RN Ravi Appointed as Bengal Governer | स्टालिन को ‘मर्यादा’ समझाने वाले आर.एन. रवि अब बंगाल के राज्यपाल, ममता बोली- हमसे सलाह नहीं ली गई
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पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा सियासी फेरबदल हुआ है. राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे के बाद अब केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के गवर्नर आर.एन. रवि (R.N. Ravi) को बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया है. पूर्व आईपीएस अधिकारी रवि की कड़क स्वभाव से ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ सकती है. आइए जानते हैं खुफिया एजेंसी (IB) की दुनिया से लेकर राजभवनों तक हंगामा मचाने वाले इस सुपरकॉप गवर्नर की पूरी कहानी.

आर.एन. रवि बंगाल के नए राज्यपाल बने. (फाइल फोटो)
तामिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि (R.N. Ravi) को गुरुवार को पश्चिम बंगाल का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है. बंगाल में होने वाले 2026 विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनकी जगह केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया गवर्नर नियुक्त किया है. इस फैसले से नाराज सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र पर सीधा आरोप लगाया है कि यह सब राजनीतिक दबाव में बिना उनसे सलाह-मशविरा किए किया गया है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर आरएन रवि हैं कौन, जिनका इतना खौफ है?
3 अप्रैल 1952 को बिहार की राजधानी पटना में जन्मे रवींद्र नारायण रवि (R.N. Ravi) ने भौतिकी (Physics) में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. शुरुआत में कुछ समय पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने 1976 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जॉइन की और उन्हें केरल कैडर मिला. रवि कोई आम पुलिस अधिकारी नहीं रहे. उन्होंने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसियों सीबीआई (CBI) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में दशकों तक काम किया है. आईबी में रहते हुए वे जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर के विद्रोही गुटों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के मामलों के सबसे बड़े विशेषज्ञ माने जाते थे. 2012 में रिटायरमेंट के बाद 2014 में उन्हें जॉइंट इंटेलिजेंस कमेटी का चेयरमैन बनाया गया. 2018 में वे देश के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (Deputy NSA) के पद तक पहुंचे.
नागालैंड का शांतिदूत
आरएन रवि का राजनीतिक सफर बेहद एक्शन से भरपूर रहा है. केंद्र ने उन्हें नागा विद्रोही गुटों से बातचीत के लिए वार्ताकार (Interlocutor) बनाया था. वहां 2015 के ऐतिहासिक नगा शांति समझौते में उनकी अहम भूमिका रही. इसी शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के चलते उन्हें 2019 में नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया. 18 सितंबर 2021 को जब वे तमिलनाडु के गवर्नर बने, तो सीएम एमके स्टालिन और उनकी डीएमके (DMK) सरकार के साथ उनका जबरदस्त टकराव शुरू हो गया. रवि पर लगातार यह आरोप लगा कि वे चुनी हुई राज्य सरकार द्वारा पास किए गए बिलों को अपनी मेज पर रोक देते थे. विवाद इतना बढ़ा कि विधानसभा में उनके खिलाफ प्रस्ताव तक पास किया गया. सीएम स्टालिन ने उन्हें तानाशाह तक कह डाला.
अब बंगाल में क्या होगा?
एक तरफ ममता बनर्जी का तेज-तर्रार और आक्रामक रवैया, और दूसरी तरफ आरएन रवि जैसी सख्त शख्सियत. चुनाव से ठीक पहले एक इंटेलिजेंस बैकग्राउंड वाले पूर्व आईपीएस को बंगाल भेजना केंद्र सरकार का एक बड़ा रणनीतिक दांव माना जा रहा है. तमिलनाडु में स्टालिन से पंगा लेने वाले रवि अब बंगाल में ‘दीदी’ के लिए कितनी बड़ी मुसीबत बनेंगे, यह आने वाले कुछ महीनों में साफ हो जाएगा.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें