आलू की खुदाई के बाद तुरंत करें इस फसल की बुवाई! 90 दिन में तैयार, मुनाफा भी मिलेगा जबरदस्त
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Corn Farming Tips: आलू की खुदाई के बाद अपने खेतों को खाली छोड़ने के बजाय मक्का की अगेती बुवाई करना किसानों के लिए भारी मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि इस समय सही उन्नत किस्मों का चुनाव किया जाए, तो मात्र 90 दिनों में बंपर पैदावार ली जा सकती है. इस खबर में जानें कैसे मक्का की जल्दी बुवाई करना फसल को सुखाने की टेंशन से बचाता है और मानसून से पहले अच्छी कमाई भी दिला सकता है.
फिरोजाबाद: किसान भाई अगर आप कम लागत में अच्छी पैदावार और मुनाफा पाना चाहते हैं तो मक्का की खेती आपके लिए फायदे का सौदा बन सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आलू की खुदाई के ठीक बाद का समय मक्का की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. यदि किसान भाई समय रहते अगेती बुवाई करते हैं, तो न केवल फसल जल्दी तैयार होती है, बल्कि कटाई के बाद फसल को सुखाने की झंझट से भी मुक्ति मिल जाती है.
90 दिन में तैयार होगी फसल
फिरोजाबाद कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. ओमकार सिंह बताते हैं कि जायद के सीजन में अधिक पैदावार के लिए देरी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. आलू की खेत खाली होते ही मक्का लगा देनी चाहिए. मक्का की फसल लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है. हालांकि, गर्मियों के मौसम में खेतों में नमी तेजी से कम होती है, इसलिए सिंचाई का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है. यदि समय पर पानी नहीं दिया गया, तो पौधे सूख सकते हैं और दानों का विकास रुक सकता है. सही नमी बनाए रखने से ही मक्का का दाना अच्छा और चमकदार निकलता है.
बारिश से पहले कटाई, सुखाने का झंझट खत्म
अगेती बुवाई का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मानसून की बारिश शुरू होने से पहले ही किसान अपनी फसल काट लेते हैं. अक्सर जो किसान देरी से बुवाई करते हैं, उनकी फसल बारिश के सीजन में तैयार होती है. ऐसे में मक्का को सुखाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है और नमी के कारण मंडी में सही दाम नहीं मिल पाते. जल्दी पैदावार होने से किसान भाई आसानी से अपनी फसल सुखाकर मंडियों में बेच सकते हैं और समय से अपनी बचत सुरक्षित कर सकते हैं.
बुवाई के लिए उन्नत प्रजातियों का चयन
मक्का की अच्छी पैदावार काफी हद तक बीज की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. बाजार में कई हाइब्रिड और उन्नत प्रजातियां उपलब्ध हैं जो कम समय में ज्यादा वजन देती हैं. कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ प्रमुख प्रजातियों के नाम सुझाए हैं, जिनमें डेकाल्व 8209, पायनियर 1899, प्रोएग्रो 345 और प्रभात गजनी जैसी किस्में शामिल हैं. इन बीजों के चयन से रोग लगने की संभावना कम रहती है और दानों की क्वालिटी भी बेहतर होती है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी सुनिश्चित होती है.
खेती के लिए वैज्ञानिक सलाह और सावधानियां
डॉ. सिंह का कहना है कि किसानों को बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए और वैज्ञानिक विधि से ही खाद का प्रयोग करना चाहिए. गर्मियों में लू और तेज धूप से बचाव के लिए खेत की मेड़ों पर ध्यान देना और खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी है. यदि किसान भाई इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो मक्का की खेती उनके लिए इस सीजन का सबसे सफल निवेश साबित हो सकती है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें