Ishan Kishan reaction to Kirti Azad statement: आईसीसी टी20 विश्व कप में धूम मचाने के बाद टीम इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान का पटना में जोरदार स्वा
नई दिल्ली: टी20 विश्व कप 2026 में धमाल मचाने के बाद टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी ईशान किशन का पटना में जोरदार स्वागत हुआ. एयरपोर्ट से बाहर आते ही ईशान को मीडिया और फैंस ने घेर लिया. इस दौरान ईशान किशन से टी20 विश्व कप में उनके अनुभव के बारे में पूछा गया. साथ ही उनसे एक सवाल कीर्ति आजाद के उस बयान को लेकर पूछ लिया गया, जिसमें पूर्व क्रिकेटर ने टीम इंडिया, सूर्यकुमार यादव और जय शाह की आलोचना की है.
हालांकि, ईशान किशन कीर्ति आजाद के बयान पर रिएक्शन देने से बचे और उन्होंने कहा, “इतना अच्छा वर्ल्ड कप जीता, अच्छा सवाल पूछिए. कीर्ति आदाज क्या बो,ले इसमें मैं क्या कहूं. अच्छा सवाल पूछिए.” इतना कहने के बाद ईशान किशन समर्थकों का आभिवादन करते हुए अपने घर के लिए निकल गए.
ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर हुआ है विवाद
टीम इंडिया के विश्व कप जीतने के पर एक तरफ जहां पूरे देश में जश्न का माहौल था तो दूसरी ओर पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी के सासंद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट डालकर टीम इंडिया की आलोचना कर दी. दरसअल टीम फाइनल के बाद कप्तान सूर्या आईसीसी चीफ जय शाह के साथ विश्व कप की ट्रॉफी को लेकर हनुमान मंदिर गए थे. इसी बात को लेकर कीर्ति आजाद ने अपनी नाराजगी जाहिर की है.
कीर्ति आजाद ने क्या कहा है?
कीर्ति आजाद ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “शर्म करो इंडिया टीम इंडिया, जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्म के लोग थे. हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत-हिंदुस्तान लाए थे. अभी भारतीय क्रिकेट टीम की ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? अगर मंदिर लेकर गए तो मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?”
SHAME ON TEAM INDIA! 😡
When we won the World Cup under Kapil Dev in 1983, we had Hindu Muslim Sikh and Christian in the team.
We brought the trophy to our religious birth place our motherland India Bharat Hindustan
Why The Hell Is The Indian Cricket Trophy is being Dragged.…
अपने पोस्ट में कीर्ति आजाद ने आगे लिखा, “यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है, सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं. सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए. संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए. संजू ने इसमें अहम भूमिका निभाई और वह टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे. यह ट्रॉफी हर धर्म के 1.4 अरब भारतीयों की है. किसी एक धर्म की जीत का जश्न मनाने की जगह नहीं.”