चांद से मिट्टी लाएगा भारत, 25 नहीं अब 350 किलो का होगा रोवर, चंद्रयान-5 के लिए इसरो का ‘बाहुबली’ प्लान तैयार
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इसरो चीफ वी. नारायणन ने चंद्रयान-4 और 5 के मेगा प्लान का खुलासा किया है. चंद्रयान-4 चांद से सैंपल लाएगा, जबकि चंद्रयान-5 में 350 किलो का भारी रोवर होगा जो 100 दिनों तक काम करेगा. भारत अब मंगल पर लैंडिंग और शुक्र मिशन के साथ-साथ 2040 तक चांद पर मानव भेजने की तैयारी में जुट गया है.

चांद से मिट्टी और पत्थर लाएगा भारत, चंद्रयान 4 का बड़ा प्लान (AI Photo)
नई दिल्ली: इसरो (ISRO) अब चांद पर तिरंगा लहराने के बाद वहां से मिट्टी और पत्थर लाने की तैयारी में है. इसरो चीफ वी. नारायणन ने बुधवार को भारत के भविष्य के मून मिशन्स यानी चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 का पूरा खाका दुनिया के सामने रख दिया है. स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी अवेयरनेस ट्रेनिंग (START 2026) के दौरान उन्होंने बताया कि भारत का अगला लक्ष्य चांद से सैंपल कलेक्ट करके उन्हें सुरक्षित धरती पर वापस लाना है. यह मिशन भारत की अंतरिक्ष शक्ति को एक नए लेवल पर ले जाएगा. आइए जानते हैं कि चंद्रयान-4 और 5 में क्या खास होने वाला है.
चंद्रयान-4 चांद से मिट्टी लेकर धरती पर लौटेगा
इसरो चीफ के मुताबिक, चंद्रयान-4 का सबसे बड़ा मकसद चांद की सतह से नमूने (Samples) इकट्ठा करना और उन्हें वापस पृथ्वी पर लाना है. यह एक बेहद जटिल मिशन होगा क्योंकि इसमें न केवल चांद पर लैंडिंग करनी होगी, बल्कि वहां से टेक-ऑफ करके वापस धरती के वायुमंडल में प्रवेश भी करना होगा. अभी तक दुनिया के गिने-चुने देश ही ऐसा कर पाए हैं. इस मिशन के सफल होने से वैज्ञानिकों को चांद की संरचना को और गहराई से समझने में मदद मिलेगी.
चंद्रयान-5 में क्या अलग और खास होने वाला है?
चंद्रयान-5 को लेकर इसरो चीफ ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने बताया कि जहां चंद्रयान-3 का लैंडर केवल 14 दिनों तक सक्रिय रहा था, वहीं चंद्रयान-5 को करीब 100 दिनों के मिशन लाइफ के लिए डिजाइन किया जा रहा है. इसका मतलब है कि भारत का यान चांद की लंबी रातों को झेलने में सक्षम होगा और वहां ज्यादा समय तक रिसर्च कर सकेगा. यह मिशन इसरो की तकनीकी मजबूती का एक बड़ा प्रमाण होगा.
25 किलो से अब 350 किलो का भारी-भरकम रोवर
तकनीकी बदलावों की बात करें तो अगले मिशन्स में रोवर का वजन काफी बढ़ जाएगा. चंद्रयान-3 का प्रज्ञान रोवर सिर्फ 25 किलो का था, लेकिन भविष्य के मिशन में 350 किलो का भारी-भरकम रोवर भेजने की योजना है. यह भारी रोवर अपने साथ ज्यादा और एडवांस वैज्ञानिक उपकरण (Payloads) ले जा सकेगा. इससे चांद की सतह पर लंबी दूरी तय करना और बड़े लेवल पर खुदाई या एनालिसिस करना आसान हो जाएगा.
मंगल और शुक्र के लिए क्या है इसरो का प्लान?
नारायणन ने मंगल और शुक्र (Venus) को लेकर भी बड़ी अपडेट दी है. उन्होंने बताया कि मंगलयान की सफलता के बाद अब इसरो ‘मार्स लैंडिंग मिशन’ पर काम कर रहा है. यानी अब भारत का यान मंगल की जमीन पर उतरेगा. इसके साथ ही ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन’ पर भी चर्चा जारी है. भारत 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चांद पर उतारने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें