1910 का वो कानून, जिसने नोएडा-ग्रेटर नोएडा वालों की होली बदरंग कर दी, सारे ठेके पर लटक गए ताले
नोएडा/ग्रेटर नोएडा: रंगों की होली, ठंडाई की मस्ती और दोस्तों के साथ ठहाकों वाली शाम, यह सब नोएडा में इस बार थोड़ा फीका पड़ गया. गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने होली के दिन (4 मार्च) पूरे गौतम बुद्ध नगर जिले में ड्राई डे घोषित कर दिया. सभी शराब की दुकानें, बार, कैंटीन और एक्साइज लाइसेंस वाली हर जगह पर ताले लटक गए. वजह थी 116 साल पुराना ब्रिटिश कालीन कानून यूनाइटेड प्रोविंस एक्साइज एक्ट 1910. इस एक्ट के चैप्टर 9 की धारा 59 के तहत जिला मजिस्ट्रेट ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर यह कदम उठाया.
क्या-क्या बंद रहा?
मंगलवार को जारी आधिकारिक आदेश में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने साफ किया कि होली पर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी एक्साइज लाइसेंस वाली दुकानें 4 मार्च को पूरे दिन बंद रहेंगी. यह बंदी इन-इन कैटेगरी पर लागू हुई:
– देसी शराब की सभी दुकानें (ठेके)
– कंपोजिट शॉप्स
– रिटेल भांग की दुकानें
– प्रीमियम रिटेल दुकानें
– मॉडल शॉप्स (FL-6, FL-7, FL-9, 9A, 40, 41, 49 आदि कैटेगरी)
– मिलिट्री और पैरामिलिट्री कैंटीन
– होलसेल लाइसेंस (CL-2, FL-2, 2A, 2B)
– फार्मेसी, BIO-1/0 यूनिट, बॉन्ड लाइसेंस और जिले की सभी अन्य एक्साइज लाइसेंस वाली इकाइयां
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आदेश में साफ कहा गया कि यह बंद पूरे 24 घंटे के लिए रहेगा और किसी भी लाइसेंसी को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा. प्रशासन का तर्क है कि यह कदम किसी भी अनहोनी को रोकने और होली का शांतिपूर्ण उत्सव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया.
धारा 59 क्या कहती है
यूनाइटेड प्रोविंस एक्साइज एक्ट, 1910 (जिसे अब उत्तर प्रदेश एक्साइज एक्ट के नाम से जाना जाता है) ब्रिटिश राज में नशीले पदार्थों (शराब, भांग आदि) के नियंत्रण, उत्पादन, बिक्री और राजस्व के लिए बनाया गया था. एक्ट का मुख्य मकसद एक्साइज ड्यूटी इकट्ठा करना और नैतिकता बनाए रखना था, लेकिन धारा 59 ने जिला मजिस्ट्रेट को असाधारण शक्ति दी.
धारा 59 का मूल रूप, जैसा कि एक्ट में है
जिला मजिस्ट्रेट लाइसेंसी को लिखित नोटिस देकर यह आवश्यक कर सकता है कि किसी भी मादक पदार्थ (इंटॉक्सिकेंट) की बिक्री वाली दुकान को ऐसे समय या इतनी अवधि के लिए बंद रखा जाए, जितना वह सार्वजनिक शांति के संरक्षण के लिए आवश्यक समझे.
नोएडा के कई बार और ठेके मालिकों ने निराशा जताई. द बीयर कैफे के CEO राहुल सिंह ने कहा कि यह आम बात हो गई है. प्रशासन या सरकार जब चाहे ऐसा कर देती है और हमें कभी कोई भुगतान नहीं मिलता. हमारे ज्यादातर कैफे मॉल में हैं, जहां त्योहार पर मॉल बंद रहते हैं, इसलिए असर कम है. लेकिन छोटे ठेके चलाने वालों पर भारी पड़ता है.