आईपीएल से पहले धोनी को राहत…बीसीसीआई एथिक्स ऑफिसर ने शिकायतों को किया खारिज, हितों के टकराव से जुड़ा है मामला

Share to your loved once


होमखेलक्रिकेट

आईपीएल से पहले धोनी को राहत…बीसीसीआई एथिक्स ऑफिसर ने शिकायतों को किया खारिज

Last Updated:

MS Dhoni of conflict of interest allegations: बीसीसीआई एथिक्स ऑफिसर जस्टिस अरुण मिश्रा ने महेंद्र सिंह धोनी के खिलाफ ‘हितों के टकराव’ की शिकायत खारिज कर दी है. अदालत ने माना कि आईपीएल खिलाड़ी होना और क्रिकेट अकादमी चलाना नियमों का उल्लंघन नहीं है. फैसले में स्पष्ट किया गया कि यह शिकायत व्यक्तिगत रंजिश और व्यावसायिक विवाद का नतीजा थी.

आईपीएल से पहले धोनी को राहत...बीसीसीआई एथिक्स ऑफिसर ने शिकायतों को किया खारिजZoom

आईपीएल के 19वें एडिशन से पहले धोनी को बड़ी राहत.

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी के लिए आईपीएल से पहले अच्छी खबर आई है. बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर जस्टिस अरुण मिश्रा (रिटायर्ड) ने धोनी के खिलाफ दायर ‘हितों के टकराव’ की शिकायत को पूरी तरह खारिज कर दिया है.इस फैसले के साथ ही आईपीएल में धोनी की भागीदारी और उनकी क्रिकेट अकादमियों को लेकर चल रहे विवादों पर पूर्णविराम लग गया.

फरवरी 2024 में एक शिकायतकर्ता द्वारा धोनी के खिलाफ याचिका दायर की गई थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि धोनी एक तरफ ‘सक्रिय खिलाड़ी’ (आईपीएल में सीएसके के लिए) हैं और दूसरी तरफ ‘M/s आरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए क्रिकेट अकादमी के मालिक भी हैं. शिकायतकर्ता के अनुसार, यह बीसीसीआई के नियम 38(4)(a) और 38(4)(p) का सीधा उल्लंघन था. साथ ही धोनी पर 2018 में संशोधित नियमों के तहत अनिवार्य खुलासे न करने का भी आरोप लगाया गया था.

आईपीएल के 19वें एडिशन से पहले धोनी को बड़ी राहत.

जस्टिस मिश्रा ने अपने विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि धोनी के खिलाफ कोई भी ठोस मामला नहीं बनता है. फैसले के प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं:

नियमों से पुराना अनुबंध: आदेश में कहा गया कि धोनी और आरका स्पोर्ट्स के बीच समझौता 2017 में हुआ था, जबकि बीसीसीआई के हितों के टकराव संबंधी कड़े नियम सितंबर 2018 में लागू हुए. पुराने समझौतों पर इन नियमों को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता.

निर्णायक शक्ति का अभाव: एथिक्स ऑफिसर ने पाया कि धोनी केवल एक खिलाड़ी के रूप में आईपीएल में भाग ले रहे हैं. उनके पास बीसीसीआई या आईपीएल के भीतर ऐसी कोई ‘संस्थागत नियंत्रण’ या ‘निर्णय लेने वाली शक्ति’ नहीं है, जिससे वे खेल के प्रशासन को प्रभावित कर सकें.

पक्षपात के सबूत नहीं: फैसले में जोर दिया गया कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि अकादमी के मालिक होने के नाते धोनी ने किसी खिलाड़ी या चयन प्रक्रिया में कोई ‘पक्षपात, पूर्वाग्रह या विशेष व्यवहार’ किया है.

‘निजी खुन्नस’ का लगा आरोप
हैरानी की बात यह रही कि जस्टिस मिश्रा ने अपनी टिप्पणी में शिकायतकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाए. आदेश में कहा गया कि यह शिकायत किसी क्रिकेट हित के बजाय ‘निजी रंजिश’ और ‘व्यावसायिक विवाद’ का परिणाम लगती है. शिकायतकर्ता इस मंच का उपयोग किसी तीसरे पक्ष के विवाद को सुलझाने के लिए नहीं कर सकता. ऐसा प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता का प्रतिवादी (धोनी) के साथ व्यक्तिगत हिसाब चुकता करना चाहता है, क्योंकि उसे व्यावसायिक घाटा हुआ था.’

धोनी की आईपीएल साख बरकरार
चेन्नई सुपर किंग्स को पांच बार आईपीएल खिताब जिताने वाले महेंद्र सिंह धोनी के लिए यह फैसला एक बड़ी जीत है. बीसीसीआई एथिक्स ऑफिसर ने स्पष्ट कर दिया कि बिना किसी प्रशासनिक पद के केवल एक खिलाड़ी के रूप में खेलना हितों के टकराव की श्रेणी में नहीं आता. इस फैसले ने न केवल धोनी की छवि को बेदाग रखा है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि भविष्य में किसी भी खिलाड़ी के खिलाफ ऐसी शिकायतों के लिए ठोस सबूतों और प्रशासनिक दखल का होना अनिवार्य है.

About the Author

Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP