बला की खूबसूरत हसीना, शादीशुदा डायरेक्टर के प्यार में रही दीवानी, न तोड़ा घर न बनीं सौतन, आज भी हैं सिंगल
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में लव अफेयर के किस्से नए नहीं हैं. कई सितारों को अपने को-स्टार्स से प्यार हुआ. किसी ने प्यार पर जीत पाई तो कोई प्यार हार बैठा. लेकिन बॉलीवुड में एक ऐसी एक्ट्रेस हुई, जिनकी खूबसूरती और अदाकारी के लाखों दीवाने थे. पर्दे पर उनकी मुस्कान और मासूमियत दर्शकों का दिल जीत लेती थी, लेकिन उनकी निजी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रही. वह एक शादीशुदा मशहूर डायरेक्टर के प्यार में पूरी तरह दीवानी थीं. दोनों के बीच गहरा लगाव था, लेकिन उन्होंने कभी किसी का घर तोड़ने की कोशिश नहीं की. उन्होंने साफ कहा कि वह किसी की ‘सौतन’ बनकर नहीं जी सकतीं. यही वजह रही कि उन्होंने अपनी जिंदगी अकेले ही बिताने का फैसला किया.आज भी यह दिग्गज अदाकारा सिंगल हैं, लेकिन उनकी कहानी प्यार, सम्मान और मजबूत फैसलों की मिसाल मानी जाती है.
ये अधूरी प्रेम कहानी है 60 और 70 के दशक में बॉलीवुड की सबसे मशहूर हसीनाओं में से एक आशा पारेख की. 83 साल की इस हसीना ने आज तक शादी नहीं की. आशा पारेख जाने माने फिल्म डायरेक्टर नसीर हुसैन के प्यार में गिरफ्त में थीं, जो शादीशुदा थे और आमिर खान के चाचा लगते थे . अपनी बायोग्राफी द हिट गर्ल में आशा ने खुलासा किया कि उनकी जिंदगी का एकमात्र प्यार नासिर हुसैन ही थे.
‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ का किस्सा
आशा पारेख ने 1952 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की और चार दशकों तक सिनेमा पर राज किया . उनकी फिल्म ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ (1978) सुपरहिट रही, जिसमें उन्होंने हीरो की दूसरी पत्नी तुलसी का किरदार निभाया था. इस फिल्म की सफलता इतनी जबरदस्त थी कि महिलाएं आशा पारेख को ‘तुलसी’ कहकर खत लिखने लगीं . ज्यादातर महिलाएं पूछती थीं कि क्या वह असल जिंदगी में किसी की दूसरी पत्नी बनेंगी? इस पर आशा पारेख ने साफ जवाब दिया था, ‘मैं कभी किसी की सौतेन (दूसरी पत्नी) नहीं बनूंगी’ .
आशा पारेख ने अपनी फीलिंग्स के बावजूद, उन्होंने एक ऐसे रिलेशनशि को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया जो एक फैमिली को प्रभावित कर सकता था. उनका अविवाहित रहने का निर्णय दिल टूटने से नहीं, बल्कि सिद्धांतों से इंस्पायर था.
नसीर हुसैन से प्यार, लेकिन शादी क्यों नहीं की?
आशा पारेख ने अपनी बायोग्राफी ‘द हिट गर्ल’ में खुलासा किया कि उनकी जिंदगी में सिर्फ एक शख्स था और वह थे फिल्मकार नसीर हुसैन . उन्होंने कहा था, ‘हां, नसीर साहब ही एकमात्र व्यक्ति थे, जिनसे मैंने प्यार किया. अगर मैं अपनी जिंदगी के उन लोगों का जिक्र नहीं करूंगी जो मेरे लिए मायने रखते थे तो आत्मकथा लिखने का कोई मतलब नहीं था’.
‘किसी के घर को तोड़ना नहीं चाहती’
नसीर हुसैन शादीशुदा थे और उनके बच्चे थे. आशा पारेख ने कभी उनसे शादी करने के बारे में नहीं सोचा क्योंकि वह किसी के घर को तोड़ना नहीं चाहती थीं . उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, ‘अकेले रहना शायद मेरे द्वारा लिए गए सबसे अच्छे फैसलों में से एक था. मैं एक शादीशुदा आदमी से प्यार करती थी और होमब्रेकर नहीं बनना चाहती थी. मैं कभी उनके परिवार को तोड़ने और उनके बच्चों को आघात पहुंचाने के बारे में नहीं सोच सकती थी.’
नसीर हुसैन की पत्नी से थे अच्छे संबंध
दिलचस्प बात यह है कि आशा पारेख के नसीर हुसैन की पत्नी आयशा खान के साथ बेहद अच्छे संबंध थे . आयशा को उनके रिश्ते के बारे में पता था और उन्होंने आशा को सोने की चूड़ियां भी भेंट की थीं. आशा ने कहा था, ‘मेरे और नसीर साहब के परिवार के बीच कभी कोई बुरी भावना नहीं थी.’
आशा पारेख-नासिर हुसैन की कहानी किसी स्कैंडल की नहीं, बल्कि शांत शक्ति की है. उन्होंने कभी शादी नहीं की और जब उनसे पूछा गया कि क्यों, तो उन्होंने अक्सर नासिर हुसैन के प्रति अपने प्रेम और किसी भी चीज से कम पर समझौता न करने की अनिच्छा की ओर इशारा किया.
अमेरिका में मिला झटका
आशा पारेख ने एक बार शादी के करीब आने की बात भी कबूल की थी . उन्होंने बताया, ‘मैं एक बार अमेरिका के एक प्रोफेसर से शादी के बहुत करीब थी. मैं उनसे मिलने गई थी और हम रात 2 बजे एक कैफे में थे, जब उन्होंने मुझसे बेरुखी से कहा, ‘मेरी एक गर्लफ्रेंड है और तू आड़े आ गई’ . यह उनके लिए शादी के मामले में आखिरी झटका था .
आज कैसे गुजरता है वक्त?
आशा पारेख आज 83 साल की हैं और अपनी करीबी दोस्तों हेलन और वहीदा रहमान के साथ घूमने का आनंद लेती हैं . हेलन की वजह से उनके सलमान खान के परिवार से भी अच्छे संबंध हैं. उन्होंने एक बार मजाक में कहा था, ‘शादियां भगवान कराते हैं, लेकिन शायद वह मेरी करना भूल गए’.
कौन थे नासिर हुसैन
नासिर हुसैन एक प्रमुख भारतीय फिल्म निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक थे. उन्होंने अपना करियर 1948 में फिल्मिस्तान स्टूडियो में लेखक के रूप में शुरू किया, जहां उन्होंने अनारकली, मुनिमजी और पेइंग गेस्ट जैसी फिल्मों की पटकथा लिखी. 1957 में उन्होंने अपनी पहली निर्देशित फिल्म तुमसा नहीं देखा बनाई, जिसने शम्मी कपूर को स्टार बनाया. इसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी नासिर हुसैन फिल्म्स शुरू की और 1960-70 के दशक में कई सुपरहिट फिल्में दीं, जैसे जब प्यार किसी से होता है, फिर वही दिल लाया हूं, तीसरी मंजिल , कारवां , यादों की बारात और हम किसी से कम नहीं. वे हिंदी सिनेमा में मसाला फिल्म और रोमांटिक-म्यूजिकल टेम्पलेट के जनक माने जाते हैं. उन्होंने आशा पारेख, शम्मी कपूर जैसे सितारों को लॉन्च किया था. 13 मार्च साल 2002 को वह दुनिया को अलविदा कह गए थे.