बुर्का और हिन्‍दू दोस्‍त संग हाथ में हाथ, रमजान के महीने में बेंगलुरु की सड़क पर निकली लड़की तो हो गया बवाल

Share to your loved once


होमताजा खबरcrime

बुर्का और हिंदू दोस्त संग हाथ में हाथ, रमजान में बेंगलुरु की सड़क पर मचा बवाल

Last Updated:

बेंगलुरु में बुर्का पहने महिला और उसके हिंदू दोस्त को बीच सड़क रोककर परेशान करने का मामला सामने आया है. पुरुषों की भीड़ ने महिला के दूसरे समुदाय के दोस्त के साथ घूमने और हाथ पकड़ने पर आपत्ति जताई. महिला ने स्पष्ट किया कि वे सहकर्मी हैं लेकिन भीड़ ने उसे बुर्का उतारने की धमकी दी. फिलहाल पुलिस इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की तैयारी कर रही है.

बुर्का और हिंदू दोस्त संग हाथ में हाथ, रमजान में बेंगलुरु की सड़क पर मचा बवालZoom

बेंगलुरु की घटना पर पुलिस ने संज्ञान लिया है. (AI Image)

बेंगलुरु की सड़कों पर सरेआम मोरल पुलिसिंग का मामला सामने आया है, जहां मजहब की दीवारें एक दोस्ती पर भारी पड़ गईं. बुर्का पहने एक महिला को सिर्फ इसलिए भीड़ के गुस्से और बेहूदा सवालों का सामना करना पड़ा क्योंकि उसका साथी दूसरे समुदाय से था. पवित्र रमजान महीने की दुहाई देते हुए कट्टरपंथी सोच वाले पुरुषों ने न केवल इस जोड़े को बीच रास्ते में रोका बल्कि महिला के चरित्र और उसके पहनावे पर भी तीखे प्रहार किए. वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि कैसे सहकर्मी होने की सफाई देने के बावजूद भीड़ ने महिला को सरेआम अपमानित किया और यहां तक कह डाला कि अगर उसे गैर-मजहब के दोस्त के साथ घूमना है तो वह अपना बुर्का उतार दे. हालांकि अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है लेकिन कानून के रखवाले इस नफरती घटना पर स्वतः संज्ञान लेने की तैयारी में हैं.

घटना के मुख्‍य प्‍वाइंट
·         समुदाय को लेकर आपत्ति: पुरुषों ने महिला से सवाल किया कि वह एक हिंदू व्यक्ति के साथ क्यों घूम रही है.

·         बुर्के पर टिप्पणी: आरोपियों ने रमजान के पवित्र महीने का हवाला देते हुए महिला द्वारा उस व्यक्ति का हाथ पकड़ने पर आपत्ति जताई.

·         कामकाजी साथी: महिला ने स्पष्ट किया कि वे दोनों एक ही जगह काम करते हैं और केवल साथ यात्रा कर रहे थे.

·         विवादित मांग: भीड़ ने महिला से कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर उसे उस व्यक्ति के साथ बाहर जाना है, तो उसे अपना बुर्का उतार देना चाहिए.

कानूनी विश्लेषण
·         निजता के अधिकार का हनन: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ घूमने और समय बिताने का अधिकार है. बीच सड़क पर किसी जोड़े को रोककर उनके रिश्ते पर सवाल उठाना सीधे तौर पर ‘राइट टू प्राइवेसी’ का उल्लंघन है.

·         मॉरल पुलिसिंग का बढ़ता खतरा: यह घटना दर्शाती है कि कैसे कुछ समूह खुद को ‘समाज का रक्षक’ मानकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला कर रहे हैं. विशेष रूप से अंतर-धार्मिक (Inter-faith) मित्रता को निशाना बनाना सामाजिक सद्भाव के लिए एक बड़ी चुनौती है.

·         पहनावे और मजहब का दबाव: भीड़ द्वारा महिला को यह कहना कि ‘दोस्त के साथ घूमना है तो बुर्का उतार दो’, छोटी सोच और धार्मिक कट्टरता का मिश्रण है. यह न केवल महिला की गरिमा पर प्रहार है बल्कि उसके चयन की स्वतंत्रता को भी बाधित करता है.

पुलिस की भूमिका हालांकि अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का ‘स्वतः संज्ञान’ (Suo Motu) लेने का विचार एक सकारात्मक कदम है. इससे समाज में यह कड़ा संदेश जाता है कि कानून हाथ में लेने वाले समूहों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

About the Author

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP