एसिड अटैक के केस पेंडिंग क्यों? CJI ने हाईकोर्ट से मांगा एक्शन प्लान, राज्यों को सुप्रीम कोर्ट की आखिरी चेतावनी

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एसिड अटैक के केस पेंडिंग क्यों? CJI ने हाईकोर्ट से मांगा एक्शन प्लान

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सीजेआई ने कहा कि निचली अदालतों में एसिट अटैक केस का निपटारा बहुत तेजी से होना चाहिए. इसके लिए हाईकोर्ट को एक टाइम लिमिट तय करनी होगी. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कई राज्यों की रिपोर्ट देखने के बाद यह आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि इस गंभीर मामले में बहुत प्रोएक्टिव अप्रोच अपनाने की जरूरत है.

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एसिड अटैक के केस पेंडिंग क्यों? CJI ने हाईकोर्ट से मांगा एक्शन प्लानZoom

सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने तेजाब हमले के मामलों पर सुनवाई की. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी उच्च न्यायालयों से कहा कि वे देश में तेजाब हमले के मामलों का तेजी से निपटारा करने के वास्ते निचली अदालतों के लिए समयसीमा तय करें. भारत के प्रधान न्यायधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने तेजाब हमले के मामलों के लंबित होने और वर्तमान स्थिति के बारे में कई उच्च न्यायालयों द्वारा दायर की गईं स्थिति रिपोर्ट पर गौर किया और कहा कि इस मामले में एक अधिक सक्रिय दृष्टिकोण की आवश्यकता है.

सीजेआई ने उच्च न्यायालयों से कहा कि वे तेजाब हमले के मामलों में मुकदमों की निगरानी का कार्य उच्च न्यायालय के उन न्यायाधीशों को सौंपें, जो निचली अदालतों के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं. शीर्ष न्यायालय ने सभी राज्यों को हरियाणा की निवासी और तेजाब हमले की शिकार शाहीन मलिक द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर आधारित दिशानिर्देशों का समय-समय पर पालन करने का अंतिम अवसर दिया.

हाईकोर्ट के जजों को मिली केस मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी
सीजेआई ने हाईकोर्ट को केस की मॉनिटरिंग का बड़ा टास्क दिया है. उन्होंने कहा कि इन केस की निगरानी प्रशासनिक जज ही करेंगे. ये जज निचली अदालतों के एडमिनिस्ट्रेटिव हेड होते हैं. इससे निचली अदालतों में चल रहे केस में बहुत तेजी आएगी. पेंडिंग मामलों का निपटारा एक फिक्स टाइम लिमिट के अंदर हो सकेगा.

राज्यों को गाइडलाइंस फॉलो करने का दिया आखिरी मौका
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी राज्यों को कड़ी चेतावनी दी है. कोर्ट ने शाहीन मलिक की पीआईएल पर कई गाइडलाइंस बनाई थीं. सभी राज्यों को इन गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा. कोर्ट ने साफ कहा कि यह राज्यों के पास एकदम आखिरी मौका है. स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट बहुत ज्यादा नाराज है. अब इन मामलों में किसी भी राज्य की लापरवाही बिल्कुल नहीं चलेगी.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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