Aligarh Export Crisis | Iran Israel War Impact | ईरान-इजराइल युद्ध का अलीगढ़ पर असर
Aligarh Business Crisis: अलीगढ़ का एक्सपोर्ट सेक्टर, जो अभी अमेरिकी टैरिफ की मार से उबर ही रहा था, अब पश्चिम एशिया के युद्ध की भेंट चढ़ता दिख रहा है. ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स को ठप्प कर दिया है, जिससे अलीगढ़ से होने वाला करोड़ों का व्यापार अधर में लटक गया है. विदेशी बायर्स ने नए ऑर्डर लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं, जिससे जिले की औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन ठप होने की कगार पर है.
होली की खुशियों के बीच ‘बेरोजगारी’ का डर
फिलहाल अलीगढ़ की औद्योगिक इकाइयों में होली की छुट्टियां चल रही हैं और अधिकांश श्रमिक अपने घरों को गए हुए हैं. लेकिन यह शांति तूफान से पहले की खामोशी जैसी है. चिंता इस बात की है कि जब छुट्टियां खत्म होंगी और मजदूर वापस काम पर लौटेंगे, तो क्या उनके पास करने के लिए काम होगा? विदेशी खरीदारों से मिल रहे संकेतों ने उद्यमियों की रातों की नींद उड़ा दी है. उत्पादन का पहिया पटरी से उतरने की कगार पर है.
अलीगढ़ का हार्डवेयर और ताला उद्योग सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां से भारी मात्रा में निर्यात अमेरिका, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, रूस, यूक्रेन, पोलैंड, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और बुल्गारिया जैसे देशों को होता है. इसके अलावा खाड़ी देशों में भी अलीगढ़ के माल की जबरदस्त डिमांड रहती है. हाल ही में अमेरिकी टैरिफ की दिक्कतों के बाद बाजार संभलना शुरू ही हुआ था कि इस युद्ध ने दोबारा सब कुछ ठप कर दिया है.
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समुद्र में फंसा करोड़ों का माल, मिसाइलों का डर
युद्ध का सबसे घातक असर सप्लाई चेन पर पड़ा है. मुंबई बंदरगाह से शिपिंग लगभग बंद हो चुकी है. करोड़ों रुपये का माल कंटेनरों में भरकर समुद्री मार्ग से जा रहा था, जो अब बीच रास्ते में फंसा हुआ है. डर इस बात का है कि मिसाइलें अब मालवाहक जहाजों को भी निशाना बना रही हैं. निर्यातकों को यह समझ नहीं आ रहा कि जो माल रास्ते में है, वह खरीदार तक सुरक्षित पहुँचेगा या नहीं. इसकी कोई क्लीयरेंस नहीं मिल रही है और खरीदारों ने नए माल की डिलीवरी लेने से साफ मना कर दिया है.
बफर स्टॉक और कामगारों का संकट
तालानगरी, आगरा रोड, गूलर रोड और जीटी रोड पर स्थित सैकड़ों एक्सपोर्ट यूनिट्स में लाखों कामगार काम करते हैं. विदेशी खरीदारों ने नए ऑर्डर रोक दिए हैं और पुराने ऑर्डर को होल्ड पर डाल दिया है. ऐसे में निर्यातकों के सामने बड़ी चुनौती है ‘बफर स्टॉक’. निर्यातक कितना माल बनाकर स्टॉक में रख सकते हैं? अगर नया माल नहीं बनाया गया, तो फैक्ट्रियां बंद करनी पड़ेंगी, जिससे लाखों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा. गूलर रोड स्थित पैकेजिंग इंडस्ट्री से जुड़े योगेश गोस्वामी बताते हैं कि खाड़ी देशों के हालात का असली असर होली के बाद दिखेगा, जब उत्पादन प्रक्रिया दोबारा शुरू होनी होगी.
युद्ध प्रभावित देशों के हेल्पलाइन नंबर
अगर आपके सगे-संबंधी इन देशों में फंसे हैं या व्यापारिक कार्यों के लिए वहां मौजूद हैं, तो भारत सरकार द्वारा जारी इन नंबरों और ईमेल पर तुरंत संपर्क कर सकते हैं:
| देश | हेल्पलाइन नंबर | ईमेल आईडी |
| इजराइल (तेल अवीव) | +972-54-7520711, +972-54-2428378 | cons1.telaviv@mea.gov.in |
| ईरान (तेहरान) | +989128109115, +989128109109 | |
| सऊदी अरब (रियाद) | 800 247 1234 (Toll Free), +966-542126748 | cw.riyadh@mea.gov.in |
| UAE (अबू धाबी) | 800-46342, +971543090571 | ca.abudhabi@mea.gov.in |
| कतर (दोहा) | 00974-55647502 | cons.doha@mea.gov.in |
| ओमान (मस्कट) | 80071234 , +96898282270 | cw.muscat@mea.gov.in |
| इराक (बगदाद) | +964 771651 1185, +964 770444 4899 | cons.baghdad@mea.gov.in |
| कुवैत | +96565501946 | community.kuwait@mea.gov.in |
| फलस्तीन | +970592916418 | cons.ramallah@mea.gov.in |
| जॉर्डन | 00962-770 422 276 | |
| बहरीन | 00973-39418071 |