अंग्रेजी साहित्य में क्यों कम हो रही बच्चों की रूचि? PG कॉलेज के प्रोफेसर ने बताए रोजगार और कोर्स से जुड़े कारण
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अब देखा जा रहा है कि अंग्रेजी साहित्य में छात्रों की रूचि कम होती जा रही है और शायद यही कारण है कि पीजी कॉलेजों में इस विषय में एडमिशन भी कम हो गए हैं. अंग्रेजी विभाग के प्रभारी डॉ. रविशंकर सिंह का कहना है कि अब सीटें भरना भी चुनौती हो रही है.
गाजीपुर: गाजीपुर के पीजी कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य (English Literature) विषय में छात्रों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. अंग्रेजी विभाग के प्रभारी डॉ. रविशंकर सिंह का कहना है कि कुछ साल पहले तक एक कक्षा में (पीजी कोर्सेज ) में औसतन 70 से 80 छात्र हुआ करते थे, लेकिन अब यह संख्या घटती जा रही है. वहीं सीटें भरना अब चुनौती साबित हो रही है.
डॉ. रविशंकर अंग्रेजी (विभाग के प्रभारी) बताते हैं कि अंग्रेजी साहित्य एक गहन अध्ययन वाला विषय है, जिसमें काफी पढ़ाई करनी पड़ती है. यही कारण है कि कई छात्र इसे कठिन विषय मानते हैं. इसके अलावा छात्रों के बीच यह धारणा भी बन गई है कि अंग्रेजी साहित्य सीधे तौर पर जॉब ओरिएंटेड नहीं है. इसी वजह से आजकल छात्र ऐसे विषयों की ओर ज्यादा जा रहे हैं, जहां उन्हें रोजगार के अवसर जल्दी मिलने की उम्मीद होती है.
इन क्षेत्रों में रोजगार के कई अवसर
हालांकि डॉ. रविशंकर का मानना है कि अंग्रेजी भाषा का महत्व आज भी बहुत बड़ा है. उनका कहना है कि अंग्रेजी भले ही विदेशी भाषा हो, लेकिन आज के दौर में यह वैश्विक संवाद की भाषा बन चुकी है. अगर कोई छात्र अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ बना लेता है, तो उसके लिए कॉल सेंटर, कॉर्पोरेट सेक्टर, मीडिया, कंटेंट राइटिंग, ट्रांसलेशन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में रोजगार के कई अवसर उपलब्ध हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत अंग्रेजी को कम्यूनिकेटिव इंग्लिश या वोकेशनल इंग्लिश के रूप में पढ़ाया जाए और इसे स्किल आधारित पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाए, तो छात्रों की संख्या फिर से बढ़ सकती है. इससे छात्रों को भाषा सीखने के साथ-साथ रोजगार के बेहतर अवसर भी मिल सकते हैं.
अंग्रेजी साहित्य की आधुनिक जरूरत
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंग्रेजी साहित्य को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़ा जाए, जैसे कंटेंट क्रिएशन, मीडिया, अनुवाद और डिजिटल कम्युनिकेशन, तो यह विषय एक बार फिर छात्रों के बीच लोकप्रिय हो सकता है. फिलहाल पीजी कॉलेज में घटती संख्या यह संकेत देती है कि पारंपरिक विषयों को समय के साथ नए रूप में ढालने की जरूरत है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.