50-50 किलो की मछलियां, फिर भी नहीं किसी की मारकर खाने की हिम्मत, UP का रहस्यमयी तालाब

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UP Strange Story: क्या आप किसी ऐसे तालाब के बारे में जानते हैं, जहां की मछलियों को कोई नहीं खाता. अगर नहीं तो हम आपको बता रहे हैं उत्तर प्रदेश के मऊ के बरहदपुर स्थित तलाब की अजब गजब कहानी. यहां की मछलियों को कोई मारकर नहीं खाता. इस तालाब की मछलियों को मारने की सोचकर ही रूह कांप जाती हैं. आइए जानते हैं क्या है खास वजह.

मऊ: बहुत से लोगों का पेट तब तक नहीं भरता जब तक थाली में मछली न हो. दोपहर के भोजन में चावल के साथ मछली का एक टुकड़ा न केवल पेट भरता है, बल्कि मन को भी संतुष्टि देता है. ऐसे में पता चले कि किसी तालाब में 50-50 किलो की मछलियां हैं तो उन्हें मारकर घर लाने का मन होगा ही. मगर, यूपी के मऊ के बरहदपुर में स्थित एक तालाब है, जहां की मछलियों को किसी की हाथ लगाने की हिम्मत भी नहीं है. इस तालाब की मछली मारने की सोचकर ही रूह कांप जाती है. आइए जानते हैं क्या है खास वजह.

क्या कहते हैं लोग?

स्थानीय निवासी दीनानाथ सिंह ने लोकल18 से बात की. उन्होंने बताया कि किशुन दास बाबा के मंदिर के बगल में तालाब है. यहां की बड़ी मान्यता है. लोग दूर-दूर से स्नान करने आते हैं और यहां पूजा पाठ करते हैं. यहां हर किसी की मुराद पूरी होती है. बाबा किशन दास इसी तालाब में स्नान करते थे और यहीं मंदिर पर बैठकर पूजा पाठ करते थे. तालाब में वर्षों पुरानी छोड़ी गई मछलियां हैं, जो 50-50 किलो से ऊपर की हैं. मगर, किसी की हिम्मत नहीं होती कि वह इस तालब की मछली को मार सके. यदि कोई चोरी से इस मछली को मारकर घर भी ले जाता है तो उसमें कीड़े पड़ जाते हैं. वहीं, मछली मारने वाले कोढ़ हो जाते हैं. इस वजह से किसी की हिम्मत नहीं होती कि इस तालाब से मछली मारे.

जो खाएगा मछली होगा परेशान
बाबा किशुन दास का इस तालाब की मछलियों से काफी लगाव था, जिसकी वजह से वह मछली को मारने नहीं देते थे. उनका श्राप है कि जो इस तालाब से मछली मारकर खाएगा वह परेशान हो जाएगा. बाबा इतने चमत्कारी थी कि जो कहते थे पूरा हो जाता था. इसलिए आज भी कभी कोई इस तालाब की मछलियों को नहीं मारता है. अगर कोई चोरी से मार भी लेता तो वह परेशान हो जाता है.

मछली मारने वाले की कांपती है रूह
दीनानाथ सिंह बताते हैं कि बाबा इतने चमत्कारी थे कि उन्होंने एक गाय पाली थी. गाय एक व्यक्ति के खेत में चली गई और उस व्यक्ति ने गाय के पैर में मार दिया. इससे गाय लंगड़ी हो गई. बाबा ने पूछा गाय को किसने मारा. इस पर कोई कुछ नहीं बोला तो उन्होंने श्राप दिया कि जिसने भी इस गाय को मारा है वह लंगड़ा हो जाएगा. उसके बाद उस शख्स के परिवार में सभी लोग लंगड़े होगए. आज भी उस परिवार में लोग लंगड़े ही होते हैं. इस भय से कोई इस तालाब की मछली नहीं मारता.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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