अंग्रेजों की बसाई मार्केट, आज भी है बड़ा बाजार
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1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने गोमती नदी के दक्षिण में सुल्तानपुर शहर को बसाया और उसी दौरान ब्रिटिश कलेक्टर जे. पार्किंस के नाम पर पार्किंसगंज मोहल्ले की स्थापना हुई. कभी यहां अंग्रेज अधिकारी खरीदारी करते थे, आज यह सुल्तानपुर का प्रमुख और व्यस्त बाजार बन चुका है.
सुल्तानपुर. ये जिला प्राचीन काल से ही महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन गोमती नदी के दक्षिण दिशा में बसाया गया सुल्तानपुर अंग्रेजों की ही देन है. यही वजह है कि आज भी यहां पर कई ऐसी ब्रिटिश कालीन इमारतें और संरचनाएं मौजूद हैं, जो ब्रिटिश हुकूमत की गवाही देती हैं यहां तक की कुछ में अभी भी जिले के सरकारी विभागों का संचालन किया जाता है. इसी तरह सुल्तानपुर में कई ऐसे मोहल्लें भी अंग्रेजों ने बसाए है जो आज तक लोगों की आबादी का एक महत्वपूर्ण स्थल बन गए हैं. उसी में एक मोहल्ला पार्किंसगंज है, जो ब्रिटिश हुकूमत के देन माना जाता है, जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कि पार्किंसगंज अधिकारी के नाम पर रखा गया.
यह है इतिहास
वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि सुल्तानपुर शहर का नाम जो कभी कंपू हुआ करता था तब ब्रिटिश अधिकारियों ने इस मोहल्ले को बसाया. वर्तमान सुल्तानपुर इसको मूल रूप से बसाने का काम ब्रिटिश हुकूमत ने किया, 1857 के विद्रोह के बाद वर्तमान सुल्तानपुर को गोमती नदी के दक्षिण दिशा में अंग्रेजों ने बसाया, उस समय सुल्तानपुर जिले के ब्रिटिश कलेक्टर जे पार्किंस हुआ करते थे. उन्होंने यहीं पर एक पार्किंसगंज मोहल्ला डेवलप किया. यहां पर स्थानीय निवासियों को अंग्रेजों ने जमीनें दी और लोगों ने अपने घर और दुकानें बनाई. इसके साथ ही धीरे-धीरे पार्किंसगंज एक मॉडर्न मार्केट के रूप में परिवर्तित हुई और तभी से इसे पार्किंसगंज के रूप में आज तक जाना जाता है. इस मोहल्ले का अस्तित्व 1857 की क्रांति के बाद माना जाता है.
हुआ करती थी दुकानें
विक्रम सिंह आगे बताते हैं कि यहां पर ऐसी बड़ी-बड़ी और डेवलप दुकाने हुआ करती थी, जहां पर ब्रिटिश अधिकारी और कर्मचारी खरीदारी किया करते थे. इन दुकानों में परचून की दुकान, जनरल स्टोर,विषातखाना आदि हुआ करता थी. वहीं अगर हम वर्तमान पार्किंसगंज मोहल्ले की स्थिति की बात करें तो यह सुल्तानपुर के घंटाघर चौक क्षेत्र के आसपास का मोहल्ला माना जाता है.
वर्तमान में है यह स्थिति
यहां पर इस समय किराना की दुकानें, कपड़े की दुकान, जूते चप्पल की दुकान, हार्डवेयर, इलेक्ट्रिकल सामान, अलमारी- बक्सा बनाने की दुकान, आभूषण की दुकानें आदि स्थित हैं. जहां पर सिर्फ सुल्तानपुर के ही लोग नहीं बल्कि आसपास के पड़ोसी जिलों के लोग भी खरीददारी करने के लिए आते हैं. इसके साथ ही पार्किंसगंज मोहल्ले में आवासीय मकान में बने हैं, जहां पर एक घनी आबादी निवास कर रही है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें