अमरूद की खेती के लिए मार्च है खास, जानिए तीन बार फलन और सही प्रूनिंग का तरीका

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अमरूद की खेती के लिए मार्च है खास, जानिए तीन बार फलन और सही प्रूनिंग का तरीका

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अमरूद के पौधों में वर्ष में तीन बार फूल और फल आते हैं. पहली बार फरवरी-मार्च में फूल लगते हैं और जून-जुलाई में फल आना शुरू होता है. दूसरी बार जून-जुलाई में फूल आते हैं, जिनके फल सर्दियों में तैयार होते हैं. तीसरे चरण को ‘हस्त बहार’ कहा जाता है.

पश्चिम चम्पारण: बिहार समेत देश के अधिकांश राज्यों में अमरूद की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. मार्च माह की शुरुआत के साथ ही विशेषज्ञ इस समय को अमरूद की बागवानी के लिए उपयुक्त मानते हैं. ऐसे में अमरूद की खेती करने वाले किसानों के लिए कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके.

साल में तीन बार होता है फलन
जिले के मझौलिया प्रखंड के बनकट मुसहरी गांव निवासी कृषक एवं शांभवी बायोटेक के संस्थापक रविकांत पांडे बताते हैं कि अमरूद के पौधों में वर्ष में तीन बार फूल और फल आते हैं. पहली बार फरवरी-मार्च में फूल लगते हैं और जून-जुलाई में फल आना शुरू होता है. दूसरी बार जून-जुलाई में फूल आते हैं, जिनके फल सर्दियों में तैयार होते हैं. तीसरे चरण को ‘हस्त बहार’ कहा जाता है, जिसमें सर्दियों में फूल लगते हैं और बसंत ऋतु में फल तैयार होते हैं.

पहले फलन से बचना है जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार पौधा रोपण के बाद पहली बार अधिक मात्रा में फल लेना उचित नहीं होता. इससे न तो पौधे की सेहत अच्छी रहती है और न ही फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है. इसलिए पहली बार जब फूलों के बाद फल बनने लगें तो उनकी समय पर प्रूनिंग (छंटाई) कर देनी चाहिए. इससे छोटे पौधों पर अधिक भार नहीं पड़ता और वे झुकने या टूटने से बच जाते हैं. वर्तमान मौसम में पहली बार फूल निकलने की शुरुआत होती है, इसलिए किसानों को सिंचाई और छंटाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

सही ढांचा और देखभाल जरूरी
पौधे के संतुलित विकास के लिए मुख्य तने से केवल तीन से चार प्राथमिक शाखाएं ही रखनी चाहिए. यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई शाखा दूसरी शाखा के ठीक ऊपर या नीचे न हो. यदि एक शाखा दूसरी पर छाया डालेगी तो नई फसल केवल ऊपरी हिस्से में ही आएगी और निचली शाखाएं कमजोर रह जाएंगी.

वैज्ञानिक तरीके से देखभाल जरूरी
इसके अलावा छंटाई के बाद कटे हुए स्थान पर बुझा हुआ चूना, कॉपर सल्फेट और पानी के मिश्रण का लेप लगाना चाहिए, ताकि संक्रमण से बचाव हो सके. विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करने पर अमरूद की खेती किसानों के लिए अधिक लाभदायक साबित हो सकती है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें

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