शीतलापुर का अर्जुन गुप्ता: बैंगन की खेती कर कमाया मुनाफा
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शीतलापुर के अर्जुन गुप्ता ने पारंपरिक खेती छोड़कर प्रगतिशील सब्जी खेती अपनाई है. कम जमीन से शुरू होकर आज उनके पास 12 कट्ठा जमीन है, जहां वे खासकर बैगन और भिंडी की खेती करते हैं. उनके उत्पाद की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ मिल रहा है. अर्जुन गुप्ता की मेहनत और अनुभव उन्हें जिले के सफल किसानों में गिनाता है.
महराजगंज. ये जिला अपने खास भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है, तराई क्षेत्र में स्थित यह जिला कृषि के दृष्टिकोण से बहुत ही उर्वर माना जाता है, जहां पर अलग-अलग प्रकार के फसलों की खेती की जाती है. महराजगंज जिले के किसानों की बात करें तो यहां पर ज्यादातर किसान पारंपरिक खेती जिसमें धान, गेहूं और गन्ने की खेती करते हैं तो वहीं कुछ किसान ऐसे भी है जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर प्रगतिशील खेती की ओर भी आगे बढ़ रहे हैं. ऐसे ही महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र के शीतलापुर के एक किसान है जिन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सब्जी की खेती शुरू की है. जिले के शीतलापुर के रहने वाले अर्जुन गुप्ता एक ऐसे किसान हैं जो शिक्षित युवा है और एक प्रगतिशील किसान भी है जो खासकर बैगन की खेती करते हैं. अर्जुन गुप्ता की बात करें तो वह बीते पांच सालों से सब्जी की खेती कर रहे हैं और खुद के मेहनत के भरोसे अच्छी कमाई भी कर रहे हैं.
बीएससी की पढ़ाई में हुई दिक्कत तो किया बीए
अर्जुन गुप्ता ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने पहले दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई की जिसके बाद उन्होंने बीएससी करने के लिए दाखिला लिया. लेकिन बीच में कुछ समस्या होने के बाद उन्होंने बीएससी की पढ़ाई छोड़कर बीए में दाखिला लिया. उन्होंने पढ़ाई के बाद नौकरी को अपना करियर ना बनाकर प्रगतिशील खेती की ओर अपना ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने बताया कि शुरुआती समय में उन्होंने बहुत ही कम जमीन पर सब्जी की खेती शुरू की थी, लेकिन जैसे-जैसे अनुभव बढ़ने लगा तो उन्होंने अपने सब्जी की खेती के दायरे को बढ़ाया और आज के समय की बात करें तो उनके पास बारह कट्ठा जमीन है, जिस पर वह खेती कर रहे हैं. अर्जुन गुप्ता एक ऐसे किसान हैं जिन्होंने कम जमीन पर खेती शुरू की और आज के समय में वह एक सफल किसान के रूप में अपनी पहचान बन चुके हैं.
बाजारों में होती है उनके सब्जियों के अच्छे डिमांड
अर्जुन गुप्ता महराजगंज जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसान हैं, जो खासकर बैंगन और भिंडी की खेती प्रमुखता से करते हैं. इन क्षेत्रों में सब्जियों की मांग बाजारों में अच्छी होती है, जिससे यहां के किसानों को सब्जी की खेती से अच्छा आर्थिक लाभ मिलता है. उन्होंने बताया कि खेत में सब्जी तैयार हो जाने के बाद ज्यादातर खरीदार लोग खेत में ही सब्जी खरीदने के लिए आ जाते हैं जो बाजारों में ले जाकर फुटकर में भेजते हैं. इसके अलावा बाकी बचे सब्जियों को वह खुद बाजार में ले जाकर बेचते हैं जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा भी मिलता है. ऐसे में उत्पादन के साथ-साथ उनका सप्लाई चैन भी बना हुआ है, जिसकी वजह से सब्जियां बेकार नहीं होती हैं और बाजारों में बिक भी जाती है जिससे उन्हें आर्थिक फायदा मिलता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें