ईरान युद्ध के बीच चीन को लेकर भारत सरकार का बड़ा फैसला, डॉलर संग युआन की होगी बारिश
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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत सरकार ने चीन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने चीन से आने वाले एफडीआई यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की शर्तों में कई तरह की ढील को मंजूरी दे दी है. इससे फैसले के बाद भारत में चीन प्रत्यक्ष निवेश के रास्ते साफ हो गए हैं. वर्ष 2020 में डोकलाम संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ी खाई पैदा हो गई थी. इस कारण भारत सरकार ने चीन के साथ आर्थिक रिश्तों और चीनी निवेश को लेकर कई तरह की शर्तें लगा दी थी. हालांकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 130 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है.
रिश्तों में सुधार की यह कवायद 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी की रूस के कजान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई मुलाकात के बाद शुरू हुई. दोनों नेताओं की इस मुलाकात से कुछ समय पहले ही एलओसी से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवा और मानसरोवर यात्रा शुरू करने पर भी सहमति बनी. फिर पीएम नरेंद्र ने एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने चीन गए. पिछले दिनों भारत में आयोजित एआई समिट के घोषणा पत्र का चीन ने समर्थन दिया. इस तरह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली से जुड़े कई कदम उठाए गए हैं.
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