सुप्रीम कोर्ट का फिल्म मेकर्स के हक में फैसला, हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक, टिकट कीमतों पर पुराना सिस्टम बहाल
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सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें फिल्म रिलीज से 90 दिन पहले टिकट की बढ़ी हुई कीमतों को पब्लिक के सामने लाना जरूरी था. कोर्ट ने माना कि यह नियम व्यावहारिक नहीं है और इससे राज्य में फिल्मों की रिलीज पर असर पड़ सकता है. ‘मैत्री मूवी मेकर्स’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि रिलीज से तीन महीने पहले कीमतें तय करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि कई फिल्में कम समय में बनकर तैयार हो जाती हैं. फिलहाल, टिकट कीमतों को मंजूरी देने की पुराना सिस्टम ही लागू रहेगा.

फिल्म मेकर्स ने ली राहत की सांस.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस चौंकाने वाले फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि अगर किसी फिल्म के टिकट के दाम बढ़ाने हैं, तो इसकी जानकारी फिल्म रिलीज होने से पूरे 90 दिन पहले पब्लिक करनी होगी. जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की बेंच ने शुक्रवार 13 मार्च को इस मामले में दखल देते हुए कहा कि हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश राज्य की सभी फिल्मों की रिलीज को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल टिकट की कीमतों को मंजूरी देने का पुराना सिस्टम ही चलता रहेगा. यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब ‘मैत्री मूवी मेकर्स’ (Mythri Movie Makers) जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस ने हाईकोर्ट के इस नियम को गलत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
अदालत में फिल्म मेकर्स की तरफ से सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि 90 दिन की यह शर्त समझ से परे है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ये ’90 दिन’ का आंकड़ा आया कहां से? असलियत तो यह है कि आज के दौर में कई फिल्में 90 दिनों के भीतर बनकर तैयार हो जाती हैं, ऐसे में रिलीज से तीन महीने पहले टिकट के दाम तय करना नामुमकिन है. ‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के अनुसार, वकील ने यह भी शिकायत की कि हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माताओं की बात सुने बिना ही यह आदेश दे दिया, जिससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री में अफरा-तफरी का माहौल बन गया था. दलील दी गई कि फिल्म अगले हफ्ते रिलीज होने वाली है और ऐसे में अचानक यह नियम थोपना बिजनेस के लिहाज से बिल्कुल भी सही नहीं है.
फिल्म इंडस्ट्री ने ली राहत की सांस
पूरा मामला दरअसल जनवरी 2026 में वकील दाचेपल्ली चंद्र बाबू की एक याचिका से शुरू हुआ था. उन्होंने फिल्म ‘मना शंकरा वरा प्रसाद गरु’ के टिकटों की बढ़ी हुई कीमतों को चुनौती दी थी. उनका कहना था कि सरकार रिलीज से ऐन पहले दाम बढ़ा देती है, जिससे जनता को विरोध करने का मौका नहीं मिलता. हाईकोर्ट ने इसी आधार पर भविष्य के लिए 90 दिन की शर्त लगा दी थी ताकि लोग नियम 1955 की धारा 7ए के तहत इसके रिव्यू की मांग कर सकें. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद फिल्म इंडस्ट्री ने राहत की सांस ली है, क्योंकि कोर्ट ने माना है कि बिना सोचे-समझे लागू किए गए ऐसे नियम पूरे सिस्टम को बिगाड़ सकते हैं.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें