कीड़े वह रोग ज्यादा लगता है. ऐसे में फूल वह फल बेहद कम आते ऐसे में किसानो की फसल नष्ट हो जाती है. ऐसे में इस घोल मदद से पौधे में फल तो आएंगे ही साथ ही पौधे की ग्रोथ भी होंगी.

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फल और तना छेदक कीट की वजह से बैगन के पेड़ का तना मुरझाकर लटक जाता है. साथ ही बाद में सूख भी जाता है. फल आने पर इल्लियां फलों में छेद बनाकर घुस जाती हैं और अंदर ही अंदर फल को खाकर उन्हें खराब कर देती हैं. उनके मल की वजह से ही फल में सड़न आ जाती है.

बैंगन के पौधे में डालने के लिए चूना और नीला थोथा का उपयोग कर सकते है. चूना मिट्टी के पीएच स्तर को संतुलित करता है. जिससे पौधे के लिए पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध हो जाते है. चूने में कैल्शियम होता है जो पौधे में फलों की पैदावार को बढ़ाता है और कीट रोग को पौधे से कोसों दूर रखता है. नीला थोथा इसे कॉपर सल्फेट और तूतिया भी कहते है. ये एक कवकनाशी है जो बैंगन के पौधों को फंगल संक्रमण से बचाता है. जिससे पौधे का विकास तेजी से होता है.

बैंगन के पौधे में चूना और नीला थोथा का उपयोग बहुत ज्यादा उपयोगी और लाभकारी साबित होता है. इसका उपयोग करने के लिए एक लीटर पानी में एक चम्मच चूने और एक चम्मच नीला थोथा को डालकर अच्छे से घोलना है. फिर बैंगन के पौधे की मिट्टी में इस पानी को डालना है. ऐसा करने से पौधे को पोषक तत्व प्राप्त होंगे जिससे पौधे में कीड़े नहीं लगेंगे और बैंगन की पैदावार जबरदस्त होगी.

चूना मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट से बना होता है, जो मिट्टी की एसिडिटी को कम करके उसका PH बैलेंस संतुलित करने में मदद करता है. दरअसल, मिट्टी में एसिडिटी की मात्रा ज्यादा होने की वजह से पौधे की जड़ें पोषक तत्वों को ठीक से ग्रहण नहीं कर पाती है. ऐसे में चूने का घोल मिट्टी की एसिडिटी को कम करके उसे बैलेंस करता है, जिससे पौधे को पोषक तत्व ग्रहण करने में मदद मिल सकती है.

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