जिनके हिजाब उतरवाने थे, उन्हें कफन में लपेट दिया, नन्हीं बच्चियों के ताबूत इतने भारी कि फट जाएगा सीना
Agency:एजेंसियां
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Iran-US War News: जंग तो जंग होती है, भले ही उसका मकसद कुछ भी हो. फिलहाल एक ऐसी ही जंग खाड़ी में लड़ी जा रही है. अमेरिका और इजरायल की शुरू की हुई जंग को ईरान हाहाकारी बना चुका है. आखिर ये शुरुआत हुई कहां से? इजरायल के कुछ सबसे पहले हमलों में एक स्कूल को निशाना बनाया गया था, वहां 7-12 साल की बच्चियां पढ़ रही थीं और स्ट्राइक के बाद जो तस्वीरें आईं, तो इंसानियत को शर्मसार करने वाली हैं.
दक्षिणी ईरान के शहर मीनाब में जमीन खोदी जा रही है, निर्माण के लिए नहीं बल्कि 165 छोटी कब्रों के लिए. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, ये कब्रें उन स्कूली बच्चियों की हैं जो शनिवार को हुए अमेरिका- इजराइल हवाई हमले में मारी गईं. ये झरोखे नहीं, वही कब्रें हैं, जिनमें मासूम देह दफ्न हुई. (AP)
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि संघर्ष की शुरुआती बमबारी में एक प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह ध्वस्त हो गया. यही घटना अब तक की सबसे भयावह बताई जा रही है. ईरान के इस दावे के बाद इजरायल ने कहा था कि वो इसकी जांच करेगा. अब जो तस्वीरें आईं, वो जांच से कहीं ज्यादा भयावह हैं. (AP)
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर सामूहिक जनाजे की तस्वीरें साझा कीं. उन्होंने दावा किया कि बच्चों के शव बमबारी में बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए. ये स्कूल लड़कियों का था और जब हमला हुआ, वे अपनी कक्षाओं में पढ़ रही थीं.
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मंगलवार को आयोजित सामूहिक अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए. टीवी फुटेज में भीड़ ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगाती दिखाई दी. महिलाएं भी इस भीड़ का हिस्सा थीं और उनके हाथों में अपनी नन्हीं बच्चियों की तस्वीरें थीं.
अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर निशाना साधते हुए लिखा- ‘यही है वह ‘बचाव’ जिसका वादा किया गया था. गजा से मीनाब तक निर्दोषों की हत्या.’ अजीब बात ये भी है कि अमेरिका ईरान की बच्चियों के सिर से हिजाब हटाकर आजादी की सांस देने की बात कर रहे थे लेकिन वे कफन में लिपटकर कब्र में जा रही हैं.
जनाजे के दौरान अतेना नाम की एक बच्ची की मां ने भीड़ को संबोधित किया. हाथ में तस्वीरें लिए उन्होंने मृत बच्चों को अमेरिकी अपराधों का सबूत बताया और कहा कि वे ईश्वर के रास्ते में शहीद हुई.
यह हमला उस व्यापक सैन्य अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है, जो पिछले शनिवार से शुरू हुआ. ईरान का कहना है कि इस अभियान में उसके सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष नेता भी मारे गए. उसी दिन ये बच्चियां भी रूह बनकर चली गईं.
उधर, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि घटना की जांच की जाएगी. विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका जानबूझकर किसी स्कूल को निशाना नहीं बनाता. दुनियाभर के किसी भी मानवाधिकार संगठन के पास इसका जवाब नहीं है. (AP)
इजराइली पक्ष से अलग-अलग बयान सामने आए. एक सैन्य प्रवक्ता ने मीनाब में हमले की जानकारी से इनकार किया, जबकि संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने संकेत दिया कि विस्फोट के पीछे ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) भी हो सकता है.<br />(AP)
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि संघर्ष की शुरुआती बमबारी में एक प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह ध्वस्त हो गया. यही घटना अब तक की सबसे भयावह बताई जा रही है. ईरान के इस दावे के बाद इजरायल ने कहा था कि वो इसकी जांच करेगा. अब जो तस्वीरें आईं, वो जांच से कहीं ज्यादा भयावह हैं. (AP)
संघर्ष अब ईरान की सीमाओं से बाहर फैल चुका है. तेहरान में रातभर धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले पूरे क्षेत्र में जारी हैं. अमेरिकी विदेश विभाग ने यूएई, कुवैत, कतर, बहरीन, जॉर्डन और इराक सहित छह देशों से गैर-जरूरी कर्मचारियों की निकासी के आदेश दिए हैं. कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. (AP)
संयुक्त राष्ट्र में एक और विडंबनापूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब मेलानिया ट्रंप ने संघर्ष में बच्चों की सुरक्षा विषय पर सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता की. ईरान के प्रतिनिधि ने इसे पाखंड करार दिया. मीनाब की 165 छोटी कब्रें इस युद्ध की सबसे दर्दनाक तस्वीर बन चुकी हैं.