किस संघर्ष से निकले वो 15 खिलाड़ी, जिन्होंने फिर वर्ल्डकप जिता दिया

IPL में पहले KKR और फिर मुंबई इंडियंस के साथ खेलते हुए सूर्या के करियर में क्रांति आई. 2021 में देर से ही सही, भारतीय टीम में एंट्री मिली, इसके बाद जो हुआ वह इतिहास बन गया. सूर्या टी-20 में दुनिया के नंबर -1 बल्लेबाज बने. मैदान पर चारों ओर शॉट लगाना उनकी मजबूती है. स्कूप, रैंप, अपर कट स्काई के फेवरेट शॉट हैं. 2024 में उन्होंने T20 विश्व कप के फाइनल में डेविड मिलर का कैच लेकर भारत को विश्व कप दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी, इस बार उन्होंने भारत को अपनी कप्तानी में वर्ल्डकप दिलाया है.
पंजाब के इस खिलाड़ी का जन्म 4 सितंबर 2000 को अमृतसर में हुआ था. उनके पिता का नाम राज कुमार शर्मा हैं जो खुद पूर्व क्रिकेटर रह चुके हैं. बचपन से ही क्रिकेट की प्रतिभा को पहचानकर पिता ने उन्हें क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया. उन्होंने पंजाब की अंडर-16 और अंडर-19 टीमों का प्रतिनिधित्व किया. अभिषेक आज भारतीय टीम में आक्रामक ओपनिंग बल्लेबाज के तौर पर पहचाने जाते हैं.
IPL 2024 में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए उनका प्रदर्शन अविश्वसनीय रहा, जिसमें उन्होंने 200 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे. हालांकि उन्हें पहचान अंडर-16 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी में लगाई गई पहली सेंचुरी से मिली थी. इसके बाद युवराज सिंह अभिषेक के मेंटर बने. 2017 में अभिषेक ने पंजाब के लिए फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था. आज अभिषेक टी-20 में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज हैं.
अभिषेक शर्मा
तेलंगाना के हैदराबाद में 8 नवंबर 2002 को जन्मे तिलक वर्मा के पिता नागा राजू इलेक्ट्रीशियन का काम करते थे. परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी बेहतर नहीं थी. 11 साल की उम्र में जब वह टेनिस बॉल से क्रिकेट खेल रहे थे तो कोच सलाम बायाश ने उन्हें देखा और परिवार को सपोर्ट किया. लगातार बेहतरीन खेल की बदौलत 2018-19 में उन्होंने हैदराबाद की रणजी टीम के लिए डेब्यू किया. वह 2020 वर्ल्डकप में भारत की अंडर-19 टीम का हिस्सा रहे. इसके बाद भारत-A के कप्तान भी बने. तिलक वर्मा भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर के मजबूत खिलाड़ी है. 2023 में उनका भारतीय टीम में पदार्पण हुआ था.
केरल के चंगनाचेरी में 11 नवंबर 1994 को जन्मे सैमसन भारतीय टीम के जीत के हीरो रहे हैं. उनके पिता विश्वनाथ सैमसन पुलिस कांस्टेबल हैं. संजू कहते हैं कि पिता के अनुशासन और बलिदानों ने उनकी क्रिकेट यात्रा को संभव बनाया. संजू ने केरल की अंडर-13, अंडर-16, अंडर-19 और सीनियर टीमों का प्रतिनिधित्व किया. वे विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं जिनकी कवर ड्राइव और पुल शॉट देखते ही बनती है.
वर्षों तक उन्हें राष्ट्रीय टीम में स्थान के लिए संघर्ष करना पड़ा. IPL में राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी में उन्होंने 2024 में खिताब जीता. उसी साल उन्होंने अंतरराष्ट्रीय T20I में शतक जड़कर अपनी श्रेष्ठता साबित की और तब से वे टीम के अभिन्न अंग हैं.

महाराष्ट्र के मुंबई में 1993 को जन्मे शिवम दुबे के पिता का नाम राजेश दुबे था, जो मूल रूप से यूपी के भदोही के रहने वाले हैं.मुंबई की सख्त और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट संस्कृति में उन्होंने खुद को साबित किया. बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज और दाएं हाथ के मध्यम-तेज गेंदबाज के रूप में उन्होंने मुंबई की घरेलू टीम में जगह बनाई. 2019 में पहली बार राष्ट्रीय टीम में शामिल हुए लेकिन उनका करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा.
चेन्नई सुपर किंग्स और एमएस धोनी के मार्गदर्शन में उन्होंने खुद को एक परिपक्व T20 विशेषज्ञ के रूप में ढाला. शिवम के बारे में कहा जाता है कि जब वह 14 साल के थे तो अपने वजन और आर्थिक कारणों की वजह से क्रिकेट को छोड़ दिया था. 19 साल की उम्र में उन्होंने फिर से चाचा के समर्थन में वापसी की और मुंबई U-23 में चुने गए.
18 जुलाई 1998 को पटना के बिहार में जन्मे ईशान किशन का बचपन झारखंड में जीता. पिता प्रणव कुमार पांडेय एक व्यवसायी हैं. ईशान बचपन से धोनी के प्रशंसक थे और झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन के उसी सिस्टम से गुजरे जिसने धोनी को तैयार किया. झारखंड की उम्र-वर्गीय और सीनियर टीमों में खेलने के बाद वे IPL में मुंबई इंडियंस के लिए विस्फोटक ओपनर बने.
2022 में बांग्लादेश के खिलाफ ODI क्रिकेट का सबसे तेज दोहरा शतक भी उनके नाम है. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025 में शानदार प्रदर्शन किया. इसमें उन्होंने 10 मैचों में 517 रनों के साथ टॉप स्कोरर रहते हुए झारखंड को पहली बार खिताब दिलाया. उनकी इस बल्लेबाजी को देखते हुए टीम में उन्हें जगह मिली और उन्होंने इसे साबित भी किया.
ईशान किशन के साथ उनकी गर्लफ्रेंड
गुजरात के सूरत शहर में जन्मे हार्दिक पांड्या बचपन में ही वड़ोदरा शिफ्ट हो गए थे. पिता हिमांशु पंड्या एक छोटी कार-फाइनेंस कंपनी चलाते थे. परिवार ने गंभीर आर्थिक तंगी झेली. हार्दिक ने कई इंटरव्यू में बताया है कि वह कैसे एक किराए के छोटे मकान में रहते थे, जमीन पर सोते थे. हार्दिक और उनके भाई क्रुणाल दोनों ने बड़ोदरा से रणजी ट्रॉफी खेली. मुंबई इंडियंस ने उन्हें अकादमी में लिया.
2015 में IPL डेब्यू के बाद 2016 में वह पहली बार भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेले. 2019 में गंभीर टखने की सर्जरी सहित कई चोटों ने उन्हें परखा, लेकिन हर बार वे वापस लौटे. 2024 T20 विश्व कप के फाइनल में सबसे जरूरी विकेट लेकर वे मैन ऑफ द मैच बने.इस बार भी वर्ल्डकप फाइनल में पंड्या ने कमाल किया
पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में अर्शदीप का 2001 में जन्म हुआ. उनके पिता का नाम दर्शन सिंह था जो सरकारी कर्मचारी थे. बचपन में मां साइकिल चलाकर इन्हें प्रैक्टिस के लिए लेकर जाती थीं. पंजाब की उम्र-वर्गीय और सीनियर घरेलू टीमों से गुजरते हुए वे IPL में पंजाब किंग्स के लिए डेथ-ओवर विशेषज्ञ बने.
बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज की सटीक यॉर्कर और दबाव में शांत रहने की कला उन्हें बेहद खास बनाती है. भारत के T20I आक्रमण में वे पहली पसंद हैं और 2024 विश्व कप विजेता टीम के अहम सदस्य थे. इस बार भी वर्ल्डकप फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने कमाल की गेंदबाजी की.

गुजरात के अहमदाबाद में जन्मे बुमराह के पिता का निधन बहुत पहले हो गया था. उनकी माँ दलजीत बुमराह, जो एक स्कूल की प्रधानाचार्या हैं ने अकेले सभी बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया. बुमराह ने कई बार इंटरव्यू में भावुक होकर अपनी मां के बलिदानों को याद किया. बुमराह के गेंदबाजी एक्शन से लेकर उनकी बॉलिंग एक अलग ही स्तर की है.
गुजरात की घरेलू टीम से मुंबई इंडियंस तक का सफर तय करने के बाद वे दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाज बने. पैर पर गिरती यॉर्कर, उछलती बाउंसर, और धीमी गेंद उनके सर्वश्रेष्ठ हथियार हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ बढ़िया गेंदबाजी कर मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीतने वाले बुमराह ने एक बार फिर ये साबित किया है.
भारतीय टीम से विश्व कप के लिए चुने गए हर्षित राणा का जन्म 2002 में दिल्ली में हुआ था. एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले हर्षित ने दिल्ली की उम्र-वर्गीय और घरेलू सर्किट से अपना सफर शुरू किया. IPL 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए उनकी तेज और आक्रामक गेंदबाजी ने उन्हें रातोरात सुर्खियों में ला दिया. 2024 के अंत में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और तेजी से भारतीय पेस अटैक का हिस्सा बन गए.
वर्ल्डकप 2026 के लिए टीम में उन्हें चुना गया, मगर घुटने की चोट की वजह से मो. सिराज को उनकी जगह लिया गया. सिराज का जन्म तेलंगाना के एक हैदराबादी मुस्लिम परिवार में हुआ था. उनके पिता ऑटो ड्राइवर थे, 2015-16 में सिराज ने रणजी डेब्यू किया और हैदराबाद के लिए 41 विकेट लिए थे. इसके बाद वह सनराइजर्स हैदराबाद फिर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए आईपीएल में खेले, अब वह गुजरात टाइटंस से जलवा दिखाएंगे.
वरुण चक्रवर्ती .
1991 को कर्नाटक के बीदर में जन्मे और चेन्नई के तमिलनाडु में पले बढ़े वरुण पेशे से आर्किटेक्ट थे. कई साल तक उन्होंने उसी क्षेत्र में काम किया. बीस के दशक के मध्य में उन्होंने पेशेवर क्रिकेट में करियर बनाने का फैसला किया. उनके परिवार में क्रिकेट की कोई विशेष पृष्ठभूमि नहीं थी. वे एक मिस्ट्री स्पिनर हैं. कैरम बॉल, गुगली, लेग-ब्रेक उनका हथियार हैं, जिन्हें बल्लेबाज कम पढ़ पाते हैं. तमिलनाडु की घरेलू टीम और KKR के लिए IPL में शानदार प्रदर्शन के बाद 2021 में उनका भारतीय टीम में पदार्पण हुआ. वे वर्तमान में दुनिया के नंबर-1 T20I गेंदबाज हैं.
उत्तर प्रदेश में कानपुर के पड़ोस यानी उन्नाव में जन्मे कुलदीप यादव भारत के चाइनामैन गेंदबाज हैं. उनके पिता राम सिंह यादव व्यवसायी थे. कुलदीप ने बताया है कि पिता ने क्रिकेट के खर्चे के लिए किस तरह आर्थिक त्याग किए. बाएं हाथ का चाइनामैन गेंदबाज होना क्रिकेट में बेहद दुर्लभ बात है. कानपुर में कोच कपिल पांडे ने उनकी इस अनूठी शैली को निखारा. उत्तर प्रदेश की घरेलू टीम से उभरे और 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ODI में हैट-ट्रिक लेकर सुर्खियां बटोरीं. कुछ उतार-चढ़ाव के बाद 2023 से उनका करियर फिर चमका और वे सभी फॉर्मेट में नियमित विकेट ले रहे हैं.

गुजरात के आणंद में जन्मे अक्षर पटेल इस विश्व विजेता टीम के उप कप्तान हैं, वे मध्यवमर्गीय गुजराती पिरवार से ताल्लुक रखते हैं. पिता सरकारी नौकरी में हैं, वह आणंद में ही पले बढ़े और गुजरात की विभिन्न आयु वर्गों वाली टीम का प्रतिनिधित्व किया. बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज और उपयोगी निचले क्रम के बल्लेबाज के रूप में वे पहले किंग्स एकादश पंजाब और फिर दिल्ली कैपिटल्स के लिए IPL में छाए रहे. भारत में टेस्ट मैचों में उनका रिकॉर्ड शानदार है. शुभमन गिल की अनुपस्थिति की वजह से इस बार उन्हें उप कप्तानी दी गई थी.
तमिलनाडु के चेन्नई में जनमे वॉशिंगटन सुंदर का जन्म 5 अक्टूबर 1999 को चेन्नई में हुआ. उनके पिता एम. सुंदर स्वयं तमिलनाडु के प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे हैं. यानी वॉशिंगटन उन चुनिंदा भारतीय राष्ट्रीय खिलाड़ियों में से हैं जो क्रिकेट की पारंपरिक विरासत वाले घर में पले-बढ़े. पिता ने बचपन से ही उनकी कोचिंग की.वे दाएं हाथ के ऑफ-स्पिनर और बाएं हाथ के उपयोगी बल्लेबाज हैं. पावरप्ले में उनकी किफायती गेंदबाजी उन्हें रणनीतिक दृष्टि से बेहद मूल्यवान बनाती है. 2021 में इंग्लैंड दौरे पर उनकी साहसी बल्लेबाजी भी यादगार रही. वे T20 स्क्वाड में बल्ले और गेंद दोनों से गहराई प्रदान करते हैं.

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में रहने वाले रिंकू सिंह की क्रिकेट जर्नी सबसे ज्यादा प्रेरणादायक है. उनका जन्म 12 अक्टूबर 1997 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ. उनके पिता खानचंद्र सिंह साइकिल पर गैस सिलिंडर की डिलीवरी करके परिवार का गुजारा करते थे. रिंकू ने कई इंटरव्यू में खुलकर बताया है कि कई बार घर में खाना नहीं होता था, आर्थिक तंगी में क्रिकेट किट तक बेचनी पड़ी, और पिता के किस हद तक बलिदान करने पड़े.
अलीगढ़ की स्थानीय क्रिकेट में खेलते हुए वे उत्तर प्रदेश की घरेलू टीम तक पहुँचे.
IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए उनका करियर इतिहास बन गया. IPL 2023 में यश दयाल की एक ओवर की आखिरी 5 गेंदों पर लगाए 5 लगातार छक्के पूरी दुनिया में वायरल हो गए. उस एक पारी ने उन्हें गुमनामी से राष्ट्रीय नायक बना दिया.भारतीय टीम में पदार्पण के बाद से वे दुनिया के सबसे विश्वसनीय फिनिशरों में शुमार हो गए हैं. इसी विश्व कप के दौरान रिंकू ने अपने पिता को खोया जो लिवर कैंसर से जूझ रहे थे. वह फिर टीम से जुड़े और ट्वेल्थ मैन के तौर पर योगदान दिया.