होर्मुज स्ट्रेट ठप! भारत अफ्रीका घूमकर तेल लाएगा, लेकिन प्लान बी महंगा पड़ेगा
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होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल रास्ता ठप हो गया है. ईरान-अमेरिका-इजराइल के झगड़े ने जहाजों को रोक दिया, बीमा कंपनियां डर गईं. भारत, जो 85 फीसदी से ज्यादा तेल बाहर से लाता है, अब मुश्किल में फंस गया है. प्लान बी तैयार है– अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से लंबा चक्कर काटकर तेल मंगाना!

भारत ने तेल की सप्लाई के लिए प्लान बी तैयार कर लिया है. (Image:Reuters)
नई दिल्ली. हाल ही में अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने जवाब दिया तो होर्मुज का संकरा रास्ता एकदम ठप हो गया. बड़े-बड़े टैंकर फंस गए, जहाज रुक गए और बीमा कंपनियां डर के मारे कवर देने से मना कर रही हैं. ईरान की सेना ने साफ कह दिया है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को खतरा है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से निकलता है. भारत जैसे देश जो रोज तेल पर चलते हैं, उनके लिए यह खबर सुनकर दिल की धड़कन बढ़ गई है. लोग पूछ रहे हैं– अब तेल कहां से आएगा?
भारत की ऊर्जा जरूरतें होर्मुज पर क्यों टिकी हैं?
भारत अपनी 85 से 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत बाहर से मंगाता है. इनमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है जो होर्मुज के बिना बाहर नहीं निकल सकते. सिर्फ तेल ही नहीं, कतर से आने वाली एलएनजी, रसोई के लिए एलपीजी और खेतों के लिए खाद बनाने वाले अमोनिया-सल्फर भी इसी रास्ते आते हैं. अगर यह रास्ता बंद रहा तो बिजली घर, रसोई गैस और किसानों की खाद सब पर असर पड़ेगा. महंगाई बढ़ेगी और सरकार को सब्सिडी का बोझ भी बढ़ जाएगा. यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ तेल का नहीं, पूरा अर्थव्यवस्था का है.
प्लान बी तैयार– केप ऑफ गुड होप का लंबा सफर!
अब भारत ने प्लान बी सोच लिया है. खाड़ी के बजाय अमेरिका, ब्राजील, गुयाना या पश्चिम अफ्रीका से तेल खरीदेंगे. ये जहाज अफ्रीका के सबसे नीचे वाले केप ऑफ गुड होप से घूमकर भारत पहुंचेंगे. यह कोई छोटा रास्ता नहीं है बल्कि पूरी सप्लाई बदलनी पड़ेगी. जहाजों को हजारों अतिरिक्त मील चलना होगा. लोग सोच रहे हैं कि यह तो पुराने जमाने की कहानी जैसा लगता है– जब जहाज अफ्रीका घूमकर आते थे. लेकिन आज के समय में भी यही विकल्प बचा है ताकि तेल की कमी न हो.
ज्यादा समय, ज्यादा खर्च-केप रूट की सच्चाई!
यह नया रास्ता 6 हजार से 10 हजार अतिरिक्त नॉटिकल मील लंबा है. एक बड़ा टैंकर 12-15 नॉट की रफ्तार से चलता है तो इसमें 2 से 4 हफ्ते ज्यादा लग जाएंगे. मतलब तेल आने में एक महीना ज्यादा! किराया भी आसमान छू जाएगा – एक कार्गो पर ही लाखों डॉलर एक्स्ट्रा खर्च. बीमा भी महंगा हो गया है. सबसे बड़ी समस्या यह कि पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी. भले ही भारत दूसरी जगह से तेल लाए, लेकिन ग्लोबल भाव बढ़ने से इंपोर्ट बिल अरबों डॉलर ज्यादा हो जाएगा.
केप ऑफ गुड होप निरंतरता तो दे ही सकता है
भारत के पास स्ट्रैटेजिक तेल भंडार हैं जो कुछ हफ्तों की कमी पूरी कर सकते हैं. लेकिन अगर यह संकट महीनों चला तो सिर्फ स्टॉक से काम नहीं चलेगा. सरकार को सप्लाई बदलनी होगी, पैसे का इंतजाम करना होगा और किसानों-उद्योगों को बचाना होगा. केप ऑफ गुड होप निरंतरता तो दे सकता है लेकिन आराम नहीं देगा. भारत को अब और मजबूत वैकल्पिक रास्ते ढूंढने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न आए. फिलहाल हर कोई उम्मीद कर रहा है कि जल्दी ही हालात सामान्य हों और पुराना रास्ता फिर खुल जाए.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें